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Wednesday, October 09, 2019

"विजय का पर्व" (चर्चा अंक- 3483)

मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
आओ अब अतीत में झाँकें...  
आधुनिकता ने ज़मीर  
क्षत-विक्षत कर डाला है.  
भौतिकता के प्रति  
यह कैसी अभेद्य निष्ठा  
दर्पण पर धूल  
छतों पर मकड़ी के जाले  
कृत्रिम फूल-पत्तियों में  
जीवन के प्रवाह का अन्वेषण… 
हिन्दी-आभा*भारत  पर Ravindra Singh Yadav 
प्राचीन काल से ही हमारी भारतीय संस्कृति स्त्रियों को प्राथमिकता देने की रही है । मेरी इस पंक्ति का विरोध मत सोचने लगिये । मैं भी मानती हूँ कि आज के परिवेश में स्त्रियाँ सुरक्षित नहीं हैं… 
झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव  

उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी 
मूल मन्त्र इस श्रृष्टि का ये जाना है
खो कर ही इस जीवन में कुछ पाना है

नव कोंपल उस पल पेड़ों पर आते हैं
पात पुरातन जड़ से जब झड़ जाते हैं    
जैविक घटकों में हैं ऐसे जीवाणू 
मिट कर खुद जो दो बन कर मुस्काते हैं
दंश नहीं मानो, खोना अवसर समझो
यही शाश्वत सत्य चिरंतन माना है
खो कर ही इस जीवन में … 
स्वप्न मेरे ...पर दिगंबर नासवा  

कविता "जीवन कलश" पर 
पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
"उजालों के लिए, मिट्टी के फिर दीये तलाशेंगे"
सुबीर संवाद सेवा पर पंकज सुबीर 
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किस पर किस की विजय का पर्व?
किस की किस पर विजय का पर्व?  
पाप बड़ा या पुण्य बड़ा है  
प्रश्न अचानक आन खड़ा है  
पाप-मूर्ति रावण का पुतला  
सदा राम से दिखा बड़ा है  
राम तो है दुर्गम वन-वासी  
रावण स्वर्ण-नगर का वासी… 
तिरछी नज़र पर 
गोपेश मोहन जैसवाल 

गुस्ताख़ पर Manjit Thakur - 

लो क सं घ र्ष ! पर Randhir Singh Suman  

Sudhinama पर Sadhana Vaid  
आज दशहरा है .जहाँ देखो रामलीला और रामायण की धूम है .आज बहुत से फिल्म निर्देशक और निर्माता रामायण की लोक प्रियता को भुनाने के मूड में हैं और राम के चरित्र से जुड़े इस कथानक पर आधारित धारावाहिकों व् फिल्मों की बाढ़ सी आ गयी है किन्तु यदि हम इन सभी की गुणवत्ता का आकलन करते हैं तो केवल रामानंद सागर जी की ''रामायण ''ही इस कसौटी पर खरी उतरती है … 
! कौशल ! पर Shalini kaushik  

नन्ही कोपल पर कोपल कोकास  
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13 comments:

  1. सुप्रभात साथियों !
    विजय का पर्व तो हमने धूमधाम से मना लिया लेकिन कागज़ के पुतले को जला कर क्या सच में विजय मिल जाती है जबकि समाज में जाने कितने रावण राम का मुखौटा लगाए अभी भी विद्यमान हैं ? जिस दिन उनका संहार होगा असली विजय पर्व उस दिन मनाया जा सकेगा !
    बहुत सुन्दर सूत्रों से सुसज्जित आज की चर्चा ! मेरे यात्रा संस्मरण को इसमें स्थान देने के लिए आपका ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  2. सुप्रभात आदरणीय 🙏 )
    बेहतरीन प्रस्तुति 👌,सभी रचनाकरो को हार्दिक शुभकामनाएँ,मुझे स्थान देने के लिये सहृदय आभार आप का
    प्रणाम
    सादर

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  3. सुन्दर प्रस्तुति। आभार आदरणीय।

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  4. मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

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  5. उत्कृष्ट लिंक चयनित किये हैं आपने ...

    मेरी रचना को भी स्थान देने के लिए हार्दिक आभार

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  6. सदैव की भांति बेहतरीन सामग्री का चयन....


    मेरी पोस्ट को शामिल करने हेतु हार्दिक आभार !

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  7. बहुत सुन्दर संकलन ।

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  8. बहुत सुंदर प्रस्तुति. विविधता से परिपूर्ण रचनाओं का शानदार चयन. सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ.
    मेरी रचना को इस शानदार चर्चा में शामिल करने के लिये सादर आभार आदरणीय शास्त्री जी.

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  9. बेहतरीन प्रस्तुति ,सादर नमन

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  10. सुन्दर चर्चा सूत्र ...
    आभार मेरी रचना को स्थान देने के लिए ...

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