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Thursday, August 20, 2020

चर्चा - 3799

 आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है

कैद कैमरे में करो, दुनिया का भूगोल

सहिष्णुता

उसे तो आना ही है 

हलकान है भकुआ

आँख मिला के बात कर

साहित्य का उद्देश्य

बेवफा ख्वाहिशे

बिछुआ

मेरी फ़ोटो

जीवन

योग और प्रेम 

अमूर्तन का आलाप


कब छोड़ेगा तू लिखना

धन्यवाद

दिलबागसिंह विर्क 

9 comments:

  1. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति।मेरे सृजन को स्थान देने हेतु सादर आभार आदरणीय सर।

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  2. उम्दा अंक आज का |मेरी रचना को स्थान देने ले लिए आभार सहित धन्यवाद सर |

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  3. बहुत सुन्दर चित्रमयी प्रस्तुति । मेरे सृजन को आज की चर्चा में साझा करने के लिए सादर आभार दिलबाग सिंह जी ।

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  4. चित्रों के माध्यम से निर्विवाद चर्चा की प्रस्तुति।
    आपका आभार आदरणीय दिलबाग सिंह विर्क जी।

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  5. बिना किसी भूमिका के पठनीय सूत्रों का संकलन, आभार मुझे भी आज के अंक में शामिल करने हेतु !

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  6. कमाल का संकलन ! अभिनन्दन, दिलबाग जी.
    इतनी सहज और सरस रचनाओं के लिए सभी रचनाकारों को बधाई !
    इस चर्चा में शामिल करने के लिए ह्रदय तल से आभारी हूँ. नमस्ते.

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  7. रोचक लिंक्स से सुसज्जित चर्चा...आभार...

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