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Tuesday, March 29, 2011

अनकहे गीत बड़े प्यारे हैं … साप्ताहिक काव्य मंच – 40 . चर्चा मंच –469 .

नमस्कार , इस सप्ताह कुछ ब्लॉग्स पर ऐसी रचनाएँ पढने को मिलीं जो माँ के ममत्त्व से भरी थीं या फिर माँ के प्रति समर्पित थीं …आज उन रचनाओं की विशेष चर्चा कर आगे चर्चा मंच सजाना चाहती हूँ …तो प्रारंभ करते हैं आज की विशेष चर्चा ..रश्मि प्रभा जी की रचना से ---
मेरा फोटोरश्मि प्रभा जी की लेखनी से सभी परिचित होंगे …उनकी रचनाओं में हमेशा एक जीवंतता दृष्टिगोचर होती है ..कोई भी समस्या आये लगता है वो चुटकियों में हल  कर देंगी …ऐसे ही गहन चिंतन की एक अभिव्यक्ति है --तुम्हारे लिए..
इसमें कवयित्री आज की परिस्थितियों से जूझते उन बच्चों को माँ के हृदय की बात कह रही हैं जो आज बहुत अकेलापन महसूस करते हैं ..ज़िंदगी की भाग दौड में कब वो अकेले हो गए  इसका एहसास शायद उनको भी नहीं होता …

वह सन्नाटा  /जो तेरे दिल में नदी की तरह बहता है /उसके पानी से मैं हर दिन  /  अपने एहसासों का घड़ा भरती हूँ  /  उस पानी की छुवन से  /  मिट्टी से एहसास नम होते हैं  /  और तेरे चेहरे की सोंधी खुशबू  /उस घड़े से आती है ...
इस सन्नाटे में भी माँ बच्चे की सोंधी खुशबू का एहसास करती है ..आगे  उसे उत्साहित करने के लिए  कहती हैं --

जब जब तुम्हें लगता है  / तुम बदल गए हो  / मैं बचपन की मोहक गलियों से
वह सारे सपने ले आती हूँ  / जिनको मैंने जागकर बुने थे - तुम्हारे लिए !
एक माँ बच्चे की हंसी खुशी के अलावा कुछ नहीं चाहती …और वो कितने विश्वास से कह रही हैं कि-
सोचो यह कितनी बड़ी बात है  / अकेले में इस जादू को  /बस तुम देख सकते हो ...!!!
जिस समय कोई निराशा के सागर में डूबा हो  उस समय माँ का संबल  मिल जाए इससे बड़ी बात और क्या होगी ? रश्मि जी की यह प्रेरक रचना हर माँ के दिल के करीब होगी …ऐसी मुझे आशा है ..
My Photoमाँ के हृदय की बात मैंने आपको रश्मि जी की रचना में बताई …अब देखिये कि माँ के प्रति बच्चों के मन में कैसे उदगार आते हैं … पढ़िए आज की युवा पीढ़ी का नेतृत्व करने वाली बाबुषा  की माँ के प्रति समर्पित रचना ---
माँ पर तीन कविताएँ


1-   माँ  मेरी ,  / सच में;  /  माँ दुर्गा हैं ! / बस ,  / एक ही अंतर है  / कि,  /माँ दुर्गा के
दसों हाथ   / दिखते  हैं ,  / किन्तु ;  / मेरी माँ के नहीं !
इसमे माँ कैसे अपने दो हाथों से अनेक काम कर घर की व्यवस्था बनाये रखती हैं …इसी लिए कवयित्री ने कल्पना की है कि माँ दस हाथों का काम समेट लेती हैं |
२-- बाबुषा कहती हैं कि सूरज भी एक सीमा तक ही रोशनी बिखेरता है …पर माँ तो सूरज निकलने से पहले उठ जाती है और रात तक काम में लगी रहती है …
सूरज के ,  / आंख खोलने के पहले   / उठ जाती हैं माँ !  /अलसा जाता है   / सूरज भी ;
मद्धिम पड़ने लगता है  /  सांझ तलक ;
3-और जब यह दोनों कविताएँ  लिख दीं तो  सोच रही हैं कि यदि यह सब माँ ने पढ़ा तो  ममत्त्व से उनकी आँखों से स्नेह धार फूट निकलेगी ..
ऊपर की   / दोनों कविताएँ पढ़ के ; / खूब बहेंगी   / गंगा -जमुना उनकी ; / पता है मुझे ,
सब पता है ! /  खतरा बढ़ जाएगा   / मेरे घर में ,   / सुनामी का  !
मेरा फोटोअब लायी हूँ माँ के प्रति साधना वैद जी के विचार …उम्र के इस पड़ाव में भी जब वो स्वयं माँ और दादी बन चुकी हैं तब भी माँ के लिए उनके मन में क्या भावनाएं हैं तुम्हारे बिन
चाँद मेरे आँगन में हर रोज उतरता भी है,
अपनी रुपहली किरणों से नित्य
मेरा माथा भी सहलाता है,
पर उस स्पर्श में वो स्निग्धता कहाँ होती है माँ,
जो तुम्हारी बूढ़ी उँगलियों की छुअन में हुआ करती थी !

माँ की उँगलियों का  स्पर्श आज भी उन्हें सुखद एहसास करा जाता है ..चाँदनी उनको शीतलता देती है  और कल्पना कर रही हैं कि लोरी भी सुनाती है पर फिर भी  तुम्हारे आँचल जैसी छाँव नहीं मिलती ---
पर उस आवरण की छाँव में वो वात्सल्य कहाँ माँ
जो तुम्हारे जर्जर आँचल की
ममता भरी छाँव में हुआ करता था,

सुबह उठाने की प्रक्रिया का सुन्दर वर्णन किया है …सूरज उठाता है पर वो बात कहाँ ?

लेकिन माँ जिस तरह से तुम अपनी बाहों में समेट कर,
सीने से लगा कर, बालों में हाथ फेर कर मुझे उठाती थीं
वैसे तो यह सर्व शक्तिमान दिनकर भी
मुझे कहाँ उठा पाता है माँ !

साधना जी आज भी माँ की छत्रछाया पाना चाहती हैं --

मुझे किसी चाँद, किसी सूरज की ज़रूरत नहीं थी माँ
मुझे तो बस तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी ज़रूरत है
क्योंकि उम्र के इस मुकाम पर पहुँच कर भी
आज मैं तुम्हारे बिना स्वयं को
नितांत असहाय और अधूरा पाती हूँ !

ये सारी रचनाएँ माँ के गौरव को बताती हैं …आशा है आपको यहाँ इनकी चर्चा पसंद आई होगी …
चलिए अब चलते हैं सप्ताह भर की कुछ चयनित रचनाओं की ओर …
आखर कलश पर पढ़िए  महादेवी वर्मा की कुछ काव्य- कृतियाँ
मैं नीर भरी दुःख की बदली!
कौन तुम मेरे हृदय में
कौन मेरी कसक में नित
मधुरता भरता अलिक्षत?
कौन प्यासे लोचनों में
घुमड़ घिर झरता अपिरिचत?



My Photo
सुषमा आहुति की रचना -
जब भी लिखती हूँ मैं ..!!!
जब भी लिखती हूँ मै,
शब्द मेरे ख्याल तुम्हारा होता है,

My Photoआभासी दुनियाँ- लाये हैं देवेन्द्र पाण्डेय जी

एक ऐसी दुनियाँ
जहाँ
न कोई राजा न कोई रानी

मेरा फोटो
के० एल ० कोरी जी की गज़ल -
रात अश्कों का आना जाना तुझसे कहते कैसे
अपने दर्दो-गम का फ़साना तुझसे कहते कैसे


मेरा फोटोडा० वर्षा सिंह जी इंतज़ार में बेकरार हैं …तुम नहीं आये





शोभना चौरे जी की यादों की पोटली  अपने अंदर कितनी यादें सहेजे हुए है --
मेरे सिरहाने रखी /यादो की पोटली में /बंधी यादों ने  /विनती कर मुझसे कहा -/अब तो मुझे खोल दो


My Photoवंदना सिंह ले आई हैं …भीगी हुई सुबह
भीगी हुई सुबह  /ठिठुरते हुए पंछी  /टहनियो से मूँह निकाल  / झांकती बसंती कूप



मेरा फोटोइमरान अंसारी जी पढवा  रहे हैं एक खूबसूरत गज़ल ---अजल
गमे-ए-हयात का झगड़ा मिटा रहा है कोई
चले भी आओ की दुनिया से जा रहा है कोई,






Mahesh Kushwansh  कुश्वंश जी पूछ रहे हैं प्रश्न ..और कह रहे हैं कि --

उत्तर मिले तो बताना ?

हमने, आपने, सबने
पहन रखे है मुखौटे
तरह तरह के.


My Photoअपूर्व शुक्ल की यह रचना यदि आपने नहीं पढ़ी है तो मेरी गुज़ारिश है कि ज़रूर पढ़ें --   वो कौन सा सपना था भगत
वह भी मार्च का कोई आज सा ही वक्त रहा होगा
जब पेड़ पलाश के सुर्ख फ़ूलों से लद रहे होंगे
गेहूँ की पकती बालियाँ
पछुआ हवाओं से सरगोशी कर रही होंगी




bab-1 एस० एम ० हबीब लाये हैं एक खूबसूरत रचना ..बचपन
किसी ताजे पुष्प सी सुरभित, सब स्मृतियाँ तेरी हैं।
जाने किस रंग में तुने यह आकृतियाँ उकेरी हैं॥

My Photo   अर्चना जी लायी हैं ----  
रचते-रचते ही रचता है संसार
बसते-बसते ही बसता है घर-बार


My Photo  नवनीत पांडे जी की एक ख्वाहिश है जो पूरी नहीं हो रही …भला क्यों ? तो पढ़िए उनकी रचना --तितलियाँ ढूँढते – ढूँढते 
बहुत दिनों से
चाहता हूं देखना-
एक तितली





ज़रा रुको तो कोई ज़िन्दगी की बात करें
फिर एक बार मुलाकात अपने साथ करें


My Photo  अनीता निहलानी जी की खूबसूरत रचना

अनकहे गीत बड़े प्यारे हैं

जो न छंद बद्ध हुए
बिल्कुल कुंआरे हैं
तिरते अभी नभ में
गीत बड़े प्यारे हैं !


My Photo सिद्धार्थ जी  की एक गज़ल पढ़ें ---

जरुरत नहीं रही ! 

खंडहर बचे हुए है, इमारत नहीं रही !
अच्छा हुआ की सर पर कोई छत नहीं रही!!


My Photo  शाहिद मिर्ज़ा जी की गज़ल …

आज भी

रंज-ओ-ग़म के दरमियां है शादमानी आज भी
कर रही है मुझ पे किस्मत मेहरबानी आज भी
images (20) साधना वैद जी जाना चाहती हैं - झील के किनारे .. न जाने कितनी यादें सिमटी हुई हैं …





  बाबुषा  ले आई हैं …
लाल लाल सोने का गोला -
बांछें खिल जाती हैं उसकी ,  / जब आंगनवाडी वाले बच्चे ;  /एक सुर में,  / ज़ोर- ज़ोर से;  /पढ़ते हैं कि-     / आसमान में लगा चमकने     / लाल -लाल सोने का गोला !'





 संवेदनाएं अभी बाकी हैं ..इसका एहसास कराती रश्मि प्रभा जी की रचना -
आँखों के मेघ जब घुमड़ते थे     /  तो दर्द का सैलाब    / सुनामी से कम नहीं होता था |




My Photo पी० सी० गोदियाल जी देश की आज की परिस्थिति पर गहन चिंतन करते हुए लिख रहे हैं --कुरुर पुनरावृत्ति
शर्मो-हया गायब हुई,
आंख,नाक,गालों से,
गौरवान्वित हो रहा,
अब देश घोटालो से ।




  सांझ बता रही हैं ---
गिना देता है ज़ालिम एक पल में ग़लतियाँ सारी
हमने घबरा के थाम ली सनम की उंगलियाँ सारी


      मनोज ब्लॉग पर पढ़िए श्याम नारायण मिश्र का नवगीत ---बंजारे बादल
बजा बजा कर ढोल
नाच    रहे     बादल
बना बना कर गोल।

 गिरीश बिल्लौरे जी ले आये हैं ---

चिंतन की सिगड़ी पे प्रीत का भगौना

चिंतन की सिगड़ी पे प्रीत का भगौना
रख के फ़िर आई भूल गई, लेटी जा बिछौना

 साहित्य प्रेमी संघ पर पढ़िए लक्ष्मी कान्त की रचनाएँसरसरी तौर पर ... और ... जीत




My Photo  संध्या शर्मा जी क्या कह रही हैं ज़रा गौर करें --

आखिरी वक़्त मुस्कुराना है..

जिंदगी ख्वाब है सजा के रखो,
उम्मीदों से भरा खजाना है.

मेरा फोटो  अनुप्रिया जी अपने बड़े भाई की यादों को समेट लायी हैं एक भावभीनी रचना में ..

(in loving memory of my elder brother manuj kehari ,21 .9 . 1976 -26 .3 .2010 )

उस कयामत की शाम को
जिन्दगी हुई हमसे खफा...
रूह के हर जर्रे में
दर्द जैसे घुल गया...

अम्मा जी के शब्द  भावना जी  अपनी माँ की रचनाएँ सबके साथ बाँट रही हैं …यह चित्र उनकी माँ लीलावती बंसल जी का है …और गज़ल है --दामन नहीं छुडाएंगे इस ज़िंदगी से हम 
दामन नहीं छुड़ाएँगे इस ज़िदगी से हम
रिश्ते सभी निभाएँगे इस ज़िंदगी से हम।
 
My Photo  डा० नूतन ले आई हैं    जल और जलन    का जलजला ..
My Photo आलोकिता मंद समीर का आनंद लेते हुए कह रही हैं ओ शीतल शीतल पवन के झोंकों 
ओ शीतल शीतल पवन के झोकों
बहने दो संग में..... आज न रोको


मेरा फोटो  धीरेन्द्र सिंह जी की नयी रचना --   जीवन
निर्मोही निर्लिप्त सजल है
यह माटी में  जमी गज़ल है

My Photo  हरकीरत हीर  जी की लेखनी के सभी कायल है …. इस बार लायी हैं ..

ख़ामोशी चीरते सवाल

पत्थरों के फफोले
विडम्बनाओं की ज़मीं
उठाकर चल पड़े हैं .....
बिलकुल वैसे ही जैसे
तुम बाँध देते हो हवाओं को


मेरा फोटो  अपर्णा मनोज भटनागर ले आई हैं -

संदूक

अभी तक जगे हो ?
सोये नहीं रात ?
कागज़ करोगे जिन्दगी ?
मुझे हाशिये तमाम उम्र .


मेरा फोटो
वंदना गुप्ता जी हाँ . मैं मध्यमवर्गीय इंसान हूँ  के माध्यम से एक आम आदमी के एहसास लायी हैं ..


मेरा परिचयडा० रूपचन्द्र शास्त्री जी  आज एक नए छंद की महिमा का  बखान कर रहे हैं --
गति-यति तालहीन,
रबड़ छंद भाया है।
नये-नये बिम्ब लिए,
नया छंद आया है।।
आशा है आपको कुछ अच्छे और नए लिंक्स ज़रूर मिले होंगे ….आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है …मैं रचनाकारों से विशेष निवेदन करना चाहूंगी ….कृपया वर्तनी की शुद्धता  को महत्त्व दें …तो चलिए फिर मिलते हैं अगले मंगलवार को नयी चर्चा के साथ …..तब तक के लिए – नमस्कार …. संगीता स्वरुप

37 comments:

  1. बहरीन चर्चा संगीताजी.... कई सारे लिनक्स समेटे.... आभार

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  2. बहुत खूब
    चर्चा लग रही है
    संगीत

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  3. बहुत दिनों बाद आयी अपने पुराने रंग में ...
    सुन्दर चर्चा ..!

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  4. बहुत सुंदर चर्चा |बधाई
    आशा

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  5. बहुत नयी कवितायें पढ़ने को मिल गयीं, आभार।

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  6. सुन्दर लिंकों से सजी बेहतरीन चर्चा . बहुत सारी अच्छी रचनाये पढने को मिली .

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  7. अच्छे लिंक सजे है हमेशा की तरह

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  8. संगीताजी, स्पष्ट दिख रहा है कि आज की चर्चा आपने बड़े दिल से और लगन से सजाई है आपके श्रम को नमन ! बधाई स्वीकारें और आभार!

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  9. मात्रा प्रखर प्रबुद्ध चर्चा नहीं है ये , हर रचनाओं को धड़कनों पर बुनकर की तरह बुना है आपने ... शुभकामनायें

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  10. बहुत शानदार और सुसज्जित चर्चा के लिए आपका आभार संगीता जी !

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  11. संगीता जी, बहुत सुन्दरता से सजाई है आपने आज की चर्चा, हर एक रचना लाजवाब है, आपकी पारखी नज़र और श्रम को नमन ! बधाई स्वीकारें और आभार....

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  12. बढ़िया और स्तरीय चर्चा के लिए बधाई!

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  13. बहुत सुन्दर चर्चा ...आभार...

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  14. बहुत ही मेहनत से संजोये लिंक्स हैं……………बेहद उत्तम और शानदार चर्चा…………आभार्।

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  15. काव्‍य चर्चाओं का यह मंच यूं ही सजता रहे ...बहुत ही अच्‍छे लिंक दिये हैं आपने ...बधाई के साथ शुभकामनाएं ।

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  16. धन्यवाद संगीताजी!..आप कितना कुछ समेट कर लाई है..कमाल है!...होली तो चली गई लेकिन आपने मन खुशियों के रंगों से सराबोर कर दिया!

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  17. संगीता जी, बहुत अच्छे लिंक्स के साथ साथ आपका प्रस्तुतिकरण बहुत पसंद आया.

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  18. हमेशा की तरह बेहद खूबसूरत काव्य मंच सजाया है आपने संगीता जी ! इसमें आपने मुझे भी स्थान दिया इसके लिये आपकी आभारी हूँ ! आज की सभी रचनाएं नायाब हीरों की तरह जगमगा रही हैं ! आपके चयन की कायल हूँ मैं ! मेरी ढेर सारी शुभकामनायें एवं बधाइयाँ स्वीकार करें !

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  19. Sangita ji...bahut sundar charcha... kintu mai apne net kee vajah se pareshan ho jaati hun... sunbah se 3 baar is page ko load kiya kintu comment nahi kar payi..net kat gaya ... aur abhi bhi kaam nahi kar raha hai...ye aik temprerory device se kar rahi hun... abhi link me jana nahi ho payega... is se... kintu jo aap ne links ke saath unke baare me likha hai..bahut sundar laga... meri rachnaa ko shamil karne ke liye aabhaar ............aaj kuch case bhi hai...so kal links me jaungi... byee..

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  20. संगीता जी बहुत शुक्रिया जो आपने जज़्बात की पोस्ट को यहाँ जगह दी है......आपके बताये लिंक बहुत अच्छे लगे ....खासकर अपूर्व शुक्ल जी के ब्लॉग पर पहली बार गया ....उनकी पोस्ट तो शानदार थी......एक बार फिर शुक्रिया |

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  21. इस रविवार ( ३ अप्रेल ) को यहाँ मदर्स डे मनाया जा रहा है. लगता है उसी उपलक्ष्य में आपने यह ममता मयी चर्चा सजाई है.
    बहुत ही अच्छे लिंक्स मिले और चर्चा भी शानदार रही.बहुत मेहनत लगन से चर्चा करती हैं आप..

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  22. बेहतरीन लिंक से सुसज्जित चर्चा । आभार...

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  23. बस आज के लिए तो मन भर गया। भरपूर, एक से बढ़कर एक।

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  24. इतनी सारी खूबसूरत रचनायें ....
    और साथ में आपकी प्रभावी टिप्पणियाँ .....
    बहुत मेहनत करतीं हैं आप .....
    इतना आसां नहीं है ये चर्चा मंच चलाना ....
    रब्ब आपको कामयाबी दे ....!!

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  25. कॉलेज में जब debate/speech देती थी, अक्सर कहा जाता था की युवा पीढ़ी का नेतृत्व करने वाली बाबुषा...आप कभी मुझ से मिले भी नहीं, मेरी कविताओं से ही जानती हैं मुझे...पर जब मैंने वही...एकदम वही बात अपने लिए सुनी जो कही जाती रही है तो सच कहूँ संगीता जी , आँख भर आयी !

    आज दिन भर व्यस्त रही,बस अभी net on किया..शायद रात तक पूरे links पढ़ पाउंगी.

    ह्रदय से आभारी हूँ. हाँ , एक बात कह दूँ, संयोजन बेहतरीन है ! मुझ जैसे लालची के मुंह में पानी आ रहा है ये page देख कर.. और लग रहा है, सारी की सारी एक बार में परोसूं और खा जाऊं ! :-)

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  26. सभी links बेहतरीन ! मज़ा नहीं, बहुत मज़ा आया !

    बेहतरीन collection संगीता जी..! मुझ से यह कहे बिना रहा नहीं जा रहा कि Apoorv's work is noteworthy. वहाँ उनके ब्लॉग में लिख आयी हूँ पर यहाँ इस मंच पर ज़ोरदार तालियाँ बजाना चाहती हूँ अपूर्व के लिए !

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  27. हमेशा की तरह बहुत ही खुबसुरत और बेहतरीन चर्चा...धन्यवाद।

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  28. charcha manch ke prati hardik aabhar vyakt karte huye batana chahta hoon ki main nav praveshi hoon, abhee chalna seekh raha hoon. laxmi Kant.

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  29. bahut sunder charcha manch sajaya hai. maa par aapne apne jo vichar shaamil kiye bahut bahut pasand aaye.

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  30. ज़ोरदार चर्चा।
    सुंदर लिंक का चयन।

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  31. एक अंतराल के बाद चर्चामंच पर पहुंचा हूँ । बहुत ही अच्छे लिंक मिले । बहुत अच्छी चर्चा । आभार एवं शुभकामनाएं ।

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  32. संगीता स्वरुप जी,
    बहुत अच्छा लगा चर्चा मंच पर आकर..मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद!
    सबको सहेजने का आपका प्रयास हार्दिक बधाई योग्य है।
    बहुत ही प्रभावशाली और सार्थक चर्चा रही आज की ।
    काफी उपयोगी और मनोहारी लिँक प्राप्त हुए ।
    आपका आभार...

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  33. sangita ji...bhut bhut sukriya ki apne meri kavita ki sarahana ki aur use charchamanch pe laayi... bhut hi accha link hai un sabhi acchi rachnaao ke baare me janne ka jinhe ham pad nhi pate hai..is link se un sabhi nayi rachnaao ko bhi pad sakte hai... thanku very much....

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  34. एकदम अलग हट के अंदाज है आपका इस मंच पर ब्लोगर्स और उनकी रचनाओं को प्रस्तुत करने का.सचमुच बहुत प्यारा. कभी धीमे से मेरा हाथ पकड़ कर आप लाये मुझे यहाँ.बहुत खुशी होगी मुझे संगीता दीदी !

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  35. अत्यंत सुन्दर लिंक्स से सजी चर्चा है संगीता दी... आपके श्रम को और आपको नमन...
    "बचपन" का ऐसी उत्कृष्ट चर्चा में शामिल होना सम्मान की बात है.... सादर धन्यवाद..

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