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Sunday, July 28, 2019

" वाह रे पागलपन " (चर्चा अंक- 3410)

स्नेहिल अभिवादन   
रविवासरीय चर्चा में आप का हार्दिक स्वागत है|  
देखिये मेरी पसन्द की कुछ रचनाओं के लिंक |  
 - अनीता सैनी 
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दोहे 
"देंगे मिटा गुरूर" 
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

 उच्चारण 
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वाह रे पागलपन 
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उम्मीद तो हरी है 
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उसको जा के कह दे कोई .. 
( ग़ज़ल ).. - डॉ शरद सिंह 

 Sharad Singh 
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दोषी मैं कब भला !? - सिगरेट 
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बंजारा बस्ती के बाशिंदे 
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बारिश से 
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कविताएँ 
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*"किस विधि मिलना होय"* 

 " सोच का सृजन " 
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सत के पथ पर चलना होगा 
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 डायरी के पन्नों से 
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कविता : छोटी सी चिड़िया 
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 बाल सजग 
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अज्ञातवास  
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अग्निशिखा : 
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निज घर : लटक मत फटक : व्योमेश शुक्ल 

 समालोचन 
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 यमुना का दर्द 
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मुसाफ़िर...अल्फ़ाज़ों का 
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तू बता दे कि फायदा क्या है …. 
डॉ.नवीन मणि त्रिपाठी 

11 comments:

  1. उपयोगी लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार अनीता सैनी जी।

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण के लिए साधुवाद
    मेरे लेखन को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार आपका

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  3. प्रिय अनिता सैनी जी,
    आपने आज का चर्चा मंच बहुत ही श्रमपूर्वक रोचक पठन सामग्री की लिंक्स से सुसज्जित किया है। साधुवाद !!!

    आज के चर्चा मंच पर मेरी पोस्ट शेयर करने के लिए
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार !!! 🙏

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  4. अनीता जी इस अंक में ज्ञानीजनों के रचनाओं के बीच मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका आभार।
    सभी प्रबुद्धजनों की रचना सहित मनमोहक संकलन ... वाह्ह्ह्ह्ह् ...

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  5. सुन्दर प्रस्तुति.मेरी कविता शामिल की. आभार.

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  6. शुभ संध्या, सुंदर रचनाओं के मेले में मुझे भी शामिल करने के लिए चर्चा मंच का आभार..

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  7. बहुत सुंदर लिंक सयोजन
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मिलित करने का आभार
    सादर

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  8. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  9. शानदार प्रस्तुति सभी सामग्री बहुत आकर्षक और पठनीय।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

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