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Wednesday, February 01, 2012

चर्चा-मंच : ७७६: तो कल ही उड़ गया??

बजरंगबली का नाम लेके आज की पहली चर्चा राजकुमार जी की एक पुरानी रचना भैंस पे लैपटॉप   से शुरू कर रहा हूँ . आगे पढ़े दवे जी का  माय लोर्ड  और  दुबे और आपकी कहानी  . 





जी हाँ वोट बेचने का मौसम जिसमे  कस्टमर सर्विस  बेस्ट है .
 घास   खाने वाले   गधा  का वफादार  होना खुली आँखों का एक सपना है .

आज के लिए इतना ही .. 

सादर 

कमल 

10 comments:

  1. संक्षिप्त, सूक्ष्म व गहन..

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  2. प्रभावी चर्चा ||

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  3. Nice .

    हक़ीक़त गहरी हो और उसे भारत न जानता हो ?
    यह एक असंभव बात है।
    भारत का साहित्य गहरी हक़ीक़तों से लबालब भरा हुआ है। गहरी हक़ीक़तों के जानने वाले को ही पंडित कहा जाता है।
    पंडित वह सत्य भी जानते हैं जिसे इतिहास ने महफ़ूज़ कर लिया और जिसे सब जानते हैं और पंडित वह परम सत्य भी जानते हैं जिसे सुरक्षित रखने का सौभाग्य केवल उन्हीं को मिला और जिसे कम लोग ही जानते हैं।

    See :
    http://www.vedquran.blogspot.in/2012/01/mohammad-in-ved-upanishad-quran-hadees.html

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  4. वाह कमाल है कमल जी आपका।
    10 लाइनों में 20 लिंक!
    आभार!

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  5. बहुत ही बढि़या।

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  6. kaml ji aap ka charcha rakhne ka trika pasnd aaya .....

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  7. प्रभावी चर्चा मंच ...

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