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Tuesday, February 23, 2016

डंडे पर झंडे फहर, लहर लहर लहराय; चर्चा मंच 2261



रविकर 

डंडे पर झंडे फहर, लहर लहर लहराय |
देशद्रोहियों पे कहर, पर उनको ना भाय |

पर उनको ना भाय, ब्लैक आउट कर देता |
पप्पू भाय अघाय, आप अब्बा से नेता |

रविकर रहा उबाल, खोज अफजल के अंडे |
खाए नमक लगाय, गिने फिर जाके डंडे ||


रविकर गिरगिट एक से, रहे बदलते रंग

रविकर गिरगिट एक से, रहे बदलते रंग |

खिले गुलाबी ख़ुशी मन, हो सफ़ेद जब दंग |
हो सफ़ेद जब दंग, रचे रचना गड़बड़ सी |

झड़े हरेरी सकल, होय गर बहसा-बहसी |
बदन क्रोध से लाल, हुआ पीला तन डरकर |

है बदरंगी हाल, कृष्ण-काला मन रविकर ||

सुशील कुमार जोशी 



Tushar Rastogi 



सरिता भाटिया 



प्रवीण पाण्डेय a



Pankaj Kumar Sah 



noreply@blogger.com (सतीश पंचम) 



chandan bhati 



Shanti Garg 



रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 



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