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Tuesday, November 26, 2013

"ब्लॉगरों के लिए उपयोगी" ---१४४२ खुद का कुछ भी नहीं

आज की मंगलवारीय  चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते , आप सब का दिन मंगल मय हो, अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लॉग्स पर 


कुछ मोती अनमोल

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आरुषि...भोर के आकाश की लालिमा...खुशदीप

Khushdeep Sehgal at देशनामा

राह

MANOJ KAYAL at RAAGDEVRAN 
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"पोस्ट को लगाने के बारे में उपयोगी सुझाव" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक at उच्चारण - 

आशाओं की डिभरी ----------


परिकल्पना और स्त्री

रश्मि प्रभा... at परिकल्पना

अबला कहो जरूर, किन्तु रस्ता मत रोको-


खुद का कुछ भी नहीं

Asha Saxena at Akanksha

सदियों का ये नाता है...!

अनुपमा पाठक at अनुशील -
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मनु की सन्तान को

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Science of Hanuman Chalisa


Bhagsu Naag भागसू नाग में स्नान व दिल्ली वापसी


तुम

कालीपद प्रसाद at मेरे विचार मेरी अनुभूति -
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महाचोर बदनाम, चुरा नैनों का काजल-

रविकर at "लिंक-लिक्खाड़" - 

नीति, राजनीति व कूटनीति ....डा श्याम गुप्त ....


राह

MANOJ KAYAL at RAAGDEVRAN
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पीहर से बढ़कर है मेरी ससुराल सखी(गीत )

Rajesh Kumari at HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR

आरुषि हत्याकांड . ::कसूरवार कौन?

नीलिमा शर्मा at Abhilasha

ग़ज़ल------उन के अश्कों को------डा श्याम गुप्त.....


एक गीत -बहुत दिनों से इस मौसम को बदल रहे हैं लोग

जयकृष्ण राय तुषार at छान्दसिक अनुगायन -

तहलका का साहस अब कहां है? - अरुंधति रॉय

Reyaz-ul-haque at हाशिया
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आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ  फिर चर्चामंच पर हाजिर होऊँगी  कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय ||

जारी है "मयंक का कोना"
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पूर्ण शून्य है,शून्य ब्रम्ह है एक अंश सबको हर्षाये 
आधा और अधूरा होवे, शायद प्रेम वही कहलाये मिट जाये....
अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
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कभी तफ़सील से करेंगे
रूमानी जीस्त के चर्चे
अभी तो चल रही है
नाज़ुक लहूलुहान हवाएँ
डगमगाती
थरथराती
घबराती
इन्हें सँभालना जरुरी है...
लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम 
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भारतीय नारी पर savan kumar
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कार्तिक अगहन पूस ले, आता जब हेमन्त 
मन की चाहत सोचती, बनूँ निराला पन्त |
शाल गुलाबी ओढ़ कर, शरद बने हेमंत | 

शकुन्तला को  ढूँढता , है मन का दुष्यन्त... 
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ग़ज़ल--उन के अश्कों को---
डा श्याम गुप्त.....

उन के अश्कों को पलकों से चुरा लाये हैं | 
उनके गम को हम खुशियों से सजा आये हैं 
आप मानें या न मानें यह तहरीर मेरी , 
उनके अशआर ही ग़ज़लों में उठा लाये हैं...
--
"मौन मत रहा कीजिए"

कुछ सुना कीजिए, कुछ कहा कीजिए!मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!
गम को मिल-बाँटकर, बोझ हल्का करो,बात पर बेहिचक तप्सरा कीजिए...
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Beets contain vitamin C, sulfur, iron 
and are known for their ability 
to cleanse the blood  
नुस्खे ही नुस्खे आजमा  के देखें 
(१)मधुमेह ग्रस्त लोगों को ब्राउन राइस खाना चाहिए। 

यह खून में ग्लूकोज़ के स्तर को 
यकसा बनाये रखने में मदद करता है...
--
एक संदेश
पाले रीतियां, ये चीटियां, दे रही संदेश ।
अनुशासीत हो, आप सब जो, न हो कोई क्लेश ।
एकता में बल, ना करो छल, शंका न लवलेश ।
सफल जो होना, साथ रहना, विनय करे ‘रमेश‘ ।।

--
स्त्रियों को उनकी मौलिक स्थिति का बोध कराएं

बीसवीं सदी महिलाओं की है, ऐसा गांधी जी ने कहा था। 
उन्होंने आह्वान किया था कि महिलाओं को 
उस अंधेरे से निकालो जहां वे वर्षों से पड़ी हैं...
--
मुश्किल हो लाख, नमनीदा न हो

मुश्किल हो लाख, नमनीदा न हो
जिन्दगी ही क्या, जो पेचीदा न हो।
जो न मुस्कराते रहें, वो लब नहीं
जख्म वो कैसा जो पोशीदा न हो।
--
मत बताना नहीं मानेंगे 
अगर कहेगा ये सब 
तू ही कह रहा था  
पिछले दो दिन
से यहाँ दिखाई 
नही दे रहा था 
पता नहीं कहाँ जा कर  
किस को गोली दे रहा था 
खंडहर में उजाला नहीं हो रहा था...
उल्लूक टाईम्स पर 
सुशील कुमार जोशी 
"प्यार की बातें करें" 
काव्य संग्रह "सुख का सूरज से
एक ग़ज़ल
वन्दना, आराधना उपहार की बातें करें।।
प्यार का मौसम है, आओ प्यार की बातें करें।
नेह की लेकर मथानी, सिन्धु का मन्थन करें,
छोड़ कर छल-छद्म, कुछ उपकार की बातें करें...
सुख का सूरज
--
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

21 comments:

  1. शुभ प्रभात |
    विविध लिंक्स से सजा आज का चर्चा मंच
    आपकी महनत रंग लाती कहता है यह मंच |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  2. सुन्दर चर्चा!
    आभार!

    ReplyDelete
  3. सुंदर सूत्रों की माला पिरोये हुऐ आज की चर्चा में उल्लूक का 'मत बताना नहीं मानेंगे
    अगर कहेगा ये सब तू ही कह रहा था' को शामिल करने के लिये आभार !

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  4. सुन्दर चर्चा सजाई है आपने .. अच्छे एवं पठनीय लिंक्स ..

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  5. बढ़िया चर्चा मंच -
    आभार दीदी-

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  6. कहानी- सवाल एक करोड़ का
    savan kumar
    भारतीय नारी






    बेटा लगता दाँव पर, युद्ध-क्षेत्र में भीड़ |
    अब नकार हुंकार या, तिनके तिनके नीड़ |

    तिनके तिनके नीड़, चीर दे कई कलेजे |
    यह तो टुकड़ा एक, करोड़ों कहाँ सहेजे |

    बिखर गए अरमान, कौन था उस दिन लेटा |
    जब बिछ गई विसात, कौन फिर किसका बेटा ||

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  7. जमाली चाय दे स्वर्गिक आनंद का अहसास Best Herbal Tea
    DR. ANWER JAMAL
    Blog News









    माली हालत देश की, होती जाय खराब |
    आधी आबादी दुखी, आधी पिए शराब |

    आधी पिए शराब, भुला दुःख अद्धा देता |
    चारित्रिक अघ-पतन, गला अपनों का रेता |

    रविकर कम्बल ओढ़, पिए नित घी की प्याली |
    सुरा चाय पय छोड़, छोड़ता चाय जमाली ||

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  8. जमाली लिंक्स से सजा आज का चर्चा मंच

    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

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  9. बहुत अच्छा , ब और ब , धन्यवाद
    नया प्रकाशन --: तेरा साथ हो, फिरकैसी तनहाई

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  10. अच्छे एवं पठनीय लिंक्स .. धन्यवाद

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  11. बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ..आभार

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  12. आदरणीया राजेश कुमारी जी मुझे शामिल करने के लिया हृदय से आभार |सभी लिंक्स बहुत सुन्दर हैं |

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  13. अच्छे एवं पठनीय लिंक्स .. धन्यवाद

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  14. sundar laga charcha ka ye sankalan..............

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  15. सुन्दर लिंक सदा के भाँती...मेरी पोस्ट सम्मिलित करने हेतु धन्यवाद....

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  16. उपयोगी लिंकों के सात बढ़िया चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार बहन राजेश कुमारी जी।

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  17. चर्चामंच पर उपस्थित होने पर आप सभी मित्रों का हार्दिक धन्यवाद .

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  18. सुंदरतम लिंक्स संकलन,,,,,,,,मुझे भी सम्मिलित करने हेतु आभार.........

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