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Tuesday, May 28, 2013

"मिथकों में जीवन" चर्चा मंच अंक-1258 (चर्चाकारःडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
       बहन राजेश कुमारी जी मुम्बई प्रवास पर गयी हुई हैं इसलिए मंगलवार की चर्चा में  आज केवल सीमित चिट्ठों की ही चर्चा आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।
-1-
तुझसे लाड लड़ाने का मन करता है 
बचपन में फिर जाने का मन करता है  
दिगम्बर नासवा ने इस ग़ज़ल को बहुत नाज़ुक अशआरों से नवाजा है। जो पाठकों के दलों में गहराई तक उतरते चले जाते हैं।
-2-
ने अंजुमन पर एक बढ़िया गज़ल..  प्रस्तुत की है-
ख़ाक होने पे यकीं आया कि ज़मीं से बाबस्ता हैं हम। 
वरना तो ख़ुदा होने में कोई कसर बाकी न रही।।
अब तो यूँ कैद हैं खुद की बनाई कब्रों में। 
जैसे इस दुनिया से अपनी कोई यारी न रही.....
इस गज़ल में ग़ज़लकारा ने जीवन के एक अनछुए पहलू से रूबरू कराया है।
-3-
प्रेमरस.कॉम पर Shah Nawaz ने नक्सलवाद या आतंकवाद. पर एक प्रश्न उछाला है-आतंकवादी घटनाओं पर खौलने वाला खून आज ठंडा क्यों पड़ा है? जिसका उत्तर सिर्फ और सिर्फ हमारे जननायकों के पास है और जनता तो बेतारी लाचार सी दिशाहीन मूक बनी हुई है।
-4-
पथ का राही पर musafir कहते हैं- मौन सहमति नही थी, विरोध था..पर तुम मौन नही समझते, तुम भूख और तड़प नही समझते। नही सुना तुमने जब मौन तब हमने लिया है सहारा बंदूको का, ताकि तुम्हारे कान खुल सकें...। मुसाफिर जी अब तो आदि हो चुका है हमारा जनमानस इस परिवेश का।
-5-
Kunwar Kusumesh जी अपने ब्लॉग पर लिखते हैं- मंहगाई की मार अब जीना दुश्वार, लगातार यूँ पढ़ रही,मंहगाई की मार।.. विचारणीय विषय तो यह है कि ये मँगाई बढ़ा कौन रहा है? इसका उत्तर तो एक ही है- "सरकार"...वेतन बढ़ाने का उपक्रम करती है और महँगाई को तुरन्त ही बढ़ा देती है...ताकि सरकार में बैठे लोगों के सम्बन्धियों की चांदी हो जाये।
-6-
जो न कह सके पर sunil deepak आलेख लिखा है- मिथकों में जीवन जिसमें वे बता रहे हैं " चाहे हम मिथकों में छुपे ज्ञान को संजोने की सोचे या उनसे जुड़ी गलत सामाजिक परम्पराओं को बदलने की बदलने की कोशिश करें, उनके महत्व को नहीं नकार सकते. आधुनिक मिथकों को गम्भीरता से नहीं लेना चाहिये, पर अपनी सोच समझ से उनके सच और झूठ को परखना चाहिये." मिथक तो मिथक होते हैं कोई मानदण्ड नही हो सकते। आइए ऐसे मिथकों मको धराशायी करें और यथार्थ को पहचानें।
-7-
मेरी धरोहरपर yashoda agrawal ने अप्रवासी भारतीय डॉ. परमजीत ओबराय की रचना  आईना...........को प्रस्तुत किया है। जिसमें कवि ने लिखा है-"आईना वही है चेहरे बदल गए पुराने चेहरे लगे दिखने अब नए-नए। भावनाएं डूब गईं अब अंतर्गुहा में दिखावा हो गया प्रधान आज के इस जहान में। रिश्ते वही व्यवहार बदल गए धरती वही है लोग बदल गए आत्मा है वही शरीर बदल गए..." सच पूछा जाये तो आज की वास्तविकता यही है। हालात जरूर बदले हैं मगर लोगों की मानसिकता नहीं बदल पायी है।
-8-
RAAGDEVRAN पर MANOJ KAYAL ...एक अहसास कराते हुए लिखते हैं "क्यों तुम सिर्फ एक अहसास हो क्यों नहीं मेरे पास हो तलाशती है नजरे उस पल को जन्म लिया इस अहसास ने जिस पल को सोचता हु जब बंद कर आँखों को तस्वीर तब बुनता हु इन अहसासों की रंग भर जाते है ..."  सच पूछा जाये तो हम इन्हीं अहसासों के बल पर जीवित हैं। यदि अहसास ही नहीं होगा तो जिन्दगी के क्या मायने?
-9-
इधर अहसासों का रंगमंच पर Minakshi Pant प्रस्तुत कर रहीं है अपने कुछ हाइकु...जिनमें विधा भले ही जापानी हो मगर इनकी मार बहुत मारक होती है। इसीलिए तो हम हिन्दुस्तानियों ने इसे अपनी भाषा के माध्यम से व्यक्त करना सीख लिया है।
-10-
शंखनाद पर पूरण खण्डेलवाल अपने आलेख में कह रहे हैं- अब लाल आंतक की दहशत को मिटाना मुख्य ध्येय होना चाहिए... लेकिन यह काम जनता के बूते का नहीं है। इसे तो सरकार ही मिटा सकती है..कुछ कठोर कदम उठा कर।
-11-
अन्त में देखिए..यह रचना। 
जिसकी समीक्षा करने में मैं अपने आपको सर्वथा असमर्थ पाता हूँ !

सूरज की भीषण गर्मी से,
लोगो को राहत पहँचाता।।
लू के गरम थपेड़े खाकर,

अमलतास खिलता-मुस्काता।

20 comments:

  1. पठनीय सूत्रों से सजी चर्चा..

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  2. अच्छे लिंक्स
    आभार

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  3. रूपचन्द्र जी, चर्चामंच पर मेरे आलेख को स्थान देने का बहुत धन्यवाद :)

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  4. आज अलग अंदाज में सुन्दर चर्चा सजाई है !!
    सादर आभार !!

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  5. rachnao ka khooshurat aur sugandhit guldasta

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  6. बढिया चर्चा
    बहुत बढिया लिंक्स

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  7. भैय्या जी
    प्रणाम
    आपका अंदाज ही अलग है
    प्रस्तुतिकरण का
    सर्वथा अद्यतन लिंक आपसे ही मिलते हैं पढ़ने को
    आभार

    सादर

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  8. बेहतरीन लिंक्‍स एवं प्रस्‍तुति
    सादर

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  9. आभार मेरी रचना को जगह देने के लिए ...

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  10. मैं आपकी तहे दिल से आभारी हूँ आपने मेरी रचना को फिर चर्चा मंच में स्थान देकर मुझे सम्मान दिया आपका बहुत - २ शुक्रिया |
    खुबसूरत चर्चा मंच |

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  11. .सराहनीय प्रयास .सुन्दर लिनक्स संजोये हैं आपने ..आभार . हम हिंदी चिट्ठाकार हैं.
    BHARTIY NARI .

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  12. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ....आभार

    ReplyDelete
  13. बहुत सुन्‍दर चर्चा बहुत सुन्‍दर लिंक सजोयें है आभार
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  14. आदरणीय गुरुदेव श्री बहुत ही सुन्दर लिनक्स संजोये हैं आज की चर्चा में हार्दिक आभार आदरणीय.

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  15. बढ़िया लिंक्स....

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  16. सुन्दर लिंक्स संजोये हैं बढिया चर्चा

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  17. अच्छे संयोजन हेतु बधाई.

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