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Tuesday, August 02, 2016

"घर में बन्दर छोड़ चले" (चर्चा अंक-2422)

मित्रों 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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मगर तकसीम हिंदुस्तान होगा ... 

जहाँ बिकता हुआ ईमान होगा बगल में ही खड़ा इंसान होगा 
लड़ाई नाम पे मजहब के होगी मगर तकसीम हिंदुस्तान होगा... 
स्वप्न मेरे ...पर Digamber Naswa 
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चंद शेर करीबी दोस्तों के लिए 

शायर नहीं मुकुल कह देना है लोहार !!
री मैयत में चलने का शौक था 
मेरी तीमारदारी में सब आए उसके बाद ।
############पट्टी चला दो या कि अखबारों में भर दो
ज़िंदा ही रहेगा मुकुल हर कोशिशों के बाद... 
मिसफिट Misfit पर गिरीश बिल्लोरे मुकुल 
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और घर में बन्दर छोड़ चले.. 

😛
तुम दिल क्यूँ मेरा तोड़ चले..
आँखों में समंदर छोड़ चले..
दिल को थी कहाँ उम्मीद-ए-वफ़ा..
यादों का बवंडर छोड़ चले..  
SB's Blog पर Sonit Bopche 
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----- ।। उत्तर-काण्ड ५४ ।। ----- 

तुम त्रिकाल दरसी रघुनाथा । बिस्व बदर जिमि तुहरे हाथा ॥ 
लोगहि चरन सरन जिअ जाना  । बोधिहौ मोहि सोइ बखाना ॥ 

तथापि प्रभो सबहि दिन जैसे । कहिहउ जसि करिहउँ मैं तैसे ॥ 
कहुँ निबेदित सुनहु गोसाईं । सिरोमनि तुम सबहि के राई ... 
NEET-NEET पर Neetu Singhal  
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चटखारों की आवाज़ 

कोई ज़िन्दगी से संवाद करे भी तो कितना 
जहाँ प्रश्नों का ज़खीरा हो 
समय कम हो और उत्तर नदारद... 
vandana gupta 
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एक अदना सा कमरा 

मेरे कॉलेज के दिनों में एक अदना सा कमरा था 
जहाँ उन दिनों मेरा वक्त गुजरा था 
मैंने देखा नहीं उसे अरसे से 
और क्या पता कभी देख भी न पाऊं 
मगर जिन्दा है अभी भी जहन में 
यहाँ वहाँ दिल के किसी कोने में... 
anupam choubey  
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भूख है या है मुहब्बत 

भोर की पहली किरण से, 
मुस्करा कर खिल गई, 
फिर हुआ मदहोश भँवरा , 
भूख है या है मुहब्बत,,,, 
daideeptya पर Anil kumar Singh 
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हर किसी के सपने एक जैसे नहीं होते| 
हर किसी की अलग दुनिया, अलग जन्नत होती है| 
पहले को पुरानी पथरीली इमारतों में 
जन्नत दिखती है तो दूसरे को 
कश्मीर की वादियों में... 
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खजूर से तैयार की गई मिश्री (Palm Candy )थोड़ी सी लें ,अंदाज़े से (१५ -२५ ग्राम )और इसे पचास से ७५ ग्राम भिन्डी (Okra ,Lady Finger )के साथ उबाल कर ठंडा करके नियमित कमसे काम (महीना  -बीस दिन ) या और ज्यादा दिनों तक नियमित पीएं। 
It is a sort of an Internal dialysis for Kidney Health and Urinary Tract Infection .
आज़माकर देख लें,यक़ीन आ जाएगा। 


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शेखर सेन देवास में 

ई बार गधों, मूर्खों और विशुद्ध नालायकों को ज्ञान - विज्ञान, सामाजिकता और अर्थ शास्त्र या मीडिया की बात करते देखता हूँ तो लगता है इन दरिद्र और पागलों के साथ क्या करूँ, जिन्हें बचपन से एक अभद्रता से बढ़ते देखा और सारे धत करम जानता हूँ इनके तो क्या इनसे बहस करना, फिर लगा कि उम्र बढ़ गयी है तो अक्ल आ गयी हो तो समझा दूं, पर बहुत विचार करने के बाद लगा कि अब आज से इनके साथ ना बात करनी ना तर्क , सिवाय अपने को कीचड़ में लपेटने के अलावा होगा क्या, क्योकि कहते है ना सूअर आपको कीचड़ में लपेटकर ले जाता है और फिर आनंदित होता है ? इससे अच्छा है छोडो, माफ़ कर दो और आगे बढ़ जाओ... 
ज़िन्दगीनामा पर Sandip Naik 
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