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Monday, October 07, 2019

" सनकी मंत्री " (चर्चा अंक- 3481)


सादर अभिवादन। 

आजकल भाषा में चुभनभरी शाब्दिक प्रताड़ना का दौर हिंदी को उसकी मृदुल-ललित छवि से परे ले जा रहा है।  नई पीढ़ी में भाषा के प्रति रोचकता और आकर्षण पैदा करने के लिये ज़रूरी नहीं है कि हम नकारात्मक पक्ष की शरण में चले जायें बल्कि अपनी जवाबदेही की समीक्षा करते हुए भाषा में नवीनतम सकारात्मक सर्वस्वीकार्य प्रयोगों का दौर शुरू होना चाहिए। जो ऐसे सृजनशील रचनात्मक मिशन में ख़ुद को खपाये हुए हैं उनको मेरा नमन।   

प्रस्तुत हैं मेरी पसंद के हाल ही में प्रकाशित हुए कुछ लिंक- 
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दोहे को रोचकता के साथ उसमें नीतिगत समाजोपयोगी संदेश स्थापित करते हुए आपके लिये प्रस्तुत करना आदरणीय शास्त्री जी के सृजन की विशिष्ट शैली है - 

दोहे 

"विविध दोहावली" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ' मयंक') 


उच्चारण 
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मौजूदा माहौल की तल्ख़ी का तीक्ष्ण बखान करती जो किसी न किसी सिद्धांत पर आज भी अडिग हैं उनका संबल बनती एक रचना प्रोफ़ेसर सुशील कुमार जोशी जी की आपकी नज़र 

फितरफ छिपाये अपनी लड़ाके सिपाही 

एक रणछोड़ की झूठी दास्तान सुन रहे हैं
उलूक टाइम्स
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 ब्लॉग-जगत् में अपनी विशिष्ट पहचान रखनेवाले 
ध्रुव सिंह 'एकलव्य' जी आजकल एक धारावाहिक उपन्यास की शृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं जिसमें बनारसी-संस्कृति को स्थानीय भाव-विचार और बोली-भाषा के साथ रोचक व्यंग्यात्मक अंदाज़ में पेश किया जा रहा है-

धारावाहिक.... ( उपन्यास ) खण्ड -१ 

 "एकलव्य" 
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पढ़िए एक रोचक क़िस्सा राजनीति मनोरंजन और फ़िल्मी-व्यापार से जुड़ा हुआ जिसे तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं आदरणीय खुशदीप सहगल जी-  
सनकी मंत्री,
 बिनाका गीतमाला और रेडियो सीलोन...खुशदीप 

 देशनामा 
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पढ़िए आदरणीया निवेदिता श्रीवास्तव जी की एक रचना जो हमारे एहसासात से गुज़रते हुए ज़हन को ख़ूबसूरत जज़्बाती सफ़र पर ले जाती है-
मुक्ति ..... 
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झरोख़ा
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आज के आधुनिक सोच के दौर में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच अनेक विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रहीं हैं। संयम खोने पर क्या भयावह स्थिति सामने आ सकती है इसका ज़िक्र कर रहीं हैं आदरणीया मालती मिश्रा 'मयंती' जी अपनी इस कहानी में-

जिम्मेदार कौन 

ANTARDHWANI 
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आदरणीया मीना भारद्वाज जी की सृजनशीलता भाषा और भाव के साथ नये प्रयोग करते हुए पाठक तक रचना के ज़रिए माधुर्य में समाहित सकारात्मक संदेश देकर मूल्य स्थापित करना है। उनकी एक ताज़ातरीन हृदयस्पर्शी रचना आपकी नज़र -

"अलविदा" 
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मंथन 
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ब्लॉग-जगत् में एक जाना-माना प्रतिष्ठित नाम है आदरणीया कुसुम कोठारी जी का। इनकी साहित्य-सेवा में सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। आजकल वे भाषा-शिल्प की नवीनतम शैली और सुकोमल भावों में पगी रचनाएँ सतत प्रस्तुत कर रहीं हैं।  पढ़िए उनकी एक ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति-  

श्वेत सारंग दल 

मन की वीणा - कुसुम कोठारी।
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अपनी नवीनतम मौलिक चिंतन शैली से ब्लॉग-जगत् में अपना विशिष्ट स्थान बनानेवाली अनीता लागुरी 'अनु' जी अपनी रचनाओं में पाठक के लिये भाव-गाम्भीर्य से परिपूर्ण संदेश देने की कला में बख़ूबी पारंगत हैं। अनु जी की एक रचना पेश है आपकी सेवा में -  
एक दिन शहर ने कहा मुझसे.... 
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अनु की दुनिया : भावों का सफ़र 
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आदरणीय रोहितास घोड़ेला जी अपनी विशेष रचनाधर्मिता के लिये जाने जाते हैं। अब वे एक अभिनव प्रयोग के साथ आये हैं। आइए उनके इस प्रयोग का स्वागत करते हैं-
अश्विनी: परिचय (न्यू ब्लोगर) 

 Rohitas Ghorela 
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ज़िन्दगी में कभी कठोर फ़ैसले भी लिये जाते हैं जिनका परिणाम भले ही देर से आये लेकिन सुखद होता है। आदरणीया आशालता सक्सेना जी अपनी इस ख़ूबसूरत रचना में एक गंभीर संदेश देती हुई जीवन की संपूर्णता को समझने का आग्रह प्रस्तुत करती हैं-

चांदनी 

 Akanksha -Asha Lata Saxena 
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आज नवरात्र उत्सव संपन्न हो रहा है। शक्ति-पूजा का यह पर्व भारतीय जीवन शैली का महत्वपूर्ण पहलू है। जीवन में सामंजस्य सद्भाव और समृद्धि की कामना के साथ आज इस पर्व के समापन पर अनेक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। 
आयोजकों से अपील है फ़िज़ूलख़र्ची से बचते हुए उपलब्ध धन को पीड़ित मानवता की सेवा में अर्पित करें तो माता अत्यंत प्रसन्न होंगीं-
माँ की महिमा अपरम्पार 

मन के वातायन 
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आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में जब कुछ शब्द और साधन हमारी चर्चा से नदारत हो रहे हैं तब उन्हें याद करते हुए हमारे समक्ष प्रस्तुत कर रहीं हैं आदरणीया अनुराधा चौहान जी-
बीत गए बरसों 

Poet and Thoughts
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आज बस यहीं तक  फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति में। 
रवीन्द्र सिंह यादव 

10 comments:

  1. लाजवाब प्रस्तुति। आभार रवींद्र जी।

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  2. सुप्रभात आदरणीय 🙏 )
    भूमिका के साथ बेहतरीन प्रस्तुति 👌 )
    सादर

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  3. विविध सूत्रों से सुसज्जित पुष्प गुच्छ सा सुन्दर और बेहतरीन संकलन । बहुत बहुत आभार रविंद्र जी ।

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  4. मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद सर |

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. बहुत-बहुत धन्यवाद रविंद्र जी इतने दिनों के बाद मुझे ब्लॉग जगत में वापस मेरी उपस्थिति याद दिलाने के लिए सच कहती हूं बहुत अच्छा लगा सब की रचनाएं पढ़ रही हूं अभी बहुत ही उम्दा रचनाओं का चयन किया है आपने खासकर शिक्षा को लेकर रचना आपने चुनी है उसे पढ़कर आश्चर्यचकित हो रहे हैं.... वाकई में दबाव हमारे होनहार विद्यार्थियों के भविष्य को लील रहा है... बाकी अन्य रचनाएं भी बहुत अच्छी है इतनी सुंदर प्रस्तुति के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद

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  7. सुंदर प्रस्तुति।मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय

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  8. सर्वप्रथम आपको इस प्रतिष्ठित चर्चा मंच पर बतौर एडमिन नियुक्ति हेतु बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आपकी लेखनी और समीक्षा दोनों ही काबिलेतारीफ़ है। आपकी नज़र रचनाओं को परखने में सदा ही  निर्विवाद और पारदर्शी रही है। रचनाओं का सही मूल्याङ्कन तो कोई आपसे सीखे। जहाँ एकतरफ लोग पक्षता की बीन बजाते हुए इस ब्लॉग जगत में कुछ गिने-चुने लोगों को चकरम ट्राफी का खेल खिलाते देखे जा रहे  हैं और वहीं आप साहित्य के मापदंडों को ध्यान में रखते हुए रचनाओं को चुनते हैं। अक्षय गौरव पत्रिका के संपादक के रूप में भी आपका दृष्टिकोण न्यायसंगत रहता है। और आज की प्रस्तुति का बखान करना मतलब सूरज को दीपक  दिखाने के समान है। मेरी अशेष शुभकामनाएं आपको भी और इस प्रतिष्ठित मंच  को भी। सादर 'एकलव्य'    

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  9. सारगर्भित टिप्पणीयों के साथ रचना प्रस्तुति रचनाकार को एक तृप्ति का भाव देती है,और रचना में अंतर निहित भावों को पाठक तक प्रेसित करती है । बहुत अच्छा लगा प्रस्तुति का ये अंदाज।
    शानदार लिंकों पर बहुत सुंदर चर्चा, सचमुच चर्चा अंक का भान होता है ।
    सभी रचनाएं बहुत सुंदर पठनीय , सभी रचनाकारों को बधाई।
    विविध रचनाओं के गुलदस्ते में मेरी कृति को सजाने के लिए तहे दिल से शुक्रिया।

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