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Monday, October 24, 2022

'दीपावली-पंच पर्वों की शुभकामनाएँ'(चर्चा अंक-4590)

सादर अभिवादन। 

सोमवारीय प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

भारतीय संस्कृति के महापर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

यह उजास का पर्व है पावस ऋतु के बीत जाने और खरीफ फ़सल पकने पर अपने सामाजिक महत्त्व को और अधिक बढ़ा देता है। अंधकार सामान्यतः अनिश्चितता और भय को पैदा करता है अतः आज उजाले को हरसंभव तरीकों से संरक्षित और प्रभावी रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर पटाखों से आतिशबाज़ी पर प्रतिबंध रहेगा।दूर-दूर तक अपनी ख़ुशी और रोमांच को दूसरों तक पहुँचाने की इच्छा अब पटाखों के कर्कश शोर में विकृति बन चुकी है।

    चर्चामंच ब्लॉग परिवार की ओर से आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ- 

--

उच्चारण: दोहे "दीपावली-पंच पर्वों की शुभकामनाएँ" 

झिलमिल-झिलमिल जल रहे, ये माटी के दीप।
देवताओं के चित्र के, रखना इन्हें समीप।।
--
दीपों की दीपावली, देती है सन्देश।
घर-आँगन के साथ में, रौशन हो परिवेश।।
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दीपक,

इस बार दिवाली में 

कहीं और जलो, न जलो,

वहाँ ज़रूर जलना,

जहाँ न जाने कब से 

अंधेरों का कब्ज़ा है.

--
बच्चेबूढ़ेचिर-युवाहर आयू में ख़ास
भाँति-भाँति की फुलझड़ीमिलती सब के पास

दीपों के त्योहार मेंफुलझड़ियों का जोर
बच्चों का तो ठीक हैबड़े भी माँगे मोर
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काली अँधियारी रात में

अंधकार को दूर भगाएँ 

आओ साथी ! सब मिलकर 

दीपावली के दीप जलाएँ 

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मेरा सृजन: 🪔🪔 शुभ दीपावली 🪔🪔 शुभ दीपावली 🪔🪔 

वक़्त  गुज़रा  तो  कभी   लौटकर  न  आएगा,
वक़्त को  यूँ  न गँवाओ  कि  अब  दिवाली है।

पेड़-पौधे    ही    तो    पर्यावरण    बचाते   हैं,
इनको हर ओर  लगाओ कि  अब  दिवाली है।
--

ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र: स्त्री की जुबान

मैंने खुद से प्यार किया और जी उठी
अब तुम ढूँढते रहो स्त्री होने के अनेक अर्थ शब्दकोशों में
देते रहो अनेक परिभाषाएं
करते रहो व्याख्याएं
तुम्हारी स्वप्निल दुनिया से परे
मैंने पा लिया है अपने होने का अर्थ

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रहे गरीबी सदा बिलखती वहाँ व्यवस्था सुधार कैसा।
नहीं करेंगे कभी  नियोजित उन्हें  मिला है प्रभार कैसा।।
विवेक जिसका रहे भ्रमित सा प्रशांत मन बस दिखा रहा है।

भरा हुआ द्वेष जिस हृदय में अरे कहो वो उदार कैसा।।
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अग्निशिखा :: अदृश्य सेतु के नीचे - - 

 उस अतल गहराई को
रिश्तों में बांधना है बहुत ही
कठिन, तब ज़िन्दगी
लगती है सद्य -स्नाता
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कर्मपथ पर बढ़े अनवरत जो चरण,
ख्याति से माँगते वो नहीं है शरण ।
कीर्ति का नाद चाहे निनादित न हो,
नाम अधरों सजे या प्रसादित न हो ।
अर्चना से परे वंचना से परे,
मौन रहकर समर्पित कई लोग हैं ।
श्रेष्ठ हो कर अचर्चित कई लोग हैं ।
--
ये  मेरी  बज़्म नहीं मगर 
दिल  मेरा  यहाँ  लगा है। 

जाने वालों  को रोको मत 
रँगे-महफ़िल  तो जमा है।
--

अन्वेषण की आकांक्षी स्त्री

ख़ैरआज स्त्री के लिए "टोह" एक व्यवस्था का नाम है। स्त्री का स्वावलंबी सफ़र इसी टोह की उँगली पकड़े-पकड़े उत्तरोत्तर आगे की ओर बढ़ता जा रहा है।आवरणकार ने जिस स्त्री को इस शीर्षक के लिए उकेरा हैउसका तादात्म हठीजुनूनीउन्नतिशीलास्वयंसिद्धा और अन्वेषण की आकांक्षी स्त्री से है।हठी स्त्री के सिर पर विस्तृत गगन ने अपने साफा से छाँव की तो हिमालय ने अपनी गोद में उसे बैठा लिया।वैसे कवर वाली स्त्री को आंगनचौकादालानबगीचे आदि में भी दिखाया जा सकता था लेकिन तब टोह का अर्थ शायद संकुचित हो जाता।स्त्री की फर्श से अर्श तक की यात्रा का उद्घाटन बराबर चित्रकार ने अपनी कूची से किया है।स्त्री ने आंगन से हिमालय तक की दूरी तय करने के लिए हमेशा टोह को एक टूल की तरह उपयोग में लिया है।

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ग्रहण और तुलसी 

सभी सनातन धर्मावलंबी ध्यान दें कि 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण है इसलिए दीपावली का पर्व 24 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा. 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण होने के कारण भोजन पानी की समस्त सामग्री में तुलसी के पत्ते डालकर उन्हें ग्रहण में सूर्य की नकारात्मक किरणों के विकिरण से दूषित होने से बचाने की सनातन धर्म में प्राचीन परंपरा है और इसके लिए आपको निम्न सावधानी बरतनी हैं -1 - 24 अक्टूबर को अमावस्या सांय 5 बजकर 27 मिनट पर आरंभ हो रही है, ऐसे में तुलसी के पत्ते इससे पूर्व ही तोड़कर रख लें.
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आज का सफ़र यहीं तक 
@अनीता सैनी 'दीप्ति' 

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    दीपावली और उससे जु़ड़े पंच पर्वों की हार्दिक बधाई हो।
    आपका बहुत-बहुत आभार @अनीता सैनी 'दीप्ति' जी।

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  2. बहुत ही सुंदर और आकर्षक अंक ।
    सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई 🪔🪔🎆🎆🎇🎇💫💫

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  3. बहुत सुन्दर और विविधताओं से परिपूर्ण प्रस्तुति । प्रस्तुति में मेरे सृजन को सम्मिलित करने के लिए हार्दिक आभार! आप सबको दीपोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  4. सुन्दर चर्चा. बहुत-बहुत आभार. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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  5. सुंदर प्रस्तुति! दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  6. दीपोत्सव सहित पांच पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं 🌷
    बहुत सुंदर अंक।
    सभी सूत्र पठनीय आकर्षक।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय से आभार।
    सादर सस्नेह।

    ReplyDelete
  7. अनीता सैनी जी मेरी रचना को चर्चामंच पर स्थान देने के लिए हार्दिक आभार...बहुत सुन्दर लिंक संयोजन

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