Wednesday, July 24, 2019

"नदारत है बारिश" (चर्चा अंक- 3406)

बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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सोचते सोचते 

सु-मन (Suman Kapoor)  
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कोख 

मन के पाखी पर Sweta sinha  
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सुनो चाँद !--  

कविता 

अब  नहीं हो! दुनिया के लिए, 
 तुम तनिक  भी अंजाने, चाँद!
 सब जान गए राज तुम्हारा 
 तुम इतने  भी नहीं    सुहाने, चाँद! 

बहुत भरमाया सदियों तुमने ,
 गढ़ी एक झूठी कहानी थी;
 रही  वह तस्वीर एक धुंधली  ,
नहीं कोई सूत कातती नानी थी;
बने युगों से बच्चों के मामा -
 क्या कभी आये लाड़ जताने?चाँद !... 
क्षितिज पर रेणु  
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पढ़ना जरूरी है 

बारूद में लिपटी 
जीवन की किताब को
पढ़ते समय
गुजरना पड़ता है
पढ़ने की जद्दोजहद से... 
Jyoti khare  
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चमकीले ख्वाबों 

मैंनेअपने चमकीले ख्वाबों को 
अलविदा कह दिया था
रोज़ रोज़ दाढ़ी बनाना 

नए कपड़े सिल्वाना 
जूते चमकाना 
और इत्र लगाना छोड़ दिया था... 
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10 comments:

  1. सुप्रभात सर 🙏)
    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति से सजा है चर्चा मंच, मुझे स्थान देने के लिए तहे दिल से आभार सर
    सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनायें
    प्रणाम
    सादर

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  2. सुप्रभातम,
    अच्छी अच्छी रचनाये हैं सभी,
    मौसम का नज़ारा देख रहे हैं।
    सादर।

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  3. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  4. बहुत सुंदर रचनाओं का सराहनीय संकलन है सर..मेरी रचना को शामिल करने के लिए सादर आभार आपका।

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  5. सुंदर। संयोजन
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मिलित करने का आभार
    सादर

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  6. बहुत सुंदर प्रस्तुति सभी लिंक शानदार।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

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  7. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति !
    बारिश का मौसम है लेकिन वह तो रूठा है, भूला गया शायद जैसे बरसना !

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  8. समयाभाव वश देख नहीं पाई. आज सभी रचनाएं पढ़ी . सुन्दर चयन है . मेरी रचना भी शामिल है देखकर अच्छा लगा .

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