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Tuesday, May 21, 2013

मंगलवारीय चर्चा---(1251)--- पत्ते, आँगन, तुलसी माँ ..

आज की मंगलवारीय  चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्तेआप सब का दिन मंगल मय हो अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लॉग्स पर ----------------------

                                      क्या है ताऊ का अस्तित्व और हकीकत?


                                   श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (५१वीं कड़ी)


                                                         काश!!


                                                        कुण्डलिया छंद -


                                                           प्रेम ही है ईश्वर


                                   चेहरे पर चेहरा -सुश्री पुनीता सिंह की कहानी


                 मुस्लिम समाज की देश के प्रति निष्ठा पर संदेह क्या सही है !!


                                                          सपने और अपने..


                                              चंदरशेखर को श्रद्दांजलि


                                                    कितना नीरस होता


                                              पत्ते, आँगन, तुलसी माँ ..

.

                               "गर्मी में खरबूजे खाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

rcmelon

                                               यूँ ही कभी-कभी सोचती हूँ

 Rajesh Kumari at HINDI    KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR - 


                              अब "मिस्टर क्लीन" तो नहीं रहे मनमोहन !


                      बस यही कल्पना हर पुरुष मन की .


                लघु कथा ....नारी तुम केवल श्रृद्धा हो ... डा श्याम गुप्त ...


                                                 किताबों की दुनिया - 82


Karanparyag-Nandprayag-Chamoli-Gopeshwar कर्णप्रयाग-नन्दप्रयाग-चमोली-गोपेश्वर



                                  "जबकि मैं मौन हूँ"

आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ दोस्तों दो हफ्ते के लिए मुंबई जा रही हूँ आकर  फिर चर्चामंच पर हाजिर होऊँगी  कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय ||
आगे देखिए... "मयंक का कोना"
(1)
मैच फिक्सिंग: सरकार इस्तिफा दे!
इतना बड़ा खुलासा. लाखों करोड़ों रुपयों का लेन देन और साथ में सेक्स स्कैंडल.
protests




हिसाब-ए-गम का पर किस्सा, बयां मुझसे नहीं होगा.



-यादों के आंगन में उगी, क्यूँ काई नजर आती है मुझे!
(2)
स्पंदन  SPANDAN

एक ज्योतिषी ने एक बार कहा था
उसे वह मिलेगा सब
जो भी वह चाहेगी दिल से
उसने मांगा
पिता की सेहत,
पति की तरक्की,
बेटे की नौकरी,
बेटी का ब्याह,
एक अदद छत.
अब उसी छत पर अकेली खड़ी
सोचती है वो
क्या मिला उसे ?
ये पंडित भी कितना झूठ बोलते हैं...
(3)



30 comments:

  1. शुभ प्रभात
    शुरुआत अच्छी लगी
    दीदी अच्छे लिंक्स दिये आपने इस बार भी
    ओबीओ से निवेदन मेरा भी..
    रचनाकार...
    पाठको के बना अधूरा है
    यदि पाठक और श्रोता ही न हों
    तो रचनाकार किसके लिये लिखें
    सच कहें तो..
    जिन्दा हैं रचनाकार..
    पाठकों और श्रोताओं की बदौलत
    मेरी ये प्रतिक्रिया विषय से हटकर है
    वो भी ओबीओ से किया गया निवेदन को पढ़कर
    ये कलम आप ही चल पड़ी
    क्षमा......
    सादर

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  2. पठनीय और उपयोगी लिंकों से सजी सुन्दर चर्चा !!
    सादर आभार !!

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  3. बहुत ही बेहतरीन लिंकों के साथ सुन्दर प्रस्तुति,सादर आभार आदरेया.

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  4. सुन्दर चित्रावली से मुखरित रंगीन चर्चा.मुझे भी सम्मिलित करने हेतु आभार.

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  5. दीदी शुभम
    बहुत सुंदर लिंक संजोजन
    आपकी यात्रा मंगलमय हो
    गुरु जी को प्रणाम

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  6. बहुत ही सुन्दर लिंक्स संजोये हैं।

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  7. बहुत ही सुन्दर हलचल ... कई नए लिंक इल गए आज ...
    आभार मुझे भी शामिल करने का ...

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  8. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...आभार ..

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  9. :) लिंक्स पसंद आए...

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  10. सुन्दर लिंक्स संयोजन...रोचक चर्चा...आभार

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  11. bahut badiya
    idhar bhi padhare

    inditech4u.blogspot.in

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  12. www.hinditech4u.blogspot.in

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  13. बढ़िया संयोजन आज के चर्चा मंच का |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  14. sarthak links sanjoye hain aapne .aabhar

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  15. बहुत ही सुन्दर रंग बिरंगी चर्चा सजी है हार्दिक आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी

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  16. सुव्यवस्थित चर्चा ..आभार .

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  17. राजेश जी, सुंदर रंगों से सजी चर्चा..बहुत बहुत आभार !

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  18. धन्यवाद राजेश जी, सुन्दर -संयोजन....
    ....ये पंडित भी कितना झूठ बोलते हैं बयां मुझसे नहीं होगा जुबां लडखडाये है ..फिर ख्यालों में कल्पना के फूल आये...कल्पना हर मन की हो कि नारी तुम केवल श्रृद्धा हो अतः नीरस न हो आँगन की तुलसी एवं सपने में भी कोई चेहरे पे चेहरा न चढ़ाए..मनमोहनजी बहुत गर्मी बढ़ रही है खरबूजे खाओ....ताऊजी प्रेम ही ईश्वर है प्रेम से बंदेमातरम गाओ |

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  19. पठनीय और उपयोगी लिंक .....सुन्दर चर्चा !!

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  20. दिशानिर्देशक सार्थक भावानुवाद सरल सहज पदावली में .
    श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (५१वीं कड़ी)

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  21. वाह !हरियाणा प्रदेश का नाम रोशन किया ताऊ रामपुरिया ने .भाईजान का ताउजान में बेहतरीन रूपांतरण !
    ॐ शान्ति

    क्या है ताऊ का अस्तित्व और हकीकत?

    जो भी हो तुम खुदा की कसम लाज़वाब हो .......

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  22. आज तो चकाचक चर्चा लगायी है, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  23. आखिर क्यूँ कर कोई उन्हें कहे अपना
    जो देते हैं यह बहाना अपनी दूरी का कि
    तुम्हारे करीब लोगों का जमघट बहुत है
    अपना तो वो हो जो मिले जमघट में भी
    अपनों की तरह, पूरे अधिकार से


    बहुत खूब !गर्म जोशी ही रिश्तों की जान है ,शान है और आन है .

    जमाव रिश्तों का

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  24. बेहतरीन रचना शराब के दुखद सामाजिक पक्ष पर .


    ग़ज़ल : कदम डगमगाए जुबां लडखडाये

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  25. राजेशकुमारी जी ,चर्चा बढ़िया सजाई ,सबके मन भाई ,अपनी भी रचना यहाँ पाई ,हर्षित मन, काया भी हर्षाई ,आपको बधाई !

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  26. बहुत ही सुन्दर और रोचक सूत्र।

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  27. आप सभी का हार्दिक आभार मंच पर पधारकर उत्साह वर्धन करने पर शुभकामनाएं

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  28. बहुत सुन्दर और उपयोगी लिंक मिले आज की चर्चा में!
    --
    बहन राजेश कुमारी जी आपकी मुम्बई की यात्रा मंगलमय हो!
    --
    आगामी दो मंगलवार को चर्चा मैं लगा दूँगा।
    --
    आभार!

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  29. सुंदर अंक ,आप मुंबई आ रही हैं,हमारा सौभाग्य ....आपसे मिलने का बड़ा मन है .कैसे, कहाँ मिला जा सकता है?

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