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Wednesday, October 05, 2022

"अभी भी जिन्दा है रावण" (चर्चा-अंक-4572)

 मित्रों!

बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है!

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विजयदशमी की शुभकामनाएँ दशहरा अर्थात दशानन का मरण, या दस सिर वाले असुर का विनाश। देवता और असुर दोनों ही कहाँ रहते हैं ? हमारे ही  मन में उनका निवास है, क्योंकि जो ब्रह्मांड में है, वही पिंड में है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, माया, मद, मत्सर, दर्प, ईर्ष्या तथा अहंकार रूपी रावण के दस सिरों को भगवती दुर्गा की प्रार्थना के बाद ग्रहण की गयी शक्ति के कारण राम रूपी आत्मा नष्ट करती है। मन जब हनुमान की तरह समर्पित होता है और ध्यान  लक्ष्मण की तरह सेवा में तत्पर होता है, तब सीता रूपी बुद्धि को उपरोक्त दस विकारों की क़ैद से मुक्ति प्राप्त होती है। भारत भूमि पर मनाए जाने वाले हर उत्सव का एकमात्र उद्देश्य आत्मा को शक्तिशाली बनाना है ताकि वह प्रकृति के पार जा सके और अपनी दिव्यता को अनुभव करे।  डायरी के पन्नों से अनीता

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दोहे "विजय का पावन त्यौहार-विजयादशमी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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अकविता "रावण अभी भी जिन्दा है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

वर्षों से

यही परम्परा जारी है

किन्तु हर बार

मानवता हारी है

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रावण अभी भी

जिन्दा है

लेकिन आज भी

हिन्दुस्तान शरमिन्दा है 

--गीत "4 अक्टूबर छोटी पुत्रवधु का जन्मदिवस" 

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प्यार से खाओ-खिलाओ अब मिठाई।

जन्मदिन की पल्लवी को है बधायी।।

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काटने का केक को अब चलन छोड़ो,

अब पुरातन सभ्यता की ओर दौड़ो,

यज्ञ में सद्भावनाएँ हैं समायी।

जन्मदिन की पल्लवी को है बधायी।।

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उच्चारण 

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रावण को जब आग लगाई ! 

इमेज गूगल से साभार

किसी को था यह नहीं पसंद ,

कि बुराइयां जिये और दिन चंद ,

सबने उसका एक पुतला बनाया ,

रावण का उसको रूप धराया ,

सब एकत्रित हुये एक रात ,

वह थी दशहरा के दिन की बात । 

मेरी अभिVयक्ति 

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माँ सिद्धिदात्री नवम दिवस 

मन की वीणा - कुसुम कोठारी। 

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माँ महागौरी तेरी महिमा अपरम्पार 

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तप , त्याग , क्षमा की मूर्ति
लक्ष्मी ,काली ,कल्याणी !
सब जग रची महू आप विराजी ,

तू ही रमा ,शारदा ,वेदवाणी ! Tarun's Diary- "तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.." 

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गाँधी जी के सपनों का भारत 

जहाँ हर नागरिक को

समानता का अधिकार मिलेगा   

मिट जायेगा अस्पृश्यता का नामोनिशान 

शिक्षा के वरदान से

हर बच्चे का सामर्थ्य  खिलेगा

दिया जायेगा सत्य और अहिंसा के

मूल्यों को पूरा सम्मान मिलेगा

मन पाए विश्राम जहाँ 

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जो बार-बार तोड़ने पर भी न टूटे वही तो गांधी हैं 

गांधी सारी दुनिया में हैं। कम-से-कम मूर्तियों के रूप में तो जरूर। दुनिया में तकरीबन 70 देश ऐसे हैं जिनमें गांधीजी की प्रतिमाऍं लगी है।

भारतीय सामाजिक-राजनीतिक जीवन में गांधी 1917 में प्रवेश करते हैं और फिर अनवरत कोई 31 सालों तक, अथक संघर्ष की वह जीवन-गाथा लिखते हैं। लेकिन एक हिसाब और भी है जो हमें लगाना चाहिए, कितने देशों में गांधी-प्रतिमा को खण्डित करने की वारदात हुई है? संख्या बड़ी है। गांधी के चम्पारण में, मोतिहारी के चरखा पार्क में खड़ी गांधी की मूर्ति पिछले दिनों ही खण्डित की गई है। ऐसे चम्पारण दुनिया भर में हैं। अमेरिका में ‘ब्लैकलाइफ मैटर्स’ के दौरान गांधी प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया गया था। ऐसी घटनाओं से नाराज या व्यथित होने की जरूरत नहीं है। फिक्र करनी है तो हम सबको अपनी फिक्र करनी चाहिए। 

एकोऽहम् 

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(आलेख) स्वराज करुणमहात्मा गांधी की पहली छत्तीसगढ़ यात्रा : दावे और प्रतिदावे 

  पहली यात्रा के दावे पर प्रश्न चिन्ह क्यों ?

      ****************

 वहीं दैनिक' हरिभूमि ' के 26 दिसम्बर 2020 के अंक में कनक तिवारी  ने अपने आलेख में गांधीजी की पहली छत्तीसगढ़ यात्रा पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाया है। उनके आलेख का शीर्षक है - 'गांधी 1920 में छत्तीसगढ़ आए थे ?' कनक तिवारी इसमें लिखते हैं -- "  कुछ अरसा पहले एक संस्कृति कर्मी बुद्धिजीवी ने  उजागर किया कि वर्ष 1920 में महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ के रायपुर तथा धमतरी के प्रचारित प्रथम प्रवास को लेकर भरोसेमंद सबूत नहीं मिल रहे हैं।  

मेरे दिल की बात 

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लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर  एक कविता 

छोटा सा तन हिया हिमालय, 
लाल बहादुर लाल का
छोटी काया, दूर गांव था, 
पैदल आते-जाते थे।
सावन-भादौ नदी पार कर, 
प्रतिदिन पढ़ने जाते थे।।
भारी बस्ता, हालत खस्ता, 
पग में छाले पड़ जाते थे।
खुद पानी में सिर पर बस्ता 
नदी पार कर जाते थे।
संघर्षों से रहा जूझता 
जीवन प्यारे लाल का। 

KAVITA RAWAT 

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चौथा बन्दर 

बापू के तीनों बन्दर   
सालों-साल मुझमें जीते रहे   
मेरे आँसू तो नहीं माँगे   
मेरा लहू पीते रहे   
फिर भी मैंने उनका 
अनुकरण-अनुसरण किया,   
अब वे फुदक-फुदककर   
बाहर आने को व्याकुल रहते हैं   

लम्हों का सफ़र डॉ.जेन्नी शबनम

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चन्द माहिए 

:1:

क्यों ख़्वाब-ए-जन्नत में 

डूबा है, ज़ाहिद!

हूरों की जीनत में?

:2:

ये हुस्न की रानाई,

नाज़, अदा फिर क्या

गर हो न पज़ीराई ! 

आपका ब्लॉग आनन्द पाठक

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दोहा छन्द "वयन सगाई अलंकार" 

चारणी साहित्य मे दोहा छंद के कई विशिष्ट अलंकार हैं, उन्ही में सें एक वयन सगाई अलंकार (वैण सगाई अलंकार) है। दोहा छंद के हर चरण का प्रारंभिक व अंतिम शब्द एक ही वर्ण से प्रारंभ हो तो यह अलंकार सिद्ध होता है।
'चमके' मस्तक 'चन्द्रमा', 'सजे' कण्ठ पर 'सर्प'।
'नन्दीश्वर' तुमको 'नमन', 'दूर' करो सब 'दर्प'।।
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'चंदा' तेरी 'चांदनी', 'हृदय' उठावे 'हूक'।
'सन्देशा' पिय को 'सुना', 'मत' रह वैरी 'मूक'।।
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' ©
तिनसुकिया 

Nayekavi 

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किससे करूं शिकायत 

 ना किसी से कुछ चाहा 

ना किया अलगाव  ही 

सब से समता का भाव रखा 

पर सुनी सब की करी मन की |

कभी सोचा न था लोग 

कहेंगे कटू भाषी मुझे  

Akanksha -asha.blog spot.com 

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सारा जग अपना 

कविता वर्मा

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01-15 October 2022 

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चिपचिपी किचन टाइल्स, गंदा मार्बल,  बाथरूम टाइल्स को चुटकियों में कैसे साफ़ करे? 

क्या चाहिए?  
• बेकिंग सोड़ा- थोड़ा सा  
• डिटर्जेंट पाउडर- थोड़ा सा  
• पानी- आवश्यकतानुसार 

आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल 

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भेदभाव का खुला दस्तावेज है वक्फ अधिनियम 1995 

1954 में वक्फ की संपत्ति और उसके रखरखाव के लिए वक्फ एक्ट-1954 बनाया गया था। कोई भी ऐसी चल या अचल संपत्ति वक्फ की हो सकती है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान कर दे। देशभर में वक्फ की संपत्तियों को संभालने के लिए एक केंद्रीय और 32 स्टेट वक्फ बोर्ड हैं। 1995 में वक्फ कानून में संशोधन करते हुए वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दी गईं। कानून कहता है कि यदि वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर अपना दावा कर दे, तो उसे उसकी संपत्ति माना जाएगा। अब छोड़ो भी 

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आज के लिए बस इतना ही...!

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5 comments:

  1. आदरणीय मयंक सर ,
    मेरी प्रविष्टि् "रावण को जब आग लगाई" के लिंक की चर्चा "अभी भी जिन्दा है रावण" (चर्चा-अंक-4572) पर करने के लिए बहुत धन्यवाद एवम आभार ।
    सभी संकलित रचनाएं बहुत ही उम्दा , सभी आदरणीय को बहुत बधाइयां ।
    सादर ।

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  2. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

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  3. उम्दा चर्चा

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  4. विगत सभी पर्वों के लिए सभी को अनंत शुभकामनाएं 🌹🌹
    वृहत लिंक्स से सुसज्जित सुंदर अंक।
    व्यस्तता के कारण किसी लिंक पर जाना नहीं हुआ ,समय मिलते ही अवलोकन जरूर करूंगी।
    सादर।
    मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए हृदय से आभार।

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  5. बहुत सुंदर सराहनीय अंक।

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