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Thursday, January 09, 2020

चर्चा - 3575

13 comments:

  1. कैसे भी हालात हों, नारी रहे उदार।।

    जी ठीक कहा गुरुजी, हम पुरुष तो थोड़ा सा त्याग कर कितना अभिमान करते हैं, वहीं नारी अपने घर- परिवार केलिए सहज साधारण भाव से कितना और क्या-क्या त्याग नहीं करती है। नारी एक शक्ति है जो पुरुष की रिक्तता और निरुद्देश्यता को समाप्त करती है।
    परंतु नारी के पास आँसू जैसे घातक हथियार भी हैं । जिसके समक्ष झूठ और सच की पहचान पुरुष तो क्या स्वयं नारी जाति भी नहीं कर पाती है । नारी को विधाता ने कुंठा भी दे रखी है। अब इसे उसकी दुर्बलता कहें अथवा उसकी ताकत, फिर भी नारी है तो जीवन है। अन्यथा तो शिव भी शव है।
    सुंदर प्रस्तुतिकरण और रचनाएँ भी , आपसभी को प्रणाम।

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  2. आभार आदरणीय दिलबाग विर्क जी।
    --
    बहुत सुन्दर और सन्तुलित चर्चा।

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  3. शुभ प्रभात...
    आभार..
    सादर..

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  4. आभार आपका मेरी रचना को चर्चा-मंच में देकर रचना का मान बढ़ाने के लिए .. बेहतर करीने में संकलन ...

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  5. वाह!!लाजवाब चर्चा अंक !

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  6. आभार दिलबाग सिंह विर्क जी । सुन्दर सराहनीय चर्चा मंच प्रस्तुति ।

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  7. सभी रचनाएँ उम्दा मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार !!

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  8. बहुत खूबसूरत चर्चा प्रस्तुति

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  9. बहुत ही सुन्दर चर्चा प्रस्तुति.
    मेरी रचना को स्थान देने के लिये सहृदय आभार आदरणीय.
    सादर

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  10. उम्दा चर्चा।

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  11. सुंदर चर्चा अंक,मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार आदरणीय 🙏🌷

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