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Thursday, January 23, 2020

चर्चा - 3589

10 comments:

  1. जीवन का जो लक्ष्य साध ले
    पढ़ कर अच्छा लगा, अन्यथा तो-

    मन पछितैहै अवसर बीते।
    दुर्लभ देह पाइ हरिपद भजु, करम, बचन अरु हीते।।
    सहसबाहु, दसबदन आदि नप बचे न काल बलीते।
    हम हम करि धन-धाम सँवारे, अंत चले उठि रीते॥
    सुत-बनितादि जानि स्वारथरत न करु नेह सबहीते।
    अंतहु तोहिं तजेंगे पामर! तू न तजै अबहीते॥

    विविध प्रकार की रचनाएँ मंच पर पढ़ने को मिली। आपका आभार इस सुंदर प्रस्तुति के लिए एवं सभी को प्रणाम।

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  2. सुन्दर और पठनीय लिंक।
    आदरणीय दिलबाग विर्क जी धन्यवाद आपका।

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  3. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स से सजा आज का चर्चामंच |मेरी रचना को स्थान देने के लिए धन्यवाद सर |

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  4. पठनीय रचनाओं से सजा सुंदर चर्चा मंच ! आभार मुझे भी शामिल करने हेतु !

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  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति. बेहतरीन रचनाओं का चयन. सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ.

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  6. बहुत सुंदर संयोजन
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मिलित करने का आभार
    सादर

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  7. व्याकुल पथिक: झोंका हवा का.. https://gandivmzp.blogspot.com/2020/01/blog-post_30.html?spref=tw

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