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Saturday, July 28, 2012

"परबत बनेंगे, सड़क धीरे-धीरे" (चर्चा मंच-९५४)

मित्रों! कल की रविकर जी की चर्चा में
आदरणीय डॉ.सुशील जोशी जी ने
एक प्रश्न किया था!
इसका उत्तर यदि किसी के पास हो तो
इस चर्चा की टिप्पणी में देने की कृपा करें!
प्रश्न 1 चर्चा मंच में लाकर आप लोगों के ब्लाग के बारे में
बताते हैं आप का उद्देश्य क्या है ?
लोग अपना अपना ब्लाग देखते हैं
आभार कहते हैं चले जाते हैं

उनका इतना ही उद्देश्य है क्या?
चर्चा मंच आप क्यों लगा रहे हैं?
(2)
हँसा हँसा के तुने नाजुक दिल तोड़ा.
गिला तुझसे भला हम करते भी कैसे,
तेरी मेहरबानी जो गम से रिश्ता जोड़ा।
(3)
(4)
(5)
(6)
(7)
(8)
(9)
सलाम हिन्दुस्तानी सैनिकों को
(10)
(11)
नीम-निम्बौरी
(12)
क्योंकि फेसबुक इस्तेमाल करने वालो के
कंप्यूटर को एक नए तरह के वाइरस से खतरा हो सकता है
(13)
१. ईश्वर की होती है जो इच्छा वह कर लेता है
उसके पास समय हैं संसाधन हैं बल है छल है बहाने हैं
क्योंकि वह ईश्वर है ...
(14)
राजीव जी ! अगर भगवान सब कुछ कर सकता है ।
तो क्या वो अपने आपको मार सकता है ?
क्या वो अपने आपका अस्तित्व समाप्त कर सकता है ।
अगर नहीं । तो उसे सर्व शक्तिशाली नहीं कह सकते ।
क्या वो 2 और 2 पाँच कर सकता है ?
(15)
सच क्या था , क्या है ,
क्या होगा वह - जो तुमने उसने मैंने -
कल कहा या आज सोच रहे या फिर कल जो निष्कर्ष निकला या निकाला जायेगा !
सच का दृश्य सच का कथन ......
पूरा का पूरा लिबास ही बदल जाता है !
(16)
हाँ मैं अन्ना के साथ हूँ, रामदेव के साथ हूँ ,
मोदी के साथ हूँ, सुब्रमण्यम स्वामी के साथ हूँ, केजरीवाल के साथ हूँ।
यदि इनका साथ न दूं तो क्या सेक्युलर कोढियों ...
(17)
(18)
समाअतों का यहाँ सिलसिला तो हो कोई,
चलो गिला ही सही, इब्तिदा तो हो कोई.
है इंकलाब ही इस दौर की ज़रूरत अब,
पर इन्कलाब यहाँ चाहता तो हो कोई.
(19)
अन्ना हजारे के स्थान पर इस बार अन्ना टीम ने
अनशन करने का फैसला किया।
मुद्दा वही एक जनलोकपाल बिल को पारित करवाने की मांग...
(20)
एक आधुनिक कहावत है कि दूध के फटने पर वे ही दुखी होते हैं,
जिन्हें फटे दूध से पनीर बनाना नहीं आता।
अर्थात दुखी वे ही होते हैं, जिन्हें विपरीत परिस्थिति में ...
(21)
टी.वी.पर साक्षात्कार देती आपकी 'हीर'
Photo: Mum's Interview...........................!!
(22)
मैं जानता हूँ मेरी चंद ख़्वाहिशों के रास्ते नक़्शे पर दिखाई नहीं देते,
मैं जानता हूँ मेरे कुछ सपनों के घरों का पता
किसी डाकिये को नहीं, मैं जानता हूँ ...
(23)

ऐ काश कि तुम आ जाओ, और भर लो मुझको बाहों में !
मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ, मत छोड़ मुझे इन राहों में !!
(24)
बाबा ताऊश्री के पास भक्त जनों की भीड
हर समागम में बढती ही जा रही है.
यूं तो दुनियां में हर वस्तु का अनुपात बराबर ही होता है.
इस नियम का पृकृति में भी अपवाद नही है.
पर भक्त जन सुख को तो महसूस नही कर पाते ...
(25)
बढ़ेंगे तुम्हारी तरफ धीरे-धीरे।
जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।।

नया है मुसाफिर, नयी जिन्दगी है,
नया फलसफा है, नयी बन्दगी है,
पढ़ेंगे-लिखेंगे, बरक धीरे-धीरे।
जुबाँ से खुलेंगे, हरफ धीरे-धीरे।।

60 comments:

  1. सुन्दर बेहतरीन प्रस्तुति आभार शास्त्रीजी

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  2. उत्तम चर्चा |बहुरंगी लिंक्स |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

    ReplyDelete
  3. (25)
    "परबत बनेंगे, सड़क धीरे-धीरे"

    बहुत खूब !

    अब पक्का सीखेंगे हम भी धीरे धीरे
    क्या आप भी लिख रहे हैं धीरी धीरे
    सबके ब्लाग खोलेंगे हम धीरे धीरे
    कुछ ना कुछ जरूर बोलेंगे धीरे धीरे !!!

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  4. (24)
    बाबा जी के चरणों में अरबी अरबी परणाम !

    ताऊ जी कुछ कंसेशन कर देते
    तो अपना धंदा भी चल जाता
    कुछ लोगों को फंसा कर
    कमीशन बना कर आपके लिये
    मैं भी ले आता
    आप तो डुबकी लगा रहे हैं
    मेरे भी हाथ में एक
    आद लोटा आ जाता
    आपका क्या जाता
    सोच के बता दीजियेगा
    समझ में आ जाये
    मेरे लिये एक काउंटर
    कहीं पर डलवा दीजियेगा !!!

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  5. (23)
    मत छोड़ मुझे इन राहों में !

    सुंदर !

    मोह्ब्बत करते हो अच्छा किया बता दिया
    मोह्ब्बत करने ने देखो तुमको कवि बना दिया !

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  6. (22)
    मैं जानता हूँ सब कुछ, फिर भी ...
    वाह !
    वाकई बहुत कुछ
    जानते हैं आप
    अंत तक पहुँचते पहुँचते
    जग रही है आस
    करिश्मा देखिये
    होने ही वाला है
    सपना सपना अब
    नहीं रहने वाला है
    डाकिये को भी
    पता हो गयी
    है ये बात
    नहीं भी आयेगी
    पाती तब भी
    एक तो पक्का वो
    खुद लिख कर
    लाने वाला है !!

    ReplyDelete
  7. चर्चा मंच विशेष रहा जितने पढ़े लिंक सभी पे टिपियाए बिना रहा न गया ......कृपया यहाँ भी पधारें -

    कविता :पूडल ही पूडल
    कविता :पूडल ही पूडल
    डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

    जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
    इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

    (१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

    यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

    फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

    यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

    ReplyDelete
  8. (21)
    तेरी होंद , रिश्ता दर्द और उडारी ......

    बहुत ही बेहतरीन
    बनाई हैं
    मगर गुस्सा भी
    आ रहा है
    क्यों इतनी सुंदर
    सी नज्में
    रोटियों के
    संग जलाई हैं !!

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    Replies
    1. औरत अगर रोटियाँ न बनाये तो घर कैसे चले ...?
      इसलिए बहुत सा लेखन पन्नों पर उतर ही नहीं पाता ...
      बस रोटियों के साथ जलता रहता है सुशिल जी ....

      Delete
    2. घर भी चलाती हैं
      रोटीय़ाँ भी पकाती हैं
      औरत भी गजब है
      क्या क्या नहीं कर जाती हैं
      आदमी को करना पड़ता है
      अगर कभी ये काम
      मुझे मालूम है
      नानी याद आ जाती है
      वो तो अच्छा है
      श्रीमति मेरी अभी
      कविता नहीं पकाती हैं !

      Delete
    3. कविता पकातीं
      तो रोटियाँ जलीं मिलती ....:))

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  9. (20)
    गुटके पर पाबंदी : जम कर मची है लूट

    अब बताने में वो बात नहीं
    जो बात को छुपाने में है
    बताने मे मिलता है एक
    छुपाने से हजार हो जाता है
    फिर कोई बात कोई क्यों कर
    बताने चला आता है
    जब छुपाने मे ज्यादा
    हाथ आ जाता है !!

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  10. (19)
    आवश्यकता व्यावहारिकता की है, अनशन की नहीं

    विचारणीय प्रश्न हैं उठाये
    पर मेरी समझ में भी
    अन्ना अभी तक नहीं आये
    अन्ना अपने जगह पर ठीक हैं
    उनके खड़े होते ही
    क्यों हो जाते हैं
    जगह जगह के सांप
    बगल में उनकी फोटो के
    अपना फन उठाये
    सफेद टोपी अपने सर पर
    एक लगाये ?

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    Replies
    1. Anna ji thk kh rhe hai magar swal yah hai ki unke andola me sharik lakho ka hujum aur us hujum me shark hajaro chehre emandari se "KHUD KTNE EMANDAR HA"

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  11. ujalo ne chala mujhko andheri koyhari me,kahege dasta apni hm magar dhire-dhire, yha tk aate-aate roshni bhi sihar jati hai,charcha ujalo ki krege hm magar dhire-dhire,n kuch bhi kh skege hm sharmsharo se akele me,unho ne hi utare hai mere kpde magar dhire-dhire.


    Enhi Chand Shabdo Ke Sath es behtarin "CHARCHA KI CHARCHA " Krege hm magar dhire-dhire. qo ki "Tej ya Uchi aawaj" me bolna tahjib ke khilaf hai aur fushfushahat ki bat hi alg hai,

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  12. (18)
    तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई

    मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,
    तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई.

    बहुत सुंदर !

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  13. बहुत सुंदर ! बेहतरीन प्रस्तुति आभार शास्त्रीजी !

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  14. (17)
    उम्र के दो विपरीत बिंदुओं पर खड़ी
    दो कवयित्रियां आदरणीया निर्मला कपिला जी
    और अनन्‍या सिंह की ग़ज़लें ।

    दोनो ही बहुत ही सुंदर गजलें है !

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  15. (16)
    केजरीवाल...

    आदमी के नहीं
    मकसद के साथ
    होना जरूरी है
    मकसद के जिंदा
    रहने को आदमी
    का जिंदा रहना
    भी जरूरी है !

    केजरीवाल जी के स्वस्थ्य होने के लिये प्रार्थना करेंगे !

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  16. बहुत बढ़िया लिंक्स के साथ सुन्दर चर्चा प्रस्तुति
    आभार

    ReplyDelete
  17. (15)
    सच क्या है ?

    बहुत खूब !

    समय है सच
    या सच समय है
    सच सच है
    समय समय है
    इस से पहले
    समय हो जाये
    चलो आउट हो जायें !

    ReplyDelete
  18. (13)
    ईश्वर
    बहुत सुंदर !
    हाँ कुछ हो तो रहा है
    ईश्वर को !

    क्या परेशानी है
    चलो हम तुम भी
    ईश्वर हो जाते हैं
    अपनी सत्ता अपने
    आप चलाते हैं

    ReplyDelete
  19. (12)
    फेसबुक इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाए |

    फेसबुक क्या किसी वायरस से कम है ?

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  20. (11)
    संतोष त्रिवेदी का लेख और रविकर की कुंडली

    करेला और नीम
    दोनो साथ साथ
    वाह मजा आ गया !

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  21. सुबह का कोटा पूरा
    शाम को करेंगे बाकी
    का अधूरा !!

    (10)
    जालिमों की हकीकत को,

    शानदार और
    जानदार तमाचे
    वाह वाह !!
    नमक मिर्च
    के साथ वो खायेंगे
    फिर भी
    कौन सा शरमायेंगे
    हाथ जोडे़गे दाँत
    दिखायेंगे !!

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    Replies
    1. आभार शास्त्रीजी !
      कारगिल विजय दिवस -सलाम हिन्दुस्तानी सैनिकों को !

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  22. बेहतरीन प्रस्तुति आभार शास्त्रीजी

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  23. बेहतरीन चर्चा...बेहतरीन प्रस्तुति....

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  24. खूबसूरत लिंक संयोजन्।

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  25. मैं आदरणीय सुशील जी के प्रश्न से बिलकुल सहमत हूँ. मेरे मन में भी कई बार विचार आया था, कि चर्चामंच पर सभी अपने-२ ब्लोग्स के लिंक्स देखते हैं या फिर १ या २ लिंक्स पढ़ते हैं, कुछ धन्यवाद बोलकर कुछ बिना कुछ बोले चर्चामंच को छोड़ जाते हैं. शायद इसलिए क्यूंकि समय का आभाव रहता है या फिर सभी सिर्फ अपनी ही रचनाओं को चर्चामंच पर देखने आते हैं. मैं सोंचता हूँ की एक समय निर्धारित किया जाए चर्चा का चर्चा मंच पर, जब सभी लोग मिलकर चर्चामंच पर आयें और अपने -२ विचार प्रकट करें. अगर ऐसा होता है तो सभी को एक दूसरे को समझने में जानने में आसानी होगी. अगर मैंने कुछ गलत कह दिया हो तो क्षमा प्रार्थी हूँ.

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  26. बेहतरीन लिंक्‍स के साथ अच्‍छी प्रस्‍तुति ...आभार

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  27. सभी सूत्र एक से बढ़कर एक रोचक हैं हार्दिक बधाई आपको इस सुन्दर चर्चा के लिए

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  28. मै सुशिल जी की बात से पूरी तरह सहमत हूँ.वाकई ऐसा ही होता है की लोग आते हैं और अपना ब्लॉग लिंक देख कर आभार कहकर चले जाते हैं.चर्चा मंच का मकसद नए नए ब्लोगर्स को सभी से मिलवाया जाये,और अच्छे अच्छे आर्टिकल्स को लोगों तक पहुँचाया जाये.इस तरह ब्लोगर्स को प्रमोशन मिलता है.अच्छे लिनक्स को जाकर पढने वाले भी बहुत हैं.बस फर्क ये है की शायद वो कमेंट्स नही करते.लेकिन चर्चा मंच के द्वारा दिए गये लिनक्स को काफी लोग पढ़ते हैं.

    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

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  29. चर्चा में सम्मिलित ब्लॉग के लिनक्स से नए ब्लोगर की जानकारी बढती है .मैंने जब ब्लोगिंग शुरू की थी तब चर्चा मंच के माध्यम से ही मैं अन्य ब्लोग्स तक पहुंची ,चर्चा मंच सभी ब्लोगर्स की ब्लोग्स के बारे में जानकारी बढाता है .यह एक सफल मंच है .मेरी रचनाओं को यहाँ स्थान देने हेतु हार्दिक धन्यवाद .

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  30. चर्चा मंच एक ही जगह विभिन्न विषयों की उत्कृष्ट रचनाओं को लाकर उन तक पहुँचने का अवसर देता है और इस उद्देश्य में यह पूरी तरह सफल रहा है.

    सुन्दर लिंक्स के साथ रोचक चर्चा...आभार

    ReplyDelete
  31. चर्चा मंच एक लाइब्रेरी है... ओपन ब्लाग लाइब्रेरी जहां अनेक शानदार ब्लाग के लिंक्स एक साथ मिल जाते हैं... यहाँ केवल वे ही नहीं आते जिनके पोस्ट संकलित हैं बल्कि अच्छी रचनाओं के तलबगार भी आकर विभिन्न लिंक्स/रचनाओं का पठन लाभ लेते हैं... मंच के सभी चर्चाकार जो तपस्या करते हुये उत्कृष्ट लिंकों का गुलदस्ता प्रतिदिन तैयार करते हैं बधाई के पात्र है....
    सादर।

    ReplyDelete
  32. सुंदर प्रस्तुति |

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  33. Har Taraf Bas Apka hi Jalwa hai.

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  34. (9)
    कारगिल विजय दिवस

    जज्बे को सलाम !

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  35. बहुत ही सुन्दर सूत्र सजे हैं।

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  36. लिंक - १


    दो सौ पचासवी पोस्ट कर, मचा दिया धमाल
    बहुत-बहुत बधाइयां स्वीकारे,कर दिया कमाल,,,,,,,

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  37. (8)
    पहनावे की ले आड़ ...अपना पल्ला झाड़ !

    अति हर चीज की बुरी होती है
    हमें महसूस होता है कि सीमा
    किसी चीज की फिर क्यों होता है
    ये बात कपड़े पर भी लागू होती है
    उतनी ही लागू ये आदमी की
    सोच पर भी तो होती है !!

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  38. (7)
    सावधान! सोशल नेटवर्किंग आपकी नौकरी खा सकती है

    हर चीज के सकारात्मक और नकारात्मक पहलू हैं !
    अति का भला ना बरसना
    अतिअ की भली ना धूप
    सदबुद्धी जरूरी है !!

    बहुत सूंदर लेख !

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  39. (6)
    श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद
    बहुत ही आनन्द दायक लेखन !

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  40. (5)
    उपन्यास सम्राट प्रेमचंद
    बहुत सुंदर और सारगर्भित लेख !!

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  41. (4)
    कानूनी ज्ञान

    बहुत सुंदर
    जरूरी है कानून का ज्ञान भी !

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  42. चर्चा मंच एक अन्वेषी का काम करता है नए ब्लोगियों की खोज उनके काम को सामने लाना पाठक संख्या बढती है उन सेतुओं (लिंक्स )की जिन्हें चर्चा मंच में स्थान मिलता है .दायरा विस्तृत होता है दिमाग खुलतें हैं हमारे औरों के काम तक पहुँचने का मौक़ा मिलता है .

    ..कृपया यहाँ भी पधारें -

    कविता :पूडल ही पूडल
    कविता :पूडल ही पूडल
    डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

    जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
    इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

    (१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

    यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

    फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

    यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

    ReplyDelete
  43. पहनावे की ले आड़ ...अपना पल्ला झाड ,पैरहन की आड़ में वही लोग उलझते हैं जो औरत को सिर्फ योनी समझतें हैं ,सेक्स मेनियाक हैं ये "लिबास "तक औरत की देह -यष्टि तक सीमित लोग ,अफ़सोस इनमे कई एनाटोमी के माहिर डॉ भी शरीक हैं रही बात कथित नग्नता की वह तो मन की होती है शरीर की ही होती तो अमरीका की इंद्र नगरी लास वेगास में अपराध दर न्यूनतम होती यहाँ तो मेनकाएँ और उर्वशियाँ सिर्फ मुकुट और सिल्हेटो(हाई हील्स )ही पहने रहतीं हैं शेष पैरहन दिखाऊ ज्यादा होता है आवरण कम .

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  44. 2
    दिया सबकुछ मगर कुछ फर्क छोड़ा,
    हंस रहे हैं और दिल तुड़ा रहे हैं
    रैना जी एक नयी किस्म दिल
    की ला कर दिखा रहे हैं !!
    बहुत खूब !

    ReplyDelete
  45. रविकर आज पता नहीं क्यों शरमा रहे हैं
    टिप्पणी करने के लिये भी नहीं आ रहे हैं
    अरे भाई अब तो आ जाओ हम भी
    अपना काम पूरा कर के जा रहे हैं !

    ReplyDelete
  46. चर्चा मंच एक अन्वेषी का काम करता है नए नए ब्लोगियों को ढूंढ के लाता है उनका काम प्रदर्शित करता है ,कुछ अच्छा लोगों तक पहुंचता है .लोगों का बंद दिमाग खुलता है लोग अपने घरौदों से बाहर निकलतें हैं उनके ब्लॉग को जिनका सेतु चर्चा में स्थान पाता है नए पाठक मिलते हैं .ये क्या कम है .और हाँ हमारे ब्लॉग परिवार का दायरा बढ़ता है .हमारा खुद का ब्लॉग आगे बढ़ता है .ये वह ज्ञान है जो बांटने साझा करने से बढ़ता है .यही सुशील जी के प्रश्न का समाधान है हमारी नजर में .चर्चा का यही ध्येय भी है .ताकी सनद रहे .

    ..कृपया यहाँ भी पधारें -

    कविता :पूडल ही पूडल
    कविता :पूडल ही पूडल
    डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

    जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
    इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

    (१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

    यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

    फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

    यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

    ReplyDelete
  47. सुशिल जी एक शिकायत मुझे भी है ...
    कई बार चर्चा मंच में ऐसी पोस्ट की चर्चा कर दी जाती है
    जिसका कोई औचित्य नहीं होता ....
    चर्चाकारों से इल्तजा है उन्हीं पोस्ट का ज़िक्र करें जिससे कुछ ज्ञान या सीखने को मिले ....
    न कि ''अंग्रेजों का कुत्ता भी हिंदी लिख लेता है ....''

    शुक्रिया डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री जी बहुत सी नई पोस्ट की जानकारी दी आपने .....
    आभार ...!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. अरे मैं तो मारा गया हरकीरत जी मेरी आज की पोस्ट मेरे ब्लाग पर मत पढ़ना प्लीज !

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    2. जी मैंने अभी अभी पढ़ ली ...
      पर मुझे बिलकुल नहीं पता था के आपने भी ये कमाल किया है .....:))

      Delete
  48. me charchamanch ki jyadatar post padhti hu kuch par comment karti hu kuch par nahi kar paati...islie mujhe to ye manch behtareen lagta hai...aj bhi isi uddesh se aai thi prashna mil gaya to uttar likh diya.yahi aakar pata chala meri post bhi aajki charcha me shamil hai uske lie aabhar....

    ReplyDelete

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