Followers

Monday, April 23, 2012

चर्चामंच-858

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ का नमस्कार!
सोमवारीय चर्चामंच पर पेशे-ख़िदमत है आज की चर्चा का
 लिंक नं. 1- 
_______________
2-
_______________
3-
_______________
4-
My Photo
_______________
5-
मेरा फोटो
_______________
6-
_______________
7-
बचा लो धरती, मेरे राम! : रविकर की रसीली जलेबियाँ
My Photo
_______________
8-

कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
डॉ. दाराल और शेखर जी के बीच का संवाद बड़ा ही रोचक बन पड़ा है, अतः मुझे यही उचित लगा कि इस संवाद श्रंखला को भाग --तीन के रूप में " ज्यों की त्यों धरी दीन्हीं चदरिया " वाले अंदाज़ में प्रस्तुत  कर दू जिससे अन्य गुणी जन भी लाभान्वित हो सकेंगे|
मेरा फोटो
_______________
9-
_______________
10-
मेरा फोटो
_______________
11-
_______________
12-
My Photo
_______________
13-
"नदी के रेत पर" -डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
उच्चारण
_______________
14-
मेरा फोटो
_______________
15-
_______________
16-
_______________
17-
_______________
18-
_______________
19-

हैं सबसे मधुर वो गीत, जिन्हें हम दर्द के सुर में गाते हैं!
जब हद्द से गुज़र जाती है खुशी, आँसू भी छलकते आते हैं!!
My Photo
_______________
20-
_______________
21-
_______________
22-
_______________
23-
________________
24-
मेरा फोटो
________________
और अन्त में
25-
चार ग़ज़लें -नरहरि अमरोहवी
अपनी रचनाओं का संग्रह छाप के ऐसा लगा|<br>खुद खरीदी फूल माला, खुद गले में डाल दी||
________________
आज के लिए इतना ही, फिर मिलने तक नमस्कार!

28 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति!
    आभार!

    ReplyDelete
  2. आभार गाफिल जी |
    बहुत बढ़िया चर्चा ||

    ReplyDelete
  3. दिन भर के लिए पढ़ने को काफी कुछ मिल गया आज की चर्चा में।
    आभार...!

    ReplyDelete
  4. अच्छे लिनक्स. अभी तो केवल देखा भर है एक नजर. बिना देखे शांति नहीं मिलती. अब तो लगत है जीने के लिए ऊर्जा यहीं से मिलती है, बाद में आराम से बैठ कर पडूंगा चाय के साथ. मेरी रचना को सम्मिलित करने हेतु आभार. चिंतकों समीक्षकों को प्यार भरा नमस्कार.

    ReplyDelete
  5. बहुआयामी लिंक्स से सजा है आज का चर्चा मंच |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

    ReplyDelete
  6. चर्चा का यह अंदाज निराला है ..... बेहतर.....!

    ReplyDelete
  7. मुजरिम का उन्नयन करा डाला
    शब्दों की जुगलबंदी का उजाला
    रविकर की रसीली जलेबियों से
    सुबह का नाश्ता करा डाला
    गाफिल तूने गजब कर डाला
    दिन भर का दे कर हमे
    मिर्च मसालेदार चटपटा मसाला ।

    ReplyDelete
  8. बहुत कुछ सिखाती है गंगा
    सीखने वाला चाहिए.

    ब्लॉगर्स मीट वीकली 40 में आपका स्वागत है.

    अच्छे फ़ोटो अच्छी पोस्ट.

    ReplyDelete
  9. सामयिक प्रस्तुतियों से सजा सुंदर चर्चामंच।
    आभार, आपके प्रति।

    ReplyDelete
  10. सुन्दर मनभावन चर्चा ,विभिन्न आयामों को समेटे ....शुभकामनायें मिश्र जी ....

    ReplyDelete
  11. गाफिल जी
    आपके जो पोस्ट शामिल की है उनका अध्यन भी किया है?
    जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी

    में लेखक ने लिखा है की '' ''जाति के लोग “उर्मिला” कह कर संबोधित करते थे। आशय था भरत एवं उर्मिला का प्रसंग। लोगों का अपना अभिमत था कि उर्मिला भरत जी का घर के चौखट पर फूल और दिया लेकर चौदह वर्ष तक इंतजार करती रहीं लेकिन इन लोगों ने तो चौदह वर्ष से भी अधिक इंतजार किया।'' मैने लेखक को कल ही इस विषय में आगाह किया ,पर मूल पोस्ट में सुधार नहीं किया,वह टिप्पणियों के उत्तर में इसे स्वीकार करते मुझे पांडित्व बघारना बताते है,फिर मूल पस्त में सुधार क्यूँ नहीं ?इस पर . मनोज कुमार जी का कहना है '' एक भाई जी जगह-जगह जाकर आपकी दुष्प्रचार कर रहे हैं।'' सच कहना इतना बुरा है,फिर इन टिप्पणियों का क्या माईने है.

    आखं मूद कर मै तारीफ तेरी हूँ करता

    मेरी भी तारीफ यहाँ पर करना भ्राता

    अल्मारी में सजाकर जो दीवान रखा है,
    उसके हर सफे पर उनका ही नाम लिखा है!

    कृपया इस शेर का अर्थ समझायेगे ,बहुत माथा पच्ची के बाद भी नहीं समझ सका

    ReplyDelete
  12. संक्षिप्त लेकिन सुन्दर सार्थक चर्चा .कोर्णाक सम्पुर्ण चिकित्सा तंत्र पर गुफ्त- गु को आगे बढाने का मौक़ा आपने दिया ,आभार .

    ReplyDelete
  13. सुसज्जित एवं सुव्यवस्थित चर्चा ! आभार आपका !

    ReplyDelete
  14. बहुत बढियां चर्चा गाफिल जी!....आभार!

    ReplyDelete
  15. आपकी चर्चा में शामिल होकर अच्छा लगा…………आभार गाफ़िल जी।

    ReplyDelete
  16. सुन्दर लिंक्स से सजी रोचक चर्चा...

    ReplyDelete
  17. bahut bahut hardi aabhar gafil ji meri rachna jai hind vandemataram ko charcha manch me shamil karne ke liye tahe dil se shukriya.

    ReplyDelete
  18. बहुत अच्छी चर्चा मिली--------------धन्यवाद

    ReplyDelete
  19. वाह !!!!!! बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर लिंक्स,....आभार गाफिल जी

    ReplyDelete
  20. बहुत बढ़िया सचित्र लिंक्स प्रस्तुति के साथ सार्थक चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार

    ReplyDelete
  21. विजय जी,,,आप अभी और माथापच्ची करे,शायद "ये दिल की बाते" आपके समझ में आ जाये,

    ReplyDelete
  22. गाफ़िल साहब, बहुत मेहनत करते हैं आप मंच को सजाने में।

    ReplyDelete
  23. आपक चर्चा मंच पर अपना पोस्ट एवं फोटो देख कर काफी खुशी होती है एवं मनोबल भी बढ़ता है । आपका यह प्रयास प्रशंसनीय है । धन्यवाद ।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"स्मृति उपवन का अभिमत" (चर्चा अंक-2814)

मित्रों! सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...