शनिवार के लिए चर्चा मंच में अपनी पसंद के कुछ लिंक प्रस्तुत कर रहा हूँ!
ऐसी वाणी बोलिए.मन का आपा खोय! औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय।। अब आते हैं मुद्दे पर ............आप सबके जूते मेरे सिर पर ....! कोई बात नहीं जी! लगती है आग जब पानी में किनारा भी महफूज़ नहीं रहता मोहब्बत की आग जब जलाती दिल को कोई सहारा उसे बचा नहीं पाता ....! क्योंकि प्यार एक बुलबुला है पानी का... ! कैंसर के सौ से भी अधिक प्रकार हैं। हरेक प्रकार दूसरे से अलग होता है, सभी के कारण, लक्षण और उपचार भी अलग-अलग होते हैं... आज जानिए--सिर और गर्दन का कैंसर क्या होता है?... मन के हस्तिनापुर में हमेशा बिछी रहती है द्यूत- बिसात .. ! क्योंकि बेबसी की जुबान पर उगते काँटे देखे हैं ……! हम पलाश के फूल,सजे ना गुलदस्ते में खिल कर महके, सूख,गिर गये, फिर रस्ते में वृक्ष खाखरे के थे , खड़े हुए जंगल में पात काम आते थे ,..! भारत का स्वर्णिम अतीत -पूर्णतः दोषी आप नहीं है, संपन्नता एवं उन्नति रूपी प्रकाश हेतु हम पूर्व की ओर ताकते है किंतु सूर्य हमारी पीठ की ओर से निकलता है। बन ओस की निर्मल बूँद बरस गए मेरी बगिया हर पंखुरी आँखें मूँद करती आपस में बतियाँ भोर हुई आया अरुणाभ चुन चुन उनको ले भागा सुन्दर.... ,! खाली पन्ने बहते अश्रु जल ने शायद सब अक्षर मिटा दिए हैं तभी तो जीवन की किताब के कुछ पन्ने खाली रह गए हैं इन खाली पन्नो में फिर से कुछ लिख तो लूँ लेकिन ...बड़े दिलफरेब होते है ये जमाने वाले..... हॅस हॅस के मिले हमसे हमको मिटाने वाले.....। सत्ता का क्रूर मज़ाक... आप और हम सभी देख रहे हैं बोलो खरीदोगे ? -*रोज़ कस्म खाता हूँ * *अब न तुम्हे याद करूँगा ,* *रोज़ याद करता हूँ तुम्हे * *इक नई कस्म खाने के वास्ते...गुज़रे वक्त की तलाश...! चाहे गाये जमीं, चाहे गाये गगन गाने वाले नहीं हम तेरी गीत को - राहे उल्फत सँवरती हो जब हार से , देना ठोकर मुनासिब है हर जीत को-...तौफीक ! विनम्र निवेदन-....अब तो कुछ बोल ओ स्त्री.....!! ..एक किरण अब भी बाकी है........!
टूटी कश्ती थी, मझधार में चल रही थी - टूटी कश्ती थी, मझधार में चल रही थी, कभी डूब रही थी, कभी संभल रही थी| वक़्त के मुट्ठी में थी तकदीर मेरी , कभी बिखर रही थी,कभी बदल रही थी...! रिश्ता - आंसूओसे यह अजीबसा रिश्ता कैसा - मेरी हर आह्से बेसाख्ता जुड़े रहते हैं ज़रा सी टीस दरीचोंसे झांकती है जब मरहम बनकर उसे ढकने को निकल पड़ते हैं... ! *धक्का-मुक्की रेलम-पेल।*** *छुक-छुक करती आयी रेल।।*** *इंजन चलता सबसे आगे।*** *पीछे -पीछे डिब्बे भागे।।.....दर्द - बहार को विदा करना पतझड़ को कंहा रास आया । सारा दर्द पीलापन लिये पत्ते पत्ते पर उभर आया ।...ये भावी नेता ! - क्यों बदल देते हें लोग अपनी आस्था को कपड़ों की तरह, जहाँ आंच आती दिखी अपने दमकते भविष्य पर धीरे से निकल लिए और शामिल हो लिए दूसरे जुलूस में।....छोटू उस्ताद - जी सही समझे आप ....आज मिलवा रही हूँ अपने छोटू उस्ताद से .. अभी तो जस्ट शुरूआत है..देखिए आगे-आगे करते हैं क्या ----? भोगी भोग्या भोग यही है प्रेम रोग ....! गुणवान की वाणी] सेहत की हिफ़ाज़त का आसान तरीक़ा सुबह सूरज उगने से पहले उठें और पानी पीकर टहलने के लिए निकल जाएं। भोजन मन्त्र (वोर्डप्रेस डॉट कॉम ब्लॉग पर आडियो फाइल डालने की कोशिश) - केवल राम जी ने आज चैट पर पूछा की वर्डप्रेस डॉट कॉम के ब्लॉग पर आडियो फाइल कैसे डालें… तीन साल तक वर्डप्रेस ब्लॉग पर ही लिखने के बावजूद आजतक आडियो फाइल अपलोड...! ऐसे बेटे के होने से तो उसका न होना अच्छा...!’ ---दोपहर आज अपने जिस्म में नहीं थी। घर की बनी रोटी ढ़ाबे पर सख्त आटे से बना तंदूरी रोटी सा लगता रहा जिसे बनने के चार घंटे बाद खा रहा हूं। खाने के कौर खाए ...रानों पर के नीले दाग ....! कर लो जितना पूजन-अर्चन ,चाहे जितना पुष्प समर्पण मन का द्वार नहीं खुल पाया फिर क्या मथुरा,काबा,काशी कहने को तो अन्धकार में ,वह प्रकाश की ज्योति जगाते....एक गीत : मन का द्वार नहीं खुल पाया... ! ....मेरे मित्र की अभी शादी हुई है ,शादी की बाते करते करते अचानक अपना दर्द कह उठे "यार केवल इंडिका मिली" "तो क्या चाहिए था दहेज़ में ?"मैंने पूछ लिया अरे दहेज़ - ....!....एक पल में जिन्दगी बदल सकती है !
इतना होने के बाद

पर ग़ाफ़िल जी का विनम्र निवेदन कैसे टाल सकता था?
अन्त में यह कार्टून भी देख लीजिए-
बहुत सारी लिंक्स ले कर बहुत खूबसूरती से सजी है आज की चर्चा |मेरी लिंक शामिल करने के लिए आभार |
ReplyDeleteआशा
अच्छे लिंक सहेजे हैं चर्चा मंच पर। बधाई।
ReplyDeleteबढ़िया चर्चा ... खूब सरे लिनक्स मिले , धन्यवाद
ReplyDeleteवाह! आभार
ReplyDeleteआपके सद्द-प्रयासों को प्रणाम ,नैतिक साहस को सतत बल मिलता रहे , कलम का प्रवाह कायम रहे ,हम अकिंचनों को संबल व दिशा मिलती रहे ......साधुवाद सर !
ReplyDeleteअत्यन्त पठनीय सूत्र...
ReplyDeleteरोचक चर्चा !
ReplyDeleteपठनीय सूत्रों से सजी सुंदर चर्चा|
ReplyDeletebahut keemati links..bahut achha lagaa padhkar..
ReplyDeleteआपका यह प्रयास सराहनीय है
ReplyDeleteबहुत ही बढि़या लिंक्स संयोजन ।
ReplyDeleteबेहतरीन लिंक्स .बहुत आभार.
ReplyDeleteआज तो काफ़ी लिंक्स संजो दिये……………सुन्दर चर्चा।
ReplyDeleteबढि़या लिंक्स संयोजन।
ReplyDeletemeree rachnaa shaamil karne ke liye dhanywaad
ReplyDeleteबहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति...आभार!
ReplyDeleteचर्चा का यह अंदाज़ रोचक है।
ReplyDeleteरोचक प्रस्तुति ....नए अंदाज में ...
ReplyDeleteMY NEW POST ...सम्बोधन...