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Tuesday, February 12, 2013

मंगलवारीय चर्चा 1153 --क्या मैं स्वतंत्र हूँ?

आज की मंगलवारीय  चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते , ,आप सब का दिन मंगल मय हो अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लॉग्स पर 





















 आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ  फिर चर्चामंच पर हाजिर होऊँगी  कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय ||

"मयंक का कोना"


प्राण प्रणय के पंथ पर पुलकित करे प्रयाण !

♥ सादर ♥
"स्वर्णकार के ब्लॉग पर, पुलकिुत है मधुमास।
प्राण प्रणय के पंथ पर, होना नहीं उदास।।"


बड़ा सवाल : क्या मूर्ख हैं रेलमंत्री ?

♥ सादर ♥
"ज्यादातर तो मूर्ख ही, बनते यहाँ वजीर।
पंक सरोवर में भरा, नहीं अमल है नीर।।"

36 comments:

  1. पठनीय सुंदर लिंक संयोजन ,,,,

    RECENT POST... नवगीत,

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  2. हृदय से आभार राजेश जी ....
    इतनी सुंदर चर्चा और बढ़िया लिंक्स के बीच अपनी रचना देख बसंती सुबह खिल गई ...!!
    बहुत बहुत आभार ...!!
    सादर शुभकामनायें !!

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  3. अच्छे चुनिन्दा लिंकों से सजी खूबसूरत चर्चा !!

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  4. प्रभावी चर्चा -

    शुभकामनायें ।।

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  5. bahut sundar ... jaandaar-shaandaar ...

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  6. राजेश कुमारी जी नमस्कार आज की मंगलवारीय चर्चा में आप ने बहुत अच्छे लिंक दिए हैं आपका बहुत बहुत आभार जिन लिंकों तक हम नहीं पहुँच पते हैं उन लिंकों को आप चर्चा मंच के माध्यम से हम तक पहुंचा देती हैं इस मंच पर मेरे ब्लॉग से भी बहुत बार लिंक दिया गया है
    बस एक ये ही बात कहना चाहता की चर्चा मंच मैं जितने भी लिंक किये जाते हैं वो सब लग-भग बड़े ब्लोगरो के ही ब्लॉग से होते हैं
    ये बड़े बड़े ब्लोगरो के लिंकों से चर्चा मंच सजता है
    मुझे इन से कोई शिकायत या ईष्या नहीं है पर क्या जो छोटे ब्लागर हैं उन तक शायद आप बहुत कम जाते हैं पर क्यूँ ?
    मुझे इस बात का इल्म है
    ये भी सम्भव नहीं की हर छोटे या बड़े ब्लागर के ब्लॉग पर पहुँचना सम्भव है पर छोटे और नये ब्लोगर को चर्चा मंच मिल जाये तो वो परोत्साहित तो होंगे ही कम से कम नए ब्लोगरों को कम से कम 5-6 लिंक तो दिए ही जाने चाहिए
    दिनेश पारीक
    मेरी नई रचना
    ऐ तू वफ़ा रुसवा नहीं करना

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    1. दिनेश प्रतीक् जी आपकी प्रतिक्रिया पढ़ी बहुत अच्छा लगा हम तो चाहते हैं कि लोग चर्चा मंच के विषय में अपनी प्रतिक्रिया दें सबसे पहले मैं आपके दिल का वो खयाल दूर् करना चाहूँगी कि चर्चा मंच में नए ब्लॉगर के लिंक ही लिए जाते हैं हम तो नए ब्लोग्रो को ढूंढते रहते हैं होता क्या है जिस वक्त चर्चा लिखते हैं उस दिन सेपहले जो एग्रीगेटर पर न्यु लिंक चमकता है वो हम ले लेते हैं ,आपका सुझाव सही है मेल से भी लिंक दे सकते हैं आज मैंने आपको फॉलो कर लिया अब आपकी रचना मेरे एग्रीगेटर पर आएगी सोमवार को यदि आपनेकोई न्यु रचना लिखी होगी तो जरूर शामिल करूँगी आज भी आपकी रचना को शामिल कर रही हूँ|

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    2. राजेश कुमारी जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद
      राजेश कुमारी जी बात मेरे लिंक की नहीं है आप मेरे तक ही सिमित तो मत रहिये आप की बातो से ऐसा लगा की अप ने मेरी कोई पोस्ट लिंक नहीं की पर ये तो मैं पहले ही साफ कह चूका हूँ की बात मेरे पोस्ट के लिंक की नहीं हैं चर्चा मंच की पोस्ट मैं हर रोज़ देखता हूँ और देखने के बाद ही मेने असा कहा की जितने भी लिंक किये जताए है वो नये ब्लोगरो के बहुत ही कम होते हैं अगर नये ब्लोगरो के लिंक होते भी हैं कभी कभार तो वो अपवाद मैं ही होते हैं

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    3. दिनेश पारीक जी, हम चर्चा मंच सजाने के लिए अपने डेशबोर्ड का प्रयोग करते हैं, जिसमे उन लोगों के ब्लॉग होते हैं जिन्हे हम फॉलो कर रहे होते हैं | इसके अलावा हम कई ब्लॉग एग्रीगेटर में जाकर अच्छे पोस्ट का लिंक ढूंढते हैं | इस दौरान हमे नए पुराने जो भी ब्लॉग मिलते हैं हम शामिल करने की कोशिश करते हैं |हमारी कोशिश हमेशा से ये रहती है की मंजे हुए ब्लॉगर के उम्दा पोस्ट के साथ साथ हम नए ब्लॉगर को व आप सब तक पहुंचा सके |
      अगर आपके पास ऐसे ब्लॉग या ब्लॉगर हैं जिन तक हम नहीं पहुंच पा रहे हैं तो कृपया नीचे दिये गए ब्लॉग एग्रीगेटर में कमेंट के रूप मे उसका लिं दें ताकि हम नियमित रूप से उनके पोस्ट को शामिल कर सकें | आभार |
      ब्लॉग"दीप"

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  7. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ... पठनीय सूत्र

    आभार

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    1. shukriya rajeshkumari ji , hamen bhi yahan shamil karne ke liye bahut acchi prastuti hai , badhai aapko

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  8. सभी लिंक्स एक से बढ़कर एक..
    मुझे भी आखिरी समय में स्थान मिल ही गया।

    आद. शास्त्री जी, राजेश कुमारी मेम आपका बहुत बहुत आभार

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  9. मैं अपवाद हूँ शायद :) ,
    चर्चा मंच पर मेरे जैसे छोटे ब्लोगर को जगह देने का शुक्रिया |

    सादर

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  10. राजेश कुमारी जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद
    राजेश कुमारी जी आप ने तो मुझ पर साफ - साफ दोष मड दिया की मेरी पोस्ट लिंक नहीं हवी तो मैं नाराज हूँ
    पर मैंने तो बात कुछ और ही कही है

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  11. दिनेश जी खेद है आप मेरा उत्तर ठीक से समझ नही पाये वरना ये ना कहते मैंने पहले ही लिखा है कि न्यु ब्लॉगर को एक तो एग्रिगेतर में आना चाहिए दूसरे जब हम चर्चा लिख रहे हों उस वक्त उनकी लेटेस्ट पोस्ट आनी चाहिए इसमे आपके ऊपर दोष मढ़ने कि बात कहाँ से आ गई क्या मुझे आपकी पोस्ट जब मुझे आपका लिंक मिला है पोस्ट नही करनी चाहिए थी कितने ब्लॉगर मेल भी करके लिंक दे देते हैं उसे मैं बाद में भी पोस्ट कर देती हूँ क्या ग़लत है

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    1. ये उपर्युक्त उत्तर दिनेश पारिक जी के लिए है

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    2. हाँ राजेस्ग कुमारी जी
      पर वो तो सम्भव तभी होगा न जब चर्चा मंच के लेखक उन लेखको को फोलो करेंगे वरना आप सब को कैसे पता चलेगा की किस - किस ने नई रचना पोस्ट की है

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    3. बेटे जी ये सब मुझे पता है इसी लिए आज 300 लोग मेरे एग्रीगेटर पर हैं और मेरे कुल 140 फोलोवर अब आप क्या कहेंगे ,मेरे ब्लॉग पर जो भी कोई न्यु टिप्पणी करता है उसे मैं तुरंत फॉलो कर अपने एग्रीगेटर में ले लेती हूँ उम्मीद करती हूँ कि आप समझ गए होंगे आगे कोई वार्तालाप नही चाहती

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  12. सुन्दर लिंक संयोजन

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  13. राजेश जी, विविधताओं से भरे सुंदर लिंक... और मुझे शामिल करने के लिए आभार !

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  14. लिंक्स चुन चुनकर ... मैं हूँ तो मुस्कान लम्बी है चेहरे पर

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  15. बान हारे की बान न जाए ,

    कुत्ता मूते टांग उठाय .

    पुरानी आदत है कोंग्रेसियों की अपनी शेव बनाके साबुन दूसरे के मुंह पे फैंकना .आपका विश्लेषण सटीक था .बहरसूरत मेला स्थल से भी लोगों को लताड़ा गया था .स्टेशन पे आने न दिया गया इस

    घटना के बाद .राटा कटी फुटपाथों पे .ऐसे रेल मंत्रियों को काशी करवट दिलवानी चाहिए .

    बड़ा सवाल : क्या मूर्ख हैं रेलमंत्री ?

    ♥ सादर ♥
    "ज्यादातर तो मूर्ख ही, बनते यहाँ वजीर।
    पंक सरोवर में भरा, नहीं अमल है नीर।।"

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  16. बहुत सुन्दर और उपयोगी चर्चा!
    --
    यहाँ यह भी स्पष्ट कर देना चाहत हूँ कि हमारे चर्चाकार अपनी पसंद के लिंक ही लगाते हैं!

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    1. शास्त्री जी हार्दिक आभार

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  17. बदलाव के इस दौर में उबलते प्रश्नों का ज़वाब मांगती है यह रचना जिसमें छटपटाहट और बे -चैनी तो है विद्रोह नहीं एक रास्ता चाहिए कारा तोड़ बाहर निकलने का .मस्त गगन में उड़ने का -पंछी

    बनूँ

    उड़ती फिरूं मस्त गगन में ..........चर्चा मंच में हमारी रचना को शरीक करने के लिए आभार आप

    सचमुच रचना में आपने -

    सामाजिक मकड़ जाल ,उड़न डोले में झूलती परम्परा गत औरत की छवि मार्मिक ढंग से उकेरी है आपने .

    क्या मैं स्वतंत्र हूँ?
    Rajesh Kumari at HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR -

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  18. ये दिनेश भाई बड़ा -छोटा ,अगड़ा- पिछड़ा ब्लॉग क्या होता है ?

    आपकी लिखी पोस्ट पर बारहा प्रतिक्रिया की है आप एक भी मर्तबा राम राम भाई पे आये हों तो बतलाएं .आपकी बात तथ्यों से परे है .आपकी

    वर्तनी की अशुद्धियाँ भी बारहा शुद्ध की हैं जाओ जाके देखो फिर ये राजनीति क धंधेबाजों सी बात करना .अपुन दो टूक बोलता है बिंदास .

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    1. वीरेंद्र कुमार शर्मा जी हार्दिक आभार

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  19. ऐ तू वफ़ा रुसवा नहीं करना
    सुनो ऐसा नहीं करना
    मैं पहले ही बहुत अकेला हूँ
    मुझे और तन्हा नहीं करना
    लोग कहते हैं हाथो की ........हाथों .....
    लकीरे अधूरी होती हैं
    पर तुम उस पर अमल मत करना
    जुदाई भी अगर आये
    दिल छोटा नहीं करना
    बहु मश्रुफ हो जाना।।।।।।बहुत मसरूफ हो जाना .......
    मुझे सोचा नहीं करना
    भरोसा भी जरुरी है
    मगर सबका नहीं करना
    मुकद्दर फिर मुकद्दर है
    कभी दावा नहीं करना
    जो लिखा है जरुर होगा
    कभी शिकवा नहीं करना
    मेरी गुजारिश तुमसे है
    मुझे आधा नहीं करना
    हकीकत है मिलन अपना
    इसे सपना नहीं करना
    हमे (हमें )तुम याद रहते हो
    हमे(हमें ) भूला नहीं करना

    बहुत खूब लिखा है ऊंचे पाए की रचना दिनेश भाई .सब ब्लोगर भाई सब ब्लॉग बराबर हैं यहाँ कोई छोटा बड़ा नहीं हैं अलबत्ता उम्र में अपने से छोटों का ख्याल रखना हमारा फर्ज़ ज़रूर है .
    (हमें ,मसरूफ ,हाथों )
    ये मेरी वफ़ा
    DINESH PAREEK at मेरा मन

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  20. विभिन्न प्रकार के पोस्ट रूपी पुष्पों से सजा सुंदर गुलदस्ता |

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  21. sunder rachnaon mein meri sadharan se rachna ko maan dene ke liye dhanyawad

    shubhkamnayen

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  22. बहुत सुन्दर चर्चामंच सजाया है राजेश जी ! कई सार्थक लिंक्स मिले आज ! साभार !

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  23. बहुत अच्छी प्रस्तुति. मुझे यहाँ शामिल करने के लिए धन्यवाद.

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"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

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