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Friday, January 10, 2020

"विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक - 3576)



स्नेहिल अभिवादन 
सर्वप्रथम तो आप सभी को हिंदी दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी बोलचाल में तो ठीक है परंतु जब हमें इसे लिखना होता है तो कई सारी अशुद्धियाँ नज़र आती आजकल कई सारी पुस्तक मेलों के आयोजन किए जा रहे हैं ,और उनमें पाठक गण हिंदी की पुस्तकें तलाश कर रहे हैं  । इससे यकीनन लगता है हिंदी साहित्य सही दिशा में है ,परन्तु आजकल के युवा पाठक हिंदी लेखन के प्रति उनमें एक ठहराव सी आ गई है हिंदी भाषा में कुछ नए प्रयोग अगर किए जाएंगे तो युवा पाठक वर्ग के अंदर जरूर उत्सुकता बढ़ेगी,
हिंदी का तत्सम रूप आजकल कम प्रयोग हो रहा है आज के पाठक वर्ग मिली-जुली हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू इनका मिक्स हिंदी साहित्य में पढ़ रहे हैं
पर एक राहत की बात है कि हिंदी भले ही हमारे देश में गौण हो रही है परंतु पूरे विश्व में सराही  भी जा रही है खोजी जा रही है
चलिए पढ़िए मेरी पसंद के कुछ आज के लिंक.।
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25 comments:

  1. --

    हिन्दी के अस्तित्व को, जग करता मंजूर।

    भारतवासी जा रहे, लेकिन इससे दूर।।

    जी गुरुजी जी , विश्व हिन्दी दिवस पर आपकी यह रचना हम हिन्दीभाषियों को अपनी मातृभाषा के प्रति गौरवान्वित महसूस करने के साथ ही जरा ठहर कर आत्म मंथन की ओर अग्रेषित कर रही है।
    सत्य तो यह है कि प्रबुद्ध वर्ग विशेषकर कतिपय साहित्यकारों की करनी और कथनी का भेद ही हिन्दी भाषा को अंग्रेजी की दासी बनाए हुये है।
    यदि हम एक सर्वेक्षण करवा ले , तो पाएँगे कि जो लोग मंच से हिन्दी को सरताज कह रहे हैं, हिन्दी में रचनाएँ लिख कर विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं उनके बच्चे अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में पढ़ रहे हैं और वे स्वयं अपने घर में अपने मेहमानों के साथ अंग्रेजी में जब-तब संवाद कर अपनी विद्वत्ता साबित कर रहे हैं, ताकि कथित सभ्य समाज में उन्हें जेंटलमैन कहा जाए।
    दोहरा मापदंड अपनाने वाले ऐसे लोगों के संदर्भ में आप बताएँ कि क्या कहा जाए ?
    क्या वे हमें हिंदी की जंजीर से बांधकर गुमराह तो नहीं कर रहे हैं ?
    अतः विश्व हिन्दी दिवस पर शुभकामनाएँ देने से पहले मातृभाषा को लेकर दोहरा आचरण करने वाले ऐसे भद्रलोक इस पर भी चिंतन मंथन कर ले।
    बस एक जिज्ञासा है मेरे मन में, क्योंकि अभी पिछले दिनों नगर में एक विशेष कार्यक्रम में गया था । जहाँ सभी वर्ग के लेडीज एंड जेंटलमेन एकत्र हुए। वे हिन्दीभाषी ही थें।
    दीप प्रज्वलन को छोड़ सारे संवाद अंग्रेजी में ही हुए । उन्होंने कहा शशि जी हिंदी मातृभाषा अवश्य है , लेकिन यदि सभ्य समाज में रहना है और आगे बढ़ना है तो अंग्रेजी को नमन करना है और उसके साथ कदम मिलाना है।
    हाँ, मैंने वहाँ यह भी देखा कि इनके बच्चे तो विलायती भोजन कर रहे थे पर वे हिंदुस्तानी। मैंने सोचा चलो अभी इतना तो फर्क है ही...।

    सभी को प्रणाम इस सुंदर प्रस्तुति के लिए अनु जी आपको भी धन्यवाद।

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    1. . बहुत-बहुत धन्यवाद शशि जी अपने विचार रखने के लिए... हिंदी की स्थिति वाकई खराब है वर्तमान में जो भी साहित्यकार है उन सब को आगे आना चाहिए और हमारी मातृभाषा हिंदी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए

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  2. सुन्दर और सार्थक चर्चा।
    धन्यवाद अनीता लागुरी जी।

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    1. बहुत धन्यवाद आदरणीय शास्त्री जी

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  3. आदरणीय पथिक जी, हिन्दी से मुझे भी गहरा जुड़ाव व लगाव है और मैं अंग्रेजी जानते हुए भी, हिन्दी में ही रचनाएँ लिखना पसन्द करता हूँ । सिर्फ, किसी अन्य भाषा का भी ज्ञान अर्जन करना, दोहरी मानसिकता नहीं कहलाती।
    बस एक सुझाव है, यह मेरा ताकि हमारी अभिव्यक्ति लोगों का मार्ग दर्शन करे, न कि, इक भटकाव पैदा करे।
    भाषा के धनी, विशाल हृदय के हों तो और भी अच्छा ।
    हिन्दी दिवस की शुभकामनाओं सहित।

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    1. यह तो अच्छी बात है अंग्रेजी जानते हुए भी आप हिंदी में रचनाएँ लिखकर अपनी भाषा को समृद्ध कर रहे हैं , परंतु घर ,परिवार और समाज में इसी हिंदी भाषा का प्रयोग ऐसे लोग जब नहीं करते हैं, तो यह भटकाव होता है और हिंदी की यही उपेक्षा आत्मचिंतन का भी विषय है।
      बच्चों को वे गाय ,बिल्ली ,केला, अमरुद बताने की जगह कॉउ, मंकी, कैट और डॉग बताना शुरू कर देते हैं ,जबकि पहले अपनी मातृभाषा को प्रमुखता देना चाहिए। प्रणाम और नमस्कार की जगह टाटा बाय बाय बताया जाता है।इन्हें क्या कहा जाए हिंदी प्रेमी ?

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  4. विश्व हिंदी दिवस पर शुभकामनाएंं। सुन्दर प्रस्तुति।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद सुशील जी

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  5. विश्व हिंदी दिवस की शुभकामानएं। उम्दा चर्चा।

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    1. जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका

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  6. सुप्रभात
    विश्व हिंदी दिवस पर हार्दिक शुभ कामनाएं |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद |

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आशा लता जी

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  7. विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। सुंदर प्रस्तुति।मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार अनीता जी।

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    1. जी आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएं बहुत-बहुत धन्यवाद आपका

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  8. हिन्दी साहित्य का विकास हो यही शुभकामनाएं है, बहुत खूबसूरत चर्चा

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    1. जी सही कहा आपने हिंदी साहित्य का विकास होना ही चाहिए धन्यवाद

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  9. सुंदर भूमिका के साथ बेहतरीन प्रस्तुति ,आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद कामिनी जी

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  10. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  11. हिंदी छा जाए विश्व में यही कामना है !

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  12. जी आपकी तरह मेरी भी यही विश है की हिंदी छा जाए पूरे विश्व में बहुत-बहुत धन्यवाद आपका

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