चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, May 13, 2014

"मिल-जुलकर हम देश सँवारें" (चर्चा मंच-1611)

मित्रों।
मंगलवार की चर्चा में देखिए
मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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सिल्वट ने जो कहा कभी नहीं ... 

मजबूर वो रहा कभी नहीं
गमले में जो उगा कभी नहीं

मुश्किल यहाँ है खोजना उसे
इंसान जो बिका कभी नहीं...
स्वप्न मेरे.. पर Digamber Naswa -
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महज अपनी आजादी को जीते ,  

करते हैं परिवारों की बाते ! 

मेरे घर में नहीं है - 
सिर्फ मेरी किताबों से भरी बड़ी आलमारियां ! -  
मेरी आलमारी भरी है मेरी कुछ ही किताबोँ से -  
कुछ में सजी है पति और बच्चों की क़िताबें भीं ! -  
कुछ आलमारियों मे गृहस्थी के जरुरी सामान -  
राशन बर्तन भांडे कपड़े लत्ते - 
कैंची सुई धागा मशीन भी ...
गीत मेरे ........पर वाणी गीत
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अस्तित्व 

My Photo
Love पर Rewa tibrewal
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"काँटों की पहरेदारी"

आशा और निराशा के क्षण,
पग-पग पर मिलते हैं।
काँटों की पहरेदारी में,
ही गुलाब खिलते हैं।
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गंगा तेरी शरण में 

तन-मन-धनसे तुझको ध्याया
माँ सुन लो मन की पुकार
बन जाऊँ पी.एम.एक बार....
तेरे शीतल निर्मल जल से
पाप-कलंक मैं धोया मन से
रखता हूँ मैं स्वच्छ विचार
बन जाऊँ पी.एम.एक बार ....
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कुण्डलिया छंद -- प्यारी गुड़िया 

प्यारी गुड़िया चंचला ,खेले दौड़े धूप । 
नन्हे नन्हे पाँव हैं ,मनभावन है रूप ॥
मनभावन है रूप , तोतली बातें करती । 
बात बात मुस्कात ,सभी के मन को हरती॥
करे जतन से प्यार ,हमारी मुन्नी न्यारी । 
सभी लड़ाते लाड़, मोहिनी गुड़िया प्यारी ।।
Annapurna Bajpai
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रिश्ते 

Akanksha पर Asha Saxena 
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"हक़ीक़त से अपना न दामन बचाना" 


चमक और दमक मेंकहीं खो न जाना!
कलम के मुसाफिरकहीं सो न  जाना!

जलाना पड़ेगा तुझेदीप जगमग,
दिखाना पड़ेगा जगत को सही मग,
तुझे सभ्यता कीअलख है जगाना!!
कलम के मुसाफिर...................!!

16 comments:

  1. अच्छे लिंक्स लिए चर्चा .....आभार

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  2. सुंदर मंगलवारीय चर्चा सुंदर सूत्र ।

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  3. पर्याप्त सूत्र पढाने के लिए |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सर |

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  4. बढ़िया सूत्रीय चर्चा , आ. शास्त्री जी व मंच को धन्यवाद !
    I.A.S.I.H - ब्लॉग ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  5. सभी शानदार सूत्रों के साथ अपनी रचना को चर्चामंच पर देखना हमेशा सुखद रहा है आ० शास्त्री जो को हार्दिक धन्यवाद प्रेषित करती हूँ तथा सुन्दर चर्चा हेतु बहुत -बहुत बधाई

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  6. स्वस्थ चर्चा
    आभार

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  7. प्रणाम गुरुदेव
    मेरी रचना को सम्मान देने के लिए शुक्रिया

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  8. आपका संकलन बेहद सुन्दर होता है ,साथ में मेरी रचना को भी सम्मान देते है आपको खूब आभार

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  9. charcha ki charcha chahu oore....khoobsurat

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  10. विस्तृत चर्चा सूत्र ...
    आभार मुझे शामिल करने का ...

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  11. अति उपयोगी लिंक्स का चयन हुआ है । मुझे भी सम्मिलित करने के लिए शुक्रिया ।

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  12. sundar charcha....meri rachna ko bhi sthan diya apne shukriya

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  13. सुन्दर लिंक-संयोजन शास्त्री सर ! मेरी रचना को स्थान देने का आभार....

    ~सादर
    अनिता ललित

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  14. सुन्दर लिंक-संयोजन

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  15. बहुत सुन्दर लिंकों को स्थान दिया गया है. "काँटों की पहरेदारी" में दी गयी पंक्तियाँ ह्रदय को छू गईं.
    "आशा और निराशा के क्षण,
    पग-पग पर मिलते हैं।
    काँटों की पहरेदारी में,
    ही गुलाब खिलते हैं।"
    जीवन की कल्पना गुलाब के फूल से की गयी है जो अति सुन्दर है. आशा और निराश दोनों के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है.
    धन्यवाद.

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