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Saturday, October 01, 2022

"भोली कलियों का कोमल मन मुस्काए" (चर्चा-अंक-4569)

 मित्रों!

शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

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देखिए कुछ अद्यतन लिंक।

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जय हे! माते! 

जय हे! जय हे! जय हे! माते!
इस भक्त का मान बनाए रखो!
संसार भले विस्मृत होये,
निज चरणों का ज्ञान बनाए रखो।।
झोली फैला क्या माँगूँ मैं,
इस शीष पे हाथ बनाए रखो। 

मेरी दुनिया By  

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गीत "सिहरन बढ़ती जाए" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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ठण्डी-ठण्डी हवा चल रही,
सिहरन बढ़ती जाए!
आओ साथी प्यार करें हम,
मौसम हमें बुलाए!!
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उच्चारण 

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माँ कुष्मांडा - मात्र स्मित हास्य से सृष्टि रचना करने वाली पराशक्ति  

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मात्र स्मित मधुर मुस्कान से ,
कोटि ब्रह्माण्ड रचे जगदम्बा ने !
अचरज को अचरज भयो है भारी
दसदिशा सब प्रखंड रचे माँ अम्बा ने ! 

Tarun's Diary- "तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.." 

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आधुनिकता 

फुनगी पर जो
बैठे नंद।
नव पीढ़ी के
गाते छंद।।

व्यथा नींव की
सहती मोच
दीवारों पर
चिपकी सोच
अक्ल हुई अब
डिब्बा बंद।। 

काव्य कूची अनीता सुधीर 

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उऋण 

बैताल ने कहना शुरू किया :-

पूरी तरह से उषा का सम्राज्य कायम नहीं हुआ था लेकिन अपनों की भीड़ अरुण देव के घर में उपस्थित थी। मानों निशीथकाल में शहद के छत्ते से छेड़खानी हो गयी हो...।

"आपने ऐसा सोचा तो सोचा कैसे..?"

"सोचा तो सोचा! हमसे साझा क्यों नहीं किया...?" 

"सोच का सृजन" विभा रानी श्रीवास्तव

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सोहम का जो मर्म जानता  हरेक मानव को अपने होने का आभास होता है। स्वयं के होने में किसी को संदेह नहीं है। जड़ वस्तु स्वयं को नहीं जान सकती। पर्वत नहीं जानता कि वह पर्वत है। केवल चेतन ही खुद को  जान सकता है। परमात्मा पूर्ण चैतन्य है। चेतना का स्वभाव एक ही है, जैसे बूँद हो या सागर दोनों में जल एक सा है। वही चेतना हर सजीव के भीतर उपस्थित है जो परमात्मा के भीतर है। इस तरह जीव और परमात्मा एक तत्व से निर्मित हैं।

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अक्षर जोड़ कर बना यूं शब्द संसार 

शब्द जो बोलते हैं

जब इंसान ने अपने विकास की यात्रा आरंभ की तो इस में भाषा का बहुत योगदान रहा | भाषा समझने के लिए वर्णमाला का होना जरुरी था क्यों कि यही वह सीढी है जिस पर चल कर भाषा अपना सफ़र तय करती है | वर्णमाला के इन अक्षरों के बनने का भी अपना एक इतिहास है .| .यह रोचक सफ़र शब्दों का कैसे शुरू हुआ आइये जानते हैं ...जब जब इंसान को किसी भी नयी आवश्यकता की जरूरत हुई

कुछ मेरी कलम से  kuch meri kalam se ** रंजू भाटिया

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डॉ मंजरी शुक्ला की पठनीय और  शिक्षाप्रद बाल-कहानियों का संग्रह है  'जादुई चश्में' 

'जादुई चश्में' लेखिका मंजरी शुक्ला का बाल कथा संग्रह है। सूरज पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुए इस संग्रह में उनकी चौदह कहानियों को संकलित किया गया है। यह कहानियाँ निम्न हैं:

संग्रह की पहली कहानी जादुई चश्मे प्रतापगढ़ नाम के राज्य की कहानी है। जादुई चश्मे के आने से प्रताप गढ़ का क्या होता है यह कहानी बनती है।  

एक बुक जर्नल 

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लघुकथा- संतोष की मुस्कान 

"बहन, क्या बात है आज तुमने रोटी क्यों नहीं खाई? तुम तो हरदम कहती हो कि ये घर मेरा है। इस घर की रोटी मैं ही खाऊँगी। कभी गलती से मैं आ भी गई तो भी मारकर मुझे भगा देती हो। फ़िर आज क्या हुआ? तुमने रोटी सूंघ कर छोड़ क्यों दी? क्या रोटी बासी थी?" काली गाय ने पूछा। 

"नहीं। रोटी तो ताजा ही थी। लेकिन आज उस रोटी की जरूरत किसी और को ज्यादा थी। कोई और मेरे से ज्यादा भूखा था।" भूरी गाय ने कहा।  

आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल 

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तुम आओ ... 

बहुत चाहा शब्द घड़ना 
चाँदनी के सुर्ख गजरे ... 
सफ़ेद कागज़ पे उतारना
पर जाने क्यों अल्फाजों का कम्बल ओढ़े   
हवा अटकी रहीहवा के इर्द-गिर्द   

स्वप्न मेरे दिगम्बर नासवा

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रोमाँचक यात्राएँ सोचा कि आज अपने जीवन की कुछ न भूल पाने वाली रोमाँचकारी यात्राओं को याद करना चाहिये, जब सचमुच में डर और घबराहट का सामना करना पड़ा था (नीचे की तस्वीर में रूमझटार-नेपाल में एक रोमाँचक यात्रा में मेरे साथ हमारे गाईड कृष्णा जी हैं।)।

जो न कह सके 

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संस्मरण 

"डोल गया ईमान" 

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

      मुझे भी लगा कि कैमरा चैक करना चाहिए और मैंने जब कैमरा चैक किया तो वास्तव में बुढ़िया सही बोल रही थी। स्टाफ ने कहा कि सर कैमरा झूठ नहीं बोलता। इसी आदमी ने उसका नोट उठाया है।  

धरा के रंग 

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आज के लिए बस इतना ही...!

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7 comments:

  1. रूपचन्द्र जी, रोमाँचक यात्राओं पर मेरे आलेख को आज की चिट्ठा चर्चा में जगह देने के लिए दिल से धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर चर्चा

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  3. आदरणीय डॉ. साहब , सादर नमन , अभिनन्दन ! नवरात्री महापर्व की बहुत बहुत शुभेच्छाएं स्वीकार करे गुरुवर ! जय अम्बे !

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  4. रोचक लिंक्स से सुसज्जित चर्चा। मेरी पोस्ट को चर्चा में स्थान देने हेतु आभार।

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  5. बहुत ही सुंदर सराहनीय संकलन।
    सादर

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  6. उम्दा चर्चा।मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  7. डॉ विभा नायकOctober 2, 2022 at 9:05 PM

    मेरी रचना को शामिल करने के लिये बहुत शुक्रिया🙏🌹🌹🌹

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