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Thursday, March 24, 2011

एक नज़र उपलब्धियों पर ……………चर्चा मंच ……………464

दोस्तों 
आज की चर्चा मे आपको
ब्लोगिंग के माध्यम से 
उपलब्धियां हासिल करने 
वाली शख्सियतों से 
मिलवाने ले चलती हूँ .
कैसे ब्लोगिंग ने अपना
मुकाम बनाया है 
ये भी जानिए

1
दोस्तों ,

आज आपको किसी से मिलवाने ले चलती हूँ.........ये हैं हमारी आप सबकी प्रिय ब्लोगर डॉक्टर अरुणा कपूर जी ..............ये पिछले १५ सालों से लेखन के कार्य में संलग्न हैं और अपने  लेख , कवितायेँ और कहानियों से हमें रु-ब-रु करवाती रहती हैं .उनके ब्लॉग से तो आप सब परिचित हैं ही ............

ये उनका ब्लॉग है और उसका url ये है जो ना जानते हों उनके लिए url भी दे रही हूँ ताकि वहाँ तक पहुँच सकें .............

अभी हाल ही में इनका एक उपन्यास छपा  है ...........

...उनकी नज़र है ......हम पर ........



अरुणा जी ने बड़े स्नेह के साथ मुझे इस उपन्यास की एक प्रति उपलब्ध करवाई जिसके लिए मैं उनकी तहेदिल से आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे इस योग्य समझा.
हम सब बचपन से अब तक सुनते आये हैं कि दूसरे ग्रह के प्राणी हमारी पृथ्वी पर उड़न तश्तरियों के माध्यम से आते हैं मगर आज तक इसका कोई प्रमाण नहीं मिला इसलिए उसे पूरी तरह स्वीकारा भी नहीं गया मगर फिल्मों और किताबों के माध्यम से हम सभी इनसे परिचित होते रहे और एक कपोल कल्पना मानते रहे ..............मगर अरुणा जी ने जिस दूरदर्शिता से काम किया है वो काबिल- ए- तारीफ है उन्होंने दो बच्चों के माध्यम से इस कल्पना को इस तरह प्रस्तुत किया है कि  लगता है घटना और पात्र जीवंत हैं और हर घटना हमारी आँखों के आगे ही घटित हो रही है ............बच्चे भी ऐसे वैसे नहीं हैं ............बेहद होनहार और तेज तर्रार जो खुद एक खोजी स्वभाव के हैं और उत्सुक रहते हैं जानने के लिए कि क्या ऐसा संभव है ? अरुणा जी ने अपनी सीधी और सरल भाषा शैली में पात्रों और घटनाक्रम को इस तरह लेखनबद्ध किया है कि  पाठक को निरंतर उत्सुकता बनी रहती है कि आगे क्या होगा .........फिर चाहे बच्चे पढ़ें या बड़े हर किसी के लिए ये एक पढने योग्य पुस्तक है ..............शुरू से आखिर तक धाराप्रवाह लेखन अरुणा जी की कल्पनाशीलता और लेखन की उच्चता का द्योतक है .
मैं कोई समीक्षक तो हूँ नहीं सिर्फ एक पाठक हूँ और ना ही मुझे समीक्षा करनी आती है .........एक आम पाठक की दृष्टि से यही कहूँगी कि अरुणा जी ने जो कल्पना की है वो कब हकीकत बन जाये कह नहीं सकते कम से कम आज के विज्ञान के युग में और अरुणा जी का तो विश्वास है कि ऐसा आने वाले दिनों में हो सकता है ...........आज के युग में कुछ भी असंभव नहीं है तो फिर जो उन्होंने किताब में आखिर में लिखा है कि एक समय ऐसा आएगा जब २-२ चाँद दिखेंगे तो उसमे कोई अतिश्योक्ति नहीं है क्यूँकि जब हम ये सुन रहे हैं कि कुछ दिनों में एक ग्रह पृथ्वी के इतने करीब से गुजरेगा कि कई महीनो तक आकाश में २ सूर्य होने का आभास बना रहेगा और रात को भी दिन का आभास होगा तो क्या ऐसा संभव नहीं है कि एक वक्त ऐसा भी आये कि २ चाँद नज़र आयें..............आज का युग साइंस का युग है और इसमें कुछ भी असंभव नहीं ......इसी को अरुणा जी ने अपने उपन्यास में दर्शाने की कोशिश की है ............उपन्यास इतनी रोचक शैली में लिखा गया है की पाठक शुरू से आखिर तक बंधा रहेगा .

और एक खास बात आपको बताना भूल ही गयी कि अरुणा जी कि ये किताब आमिर खान ने भी पढ़ी है और उन्होंने इ- मेल द्वारा अरुणा जी को अपनी बधाइयाँ प्रेषित कि हैं जो ये दर्शाता है कि अरुणा जी वाकई एक उच्च सोच और कल्पनाशीलता की महिला हैं और ये उनके साथ हम सबके लिए भी गर्व की बात है।

अगर कोई ये उपन्यास प्राप्त करना चाहता है तो अरुणा जी से इस नंबर पर संपर्क कर सकता है ..........011---27562121

एक बार फिर अरुणा जी की हार्दिक आभारी हूँ कि  उन्होंने अपने बेशकीमती मोती से मुझे अनुग्रहित किया .

अब बधाइयाँ उन्हें उनके ब्लॉग पर जाकर दीजियेगा .


2

 अब मिलवाती हूँ ब्लॉगजगत की उन हस्तियों से जो किसी परिचय की मोहताज़ नहीं ............हाँ जी , अविनाश वाचस्पति जी, राजीव तनेजा जी, शाहनवाज़ जी और इरफ़ान खान कार्टूनिस्ट जी ..........अब इनका परिचय ये अपने आप हैं मैं तो सिर्फ इनकी उस उपलब्धि की तरफ ध्यान दिलाना चाहती हूँ कि इन सभी महानुभावों को एन डी टी वी  वालों ने निमंत्रण दिया और हास्य के लिए एक गोष्ठी २० मार्च को आयोजित की जिसमे अशोक चक्रधर , सुनील पॉल, आशुतोष राणा , कुंवर बेचैन ,शाहिद मेहन्दी साहेब के साथ ये विचार गोष्ठी आयोजित की गयी ...........जिसमे हास्य के परिप्रेक्ष्य में चर्चा की गयी ..........मगर क्या चर्चा की गयी ये आप लोग खुद देखिये और सुनिए इस लिंक पर 





तो बताइए........है न ये हम सब ब्लोगर्स के लिए सम्मान की बात कि आज ब्लोगिंग अपना मुकाम हासिल कर रही है और मिडिया में भी जिसने अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है.

अब कुछ रोजमर्रा की चर्चा कर ली जाए

उड़ने दो 

भटकता फिरता हूँ 

 एक संघर्ष 

 इस नज़र से भी देखो तो ज़रा 

 अपनी पहचान आप है 

ढाई आखर में संसार समाया  

 एक में ही सब है समाया 

 हाँ .......जी जाने दो 

जानिये कैसे  

एक चिंतन  

अनंत  

 जिसे मिला वो इस जहान का न रहा 

रु-ब-रु होइए  

 बस अब यही निशानी रह गयी हैं 
याद कौन  करता है? 

 उड़ाती फिरती हैं 

 सत्य वचन 

 दो पल जी लिए ऐसे ही 

अच्छा किया  

और ज़िन्दगी जी ली मैंने  

 एक ही है 
देखिये कैसे कैसे 

 जानिए इनके बारे में 
 तो फिर किसकी हैं ?
 मारा मारा फिरता हूँ
वो तो दिलों में रहते हैं
दिल का बजता है 
 जरूर मिलेगा जी 
ये जोड़ी तब तक बनी रहे
जब तक सूरज चंदा रहे 
 
 क्या जरूरी था जी ............
सत्य वचन 
 ये अंदाज़ भी बढ़िया है 
बहुत कुछ कह जाती है 
कितनी बदल गयी है


 किसका और कैसा ?

 सिर्फ यादें ही तो बाकि हैं 

सोलह आने सही बात कही है 

और अब आखिर में
लीजिये एक निगाह इधर भी डाल लीजिये 
रायपुर छतीसगढ की उदंती पत्रिका में छपा मेरा आलेख 
भी पढ़ लीजिये 
इस लिंक पर  


http://www.udanti.com/2011/03/blog-post_1251.html

दोस्तों आज से एक कोशिश की है
जो भी काव्य संग्रह , उपन्यास मुझे 
प्राप्त हुए हैं उनके बारे में आप सबको 
जानकारी देती चलूँ.........आखिर ये भी 
तो चर्चा का ही एक हिस्सा है न.
अब अगले बुधवार की प्रतीक्षा कीजिये
तब तक कुछ और नए 
कवियों और कवयित्रियों से 
मिलवाने की कोशिश करुँगी 
जो मेरे पास उपलब्ध हैं 
आपके विचारों की प्रतीक्षारत

37 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा!
    प्रस्तुतिकरण बहुत बढ़िया रहा!

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  2. लाजवाब!
    सुंदर चर्चा।

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  3. bahut sundar charcha...vandna ji
    aabhar

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  4. कुछ नया ..ब्लोगर की उपलब्धि ...
    डॉ अरुणा जी बधाईयाँ....
    कभी टी वी मे कोई कार्यकर्म आ रहा हो तो चर्चामंच पर इत्तला की जा सकती है.. ताकि अन्य ब्लोगर जो यहाँ आते हैं वो भी इसे देख सकें..... एन डी टी वी मे हास्य कार्यक्रम का प्रसारण हुवा ब्लोगर भाइयों को बधाई जिनके कार्यकर्म आये ...
    वंदना जी अच्छी चर्चा ..आपको भी बधाई ..:))

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  5. डॉ अरुणा कपूर जी से रोहतक के तिलयार में राज भाटिया जी के कार्यक्रम में मुलाकात हुई थी...बहुत ही सुदर्शन व्यक्तित्व की मालिक हैं...आपने ये उपन्यास पढ़ने की इच्छा जगा दी...

    रही अविनाश भाई, राजीव तनेजा जी और शाहनवाज़ की बात तो इनके कार्यक्रम में जाने से एनडी टीवी का मान बढ़ा...

    बाकी लिंक भी बेहतरीन दिए हैं...

    जय हिंद...

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  6. शुक्रिया वंदना जी एक फिर से मेरी पोस्‍ट को जगह देने के लिए।
    *

    उदंती में आपकी रचना है,बधाई। पर एक सुधार कर लीजिए। उदंती जयपुर से नहीं बल्कि रायपुर,छत्‍तीसगढ़ से प्रकाशित होती है।

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  7. सुन्दर चर्चा ... रचना शामिल करने का शुक्रिया !

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  8. अरुणा जी को बधाई ...इनकी पुस्तक अभी पढ़ने कि प्रक्रिया से गुज़र रही है ...इनकी कल्पनाशक्ति की मैं कायल हो गयी हूँ ...

    अविनाश वाचस्पति जी, राजीव तनेजा जी, शाहनवाज़ जी और इरफ़ान खान कार्टूनिस्ट जी ..सभी को बधाई

    आज की चर्चा का प्रस्तुतिकरण पसंद आया ...बहुत अच्छी चर्चा ...आभार

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  9. अरुणा जी, अविनाश वाचस्पति जी, राजीव तनेजा जी, शाहनवाज़ जी और इरफ़ान खान कार्टूनिस्ट जी एवं सभी को बधाई ...

    वंदना जी आज की चर्चा का प्रस्तुतिकरण बहुत अच्छा लगा, महत्वपूर्ण जानकारियों से भरा ...बहुत अच्छी चर्चा ...आभार

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  10. दीदी हमेशा की सुन्दर पस्तुति ,और हमेशा की तरह बिलकुल अलग सोच की परिचायक चर्चा |
    बहुत - बहुत आभार मेरी चर्चा को शमिल करने के लिए |

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  11. इस कार्यक्रम में हम सब श्रोता बन कर गए थे लेकिन फिर भी जितना समय मिला उसमें हमने हिन्दी ब्लॉग जगत को ऊपर उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी... उम्मीद है कि आगे भी हिन्दी ब्लॉग्गिंग नित नई ऊंचाइयों को छुएगी...
    बढ़िया लिंक्स से सुसज्जित सुन्दर चर्चा ...

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  12. @ राजेश जी ,

    गलती सुधार ली है…………कल कुछ चीजें सही करनी थीं मगर रह गयीं क्योंकि यहां नेट की प्रोब्लम हो रही थी अच्छा किया आपने इस ओर ध्यान दिलाया…………हार्दिक धन्यवाद्।

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  13. मेरी रचना आज चर्चा मंच पर शामिल करने के लिए आभार |आपने तो बहुत सी लिंक्स दी हैं इस हेतु बधाई |
    आशा

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  14. अरुणा जी, अविनाश वाचस्पति जी, राजीव तनेजा जी, शाहनवाज़ जी और इरफ़ान खान कार्टूनिस्ट जी एवं सभी को बधाई ...
    fir khud ke liye dhanybad aur itni achchi charcha ke liye....alag se dhanybad.

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  15. सुन्दर प्रस्तुतिकरण ,बढ़िया चर्चा!

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  16. आदरणीया वंदना जी ,
    अभिवादन |
    आपने मेरी पोस्ट को चर्चा मंच पर स्थान दिया ..बहुत-बहुत आभार |
    डा० अरुणा कपूर जी के बारे में विस्तृत जानकारी सुखद लगी |
    हास्य गोष्ठी में शामिल होनेवाले रचनाकारों को हार्दिक बधाई |
    सार्थक और सुन्दर चर्चा.......अच्छे लिंक्स के लिए साधुवाद |

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  17. अभी तो सिर्फ titles चखे हैं. साहित्य देख के मेरे मुंह में वैसे ही पानी आ जाता है जैसे छोटे बच्चों को कुल्फी देख के ! :-) पूरी चर्चा चबा चबा के खाऊँगी, दुपहरिया को.

    वंदना जी , यहाँ सब बड़े जानो के बीच में मुझ जैसे शिशु को स्थान दिया, इसके लिए जितना आभार प्रेषित करूँ, सब कम है. ह्रदय से आभार स्वीकारें . प्रणाम

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  18. अविनाश वाचस्पति जी, राजीव तनेजा जी, शाहनवाज़ जी और इरफ़ान खान कार्टूनिस्ट जी ..सभी को बधाई! तिलियार ब्लॉगर मेले में आप सभी से मिल कर बहुत खुशी हुई!
    ...धन्यवाद खुशदीपजी कि आप के जहन में हमारी याद ताजा है!
    ...आप की प्रस्तुति इतनी सुन्दर है वंदना कि लगा अपना ही नॉवल फिर एक बार पढूं!...वाकई चर्चामंच एक अनोखा स्थान है!....बधाई हो वंदना!...नॉवल की कुछ कॉपिया मेरे पास है,मै अपने ब्लॉगर मित्रों को सहर्ष भेट कर सकती हूं!..संपर्क मेरे मोबाइल नं, ०९८७३९६३५३५ पर भी कर सकतें है!

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  19. बहुत सुंदर चर्चा.

    रामारम.

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  20. बहुत रोचक चर्चा..सुन्दर लिंक्स..मेरी रचना को चर्चा में शामिल करने के लिये धन्यवाद..

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  21. अरुणा जी को बधाई..साथ ही अविनाश जी,राजीव जी और शाहनवाज जी को भी बधाई............आप सब यूँही ब्लागजगत को नये मुकाम दिलाते रहे.....
    वंदना जी आपने बहुत ही सुंदर जानकारी दी...और साथ ही बहुत ही सारगर्भिक चर्चा...लाजवाब।
    आपका लेख उदंती पर पढ़ा..बहुत अच्छा...बधाई औेर शुभकामनाएँ।

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  22. सुंदर चर्चा ! आभार !

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  23. Bloging ab apna makaam bana rahi hai.
    sabhi uplabdhi praapt blogaron ko badhai.
    atisundar charcha Vandna ji.

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  24. har rachna ko maine chaba chaba ke khaaya..
    ach mein vandna Ji, khoob maza aaya ! :)

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  25. अरुणा कपूर जी,अविनाश वाचस्पति जी, राजीव तनेजा जी, शाहनवाज़ जी और इरफ़ान खान कार्टूनिस्ट जी...KO BAHUT BAHUT BADHAI...
    VANDNA JI MERI POST LENE KE LIYE BAHUT BAHUT SUKRIYA...

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  26. सदा की भांति इस बार भी आपकी बगिया सुंदर फूलों से सजी है .सच कहूँ तो बहुत समय नहीं दे पाता हूँ ,लेकिन जितना पढ़ पाता हूँ उससे लगता है ब्लोगिंग का भविष्य काफी उज्जवल है.अंत में,मेरी रचना को चर्चामंच पर स्थान देने के लिए बहुत-बहुत आभार.

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  27. डॉ अरुणा कपूर जी से रोहतक के तिलयार में राज भाटिया जी के कार्यक्रम में मुलाकात हुई थी.

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  28. बहुत रोचक चर्चा..सुन्दर लिंक्स..शामिल करने का शुक्रिया !

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  29. आज की चर्चा भी लाजवाब रही....

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  30. वंदना दी
    हमेशा की तरह अलग सोच की परिचायक अलग प्रस्तुतियाँ |
    धन्यवाद
    मेरी रचना को अपनी चर्चा में स्थान देने के लिए |
    मार्ग दर्शन करती रहे|
    आभार |

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  31. आज की चर्चा बहुत ही शानदार है । आभार वन्दना जी !

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  32. bahut hi sundar charcha hai ,dr.aruna ji ke baare me achchhi jaankaari mili ,unki pustak ko paane ki chah badh gayi ,aapki baton se kafi aakarshak lagne lagi .aapki mehnat ko dil se sarahati hoon .badhai ,aabhari hoon .

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  33. आभारी हूँ नूतन जी ,मेरी कवितायेँ एवं ब्लॉग चर्चा-मंच पर लाये गए ...यात्रा है परतों के भीतर छुपे, चुप से कहीं बैठे सत्य को जानने,समझने की ...शायद कविता ही सहारा बने ...मानती हूँ कि जीवन उद्दाम जीवनी शक्ति और रस रंग से भरपूर जीना चाहिए ..इसलिए हर रस का समावेश ज़रूरी है ...आपका मंच प्रभावशाली है ..पाठक और लेखक दोनों के लिए ...ऐसे समावेश से ही रचनात्मकता प्रोत्साहित होती है ...

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  34. bahut sunder charcha
    aapka aabhar mujhe yaha samalit karne ke liye
    .. dhanyevad

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