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Monday, September 02, 2019

"अपना पुण्य-प्रदेश" (चर्चा अंक- 3446)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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सौ साल की हुई अमृता प्रीतम 

विदेह निर्मोही की लिखी यह कविता  
इस सच को बयां करती है।
--सुनो अमृता!
सुनो अमृता!अच्छा हुआजो तुम लेखिका थीक्योंकि अगर तुम लेखिका न होतीतो निश्चित तौर तुम्हें "चरित्रहीन "और"बदलचलन "की श्रेणी में रखा जाता... 
रंजू भाटिया  
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कहानी-  

हैसियत 

कहानी- हैसियत
''इतनी महंगी साड़ी लेने की तुम्हारी हैसियत हैं क्या? क्या तुम्हारे माँ-बाप ने लेकर दिए थे तुम्हें कभी इतने महंगे कपड़े?'' साड़ी की किंमत 4000 रुपए देख कर प्रदीप ने उपेक्षा से शिल्पा से कहा,,, 
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पहली रचना और उसकी पृष्ठभूमि 

"काँटों को मैं अपनालूं या मृदु कलियों को प्यार करूँ
ये दोनों जीवन के पहलू किसको मैं स्वीकार करूँ .
कितने कितने तूफानों में , डगमग यह जीवन नौका .
पहले आश्वासन देकर ,मांझी फिर देता है धोखा .
कभी किनारा मिल जाता है , और कभी मंझधार परूँ .
काँटों को..... 
Yeh Mera Jahaan पर 
गिरिजा कुलश्रेष्ठ 
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625.  

कश 

"मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया   
हर फ़िक्र को धुँए में उड़ाता चला गया"  

रफी साहब ने बस गा दिया  

देवानंद ने चित्रपट पर निभा दिया  
पर मैं ? मैं क्या करूँ ?  
कैसे जियूँ ?  कैसे मरुँ ?  

हर कश में एक-एक फ़िक्र को फेंकती हूँ  

मैं ऐसे ही मेरे ज़ख्मों को सेंकती हूँ   
मेरी फ़िक्र तो धुँए के छल्ले के साथ  

मेरे पास वापस लौट आती है... 
लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम  
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शीर्षकहीन 

MADANARYAN पर मदन शर्मा  
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मैंने आहुति बन कर देखा -  

अज्ञेय 

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, 
मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने? 
काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है, 
मैं कब कहता हूँ वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने?... 
स्वयं शून्य पर Rajeev Upadhyay  
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तुझको नमन 

सबको राह दिखाने वाले
हे सूर्य! तुझको नमन

नित्य भोर नारंगी धार
आसमान पर छा जाते
खग मृग दृग को सोहे
ऐसा रूप दिखा जाते
आरती मन्त्र ध्वनि गूँजे
तम का हो जाता शमन... 
ऋता शेखर 'मधु' 
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8 comments:

  1. सुप्रभात सर 🙏 )
    बहुत ही सुन्दर सजा है चर्चा मंच एक से बढ़ कर एक रचनाएँ, मुझे स्थान देने के लिए तहे दिल से आभार
    प्रणाम
    सादर

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  2. सुन्दर प्रस्तुति। आभार आदरणीय।

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  3. एक से बढ़कर एक लिंक , हमारी पोस्ट विडीओ ब्लॉग पंच 4 को स्थान देने के लिए आदरणीय गुरुदेव जी का हृदय से धन्यवाद
    : enoxo multimedia

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  4. अच्छी रचनाएँ पढ़ने को मिली सर।

    ReplyDelete
  5. एक से बढ़कर एक लिंक , हमारी पोस्ट को स्थान देने के लिए हृदय से धन्यवाद

    ReplyDelete
  6. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  7. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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