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Monday, February 18, 2013

सोमवारीय चर्चा: चर्चामंच-1159

दोस्तों ग़ाफ़िल का आदाब क़ुबूल फ़रमाएं!
पेशेख़िदमत है सोमवारीय चर्चा के लिए कुछ लिंक-
‘मयंक’ कोना

और अन्त में कार्टून
आज अब बस! फिर मिलने तक नमस्कार!

34 comments:

  1. nice links to look & thanx sir 4 sharing my blog post

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  2. गाफिल जी, गागर में सागर भरने वाली आपकी यह चर्चा पसंद आई। आभार, इन शानदार लिंक्‍स के लिए।

    .............
    एक सदी शोषण की जी ली...

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  3. संक्षिप्त मगर सारगर्भित चर्चा!
    आभार ग़ाफ़िल जी!

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  4. आप सभी को सुप्रभात

    आज का दिन आपके लिए नये जोश लेकर आयेँ

    एक सुविचार ..

    हर पहलुऔँ के दो पक्ष होते हैँ आपकी सोच तय करती हैँ आपको क्या नकारात्मक लगा , आप उक्त पहलुऐँ सेँ निकलकर देखियेँ तो , सच्चाई मिल जायेँगी । जिद करने से नकारात्मक भाव की वृद्धी आपके विचारोँ भावनाओँ को अपने अंदर समाहित करती चली जायेँगी और आपके उस पहलुँयेँ का कभी दुसरेँ पक्ष पर नजर नही डाल पायेँगे ।
    अर्थात अपने सकारात्म सोच को बढाईयेँ आपके व्यक्तिव के विकाश मेँ सहायक होगी ।

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  5. ‘ग़ाफ़िल’ जी कार्टून को भी चर्चा में सम्मिलित करने के लिए आभार

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  6. हृदय से आभार गाफिल जी मेरी रचना को आज यहाँ स्थान दिया ......!!
    अन्य लिंक्स भी बढ़िया ।बहुत अच्छी चर्चा ......!!

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  7. आज समर्थक हो गए, पूरे एक हजार |
    चर्चाकारों कीजिये, हम सबका आभार |

    हम सबका आभार, हजारी का यह गौरव |
    हाजिर होकर रोज, करें चर्चा कर कलरव |

    रविकर गाफिल रूप, अरुण दिलबाग परिश्रम |
    राजे' दीप प्रदीप, वन्दना करते हैं हम ||

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  8. इमोशनल ब्लैकमेलिंग -कमल कुमार सिंह ‘नारद’

    गोली खाय जुलाब की, करता मोशन लूज ।

    चिंता खाए देश की, बनी हॉट यह न्यूज ।

    बनी हॉट यह न्यूज, फ्यूज कितने कर देता।

    पर अन्ना का यूज, नहीं कर पाता नेता ।

    कहाँ करोडो रोज, आज दस दस की बोली ।

    होता जाए सोझ, मार सत्ता को गोली ।।

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  9. तीन पीढ़ी का बचपन : कौन सही कौन गलत?
    smt. Ajit Gupta
    अजित गुप्‍ता का कोना
    पानी बिजली आ गई, बढ़ी जरुरत मूल |
    इक-जुटता परिवार की, अब भी रहा उसूल |
    अब भी रहा उसूल, अभी तक बिजली रानी |
    रही जरुरत मूल, विलासी नहीं निशानी |
    सरकारी इस्कूल, पढो घूमो मनमानी |
    मरा नहीं अब तलक, मित्र आँखों का पानी ||

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  10. कल हारे का पूत या, *कलहारी का पूत |
    भिगो भिगो के भूनता, खा जाता साबूत |
    खा जाता साबूत, कल्हारे नमक मिर्च दे |
    सबसे बड़ा कपूत, अकेले स्वयं सिर्ज ले |
    दी-फेमिली महान, बड़े चॉपर हैं प्यारे |
    मामा का एहसान, तभी तो हम कल हारे ||
    *झगडालू

    कार्टून :- हैलीकॉप्‍टर आया
    (काजल कुमार Kajal Kumar)
    Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून


    तोपा तोपें तोपची, हेलीकाप्टर तोप |
    जैसे वह गायब हुआ, वैसे इसका लोप |
    वैसे इसका लोप, जाँच पर मामा बोला |
    दाबे दस्तावेज, फेमिली जान टटोला |
    जिन्दा है इंसान, भेंट कर इन्हें सरोपा |
    इटली के मेहमान, केस को फिर से तोपा ||

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  11. भानमती की बात - राष्ट्रीय गाली .
    प्रतिभा सक्सेना
    लालित्यम्
    गा ली अपनी भानमति, अपनी मति अनुसार |
    गाली देकर पुरुष पर, करता पुरुष प्रहार |

    करता पुरुष प्रहार, अगर माँ बहन करे है |
    नहीं पुरुष जग माहिं, कहाँ चुप सहन करे हैं |

    मारे या मर जाय, जिंदगी क्या है साली |
    इज्जत पर कुर्बान, दूसरा पहलू गाली ||

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  12. कैसी उदासी

    Asha Saxena
    Akanksha -

    मनचाहे व्यवहार की, कर दूजे से आस |
    लेकिन हो निश्चिन्त मत, व्यर्थ पूर्ण विश्वास |
    व्यर्थ पूर्ण विश्वास, ख़ास लोगों से चौकस |
    होगा जब एहसास, दुखी हो जाए बरबस |
    पग पग पर हुशियार, गली ऑफिस चौराहे |
    दे जाते वे दर्द, जिन्हें अपना मन चाहे ||

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  13. तुम हार गए बसंत!

    -बब्बन पाण्डेय

    वेलेंटाइन को सभी, करते आज प्रोमोट |
    रति-अनंग की रुत नई, देह खोट के पोट |
    देह खोट के पोट, मोट बाजारू-पन है |
    यह बसंत अब छोट, घोटता अपना मन है |
    कोयल लेती कूक, मंजरी भी है फाइन |
    लेकिन भरी पड़े, मित्र यह वेलेंटाइन ||

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  14. अच्छे लिंक्स | मेरा लिंक शामिल करने के लिए धन्यवाद् | प्रणाम |

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  15. दस्ताने -दर्द -मीनाक्षी पंत

    मार्मिक-

    शुभकामनायें आदरेया ।।

    ताने हों या इल्तिजा, नहीं पड़ रहा फर्क ।

    पत्थर के दिल हो चुके, सह जाता सब जर्क ।

    सह जाता सब जर्क, नर्क बन गई जिंदगी ।

    सुनते नहिं भगवान्, व्यर्थ में करे बंदगी ।

    सत्ता आँखे मूंद, बनाती रही बहाने ।

    चूस रक्त की बूंद, मार के मारे ताने ।।

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  16. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  17. बेहतरीन लिंकों से सजी है आज की सारगर्भित चर्चा,आभार.

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  18. saarthak charchaa,ravikar ji kee baat se sahmat hoon

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  19. सागार्भित और सार्थक चर्चा |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  20. आदरणीय ‘ग़ाफ़िल’ सर प्रणाम संक्षिप्त परन्तु शानदार प्रस्तुति मेरी रचना को स्थान दिया ह्रदय से आभारी हूँ. हार्दिक बधाई स्वीकारें इस शानदार प्रस्तुति पर सादर

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  21. बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  22. अच्छा लगा इन लिंक्स को पढ़कर !
    शास्त्री सर का कोना रखकर बहुत अच्छा किया !
    ~सादर!!!

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  23. चर्चा काफी सुन्दर रही। अरुण को चर्चा मंच के नए चर्चा कार के रूप में जुड़ने के लिए बधाई। और दुःख इस बात का है की एक बेहतरीन चर्चा कार रूप चंद शास्त्री जी ने चर्चा स्थान छोड़ दिया।

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  24. सार्थक पठनीय सूत्रों से सुसज्जित चर्चा हेतु बधाई गाफिल जी

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  25. सुन्दर प्रस्तुति .

    मत करो खुद को निर्वस्त्र -दिव्या श्रीवास्तव ZEAL

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  26. वाह बसंत के तमाम रंग श्री मति जी में देखते हैं आप .कहाँ गईं वह रूपसियाँ और शब्द चित्र .बढ़िया प्रस्तुति है शहरी पर्यावरण के गंधाने की लेकिन वह रूपसी गईं कहां
    तमाम की तमाम कविता को शब्द देती हुई सी .

    तुम हार गए बसंत! -बब्बन पाण्डेय

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  27. शानदार अभिव्यक्ति .

    भोगवाद अब जीतता, रीते रीति-रिवाज ।
    विज्ञापन से जी रहे, लुटे हर जगह लाज ।

    राजनैतिक कुण्डलियाँ -‘रविकर’

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  28. बेजा बदगुमानी किसलिए?
    कोकिलों के मध्य कौए की बयानी किसलिए?
    शर्म कर! ख़ामोश रह बे! लन्तरानी किसलिए?
    है सदी इक्कीसवीं किस दौर में तू जी रहा?
    क़ायदन ग़ाफ़िल है बेजा बदगुमानी किसलिए?

    हाँ नहीं तो!बहुत खूब ( प्रस्तुति ).वाह !

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  29. मेरे गीत को सुनिए-
    अर्चना चावजी के मधुर स्वर में!



    सुख के बादल कभी न बरसे,
    दुख-सन्ताप बहुत झेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    अनजाने से अपने लगते,
    बेगाने से सपने लगते,
    जिनको पाक-साफ समझा था,
    उनके ही अन्तस् मैले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    बन्धक आजादी खादी में,
    संसद शामिल बर्बादी में,
    बलिदानों की बलिवेदी पर,
    लगते कहीं नही मेले हैं!
    जीवन की आपाधापी में,
    झंझावात बहुत फैले हैं!!

    ज्ञानी है मूरख से हारा,
    दूषित है गंगा की धारा,
    टिम-टिम करते गुरू गगन में,


    बहुत खूब . !बहुत सुन्दर रूपकात्मक गीत

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  30. आपकी टिपण्णी हमें प्रासंगिक बनाए रहती है ,ऊर्जित करती है .शुक्रिया आपका तहे दिल से .चर्चा मंच में हमें बिठाके आप हमारा मान बढाते हैं शुक्रिया .

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  31. सुंदर और सार्थक संयोजन के लिये
    बधाई
    सभी रचनाकारों को शुभकामनायें

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