साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Sunday, August 28, 2016

"माता का आराधन" (चर्चा अंक-2448)

मित्रों 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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"माता का आराधन" 

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

अन्तस् के कुछ अनुभावों से,
करता हूँ माँ का अभिनन्दन।
शब्दों के अक्षत्-सुमनों से,
करता हूँ मैं माँ का वन्दन।।

मैं क्या जानूँ लिखना-पढ़ना,
नहीं जानता रचना गढ़ना,
तुम हो भाव जगाने वाली,
नये बिम्ब उपजाने वाली,
मेरे वीराने उपवन में
आ जाओ माँ बनकर चन्दन... 
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अँकुर- 

लघुकथा 

1.बीज का अँकुर

पन्द्रह दिन पहले सोनाली की शादी हुई थी| सोनाली के मम्मी-पापा बेटी से मिलने ससुराल आए थे| सोनाली के सास, ससुर, ननद, देवर सबने दिल खोलकर स्वागत किया|

पन्द्रह दिन पहले सोनाली की शादी हुई थी| सोनाली के मम्मी-पापा बेटी से मिलने ससुराल आए थे| सोनाली के सास, ससुर, ननद, देवर सबने दिल खोलकर स्वागत किया|


थोड़ी देर बाद ससुर जी ने कहा,”बहु, अपने मम्मी-पापा को अपने कमरे में ले जाओ|”जी पापा जी,’कहकर सोनाली माता पिता को अपने कमरे में ले गई|

थोड़ी देर बाद ससुर जी ने कहा,”बहु, अपने मम्मी-पापा को अपने कमरे में ले जाओ|”जी पापा जी,’कहकर सोनाली माता पिता को अपने कमरे में ले गई|


बेटा, यहाँ सब ठीक तो है न|तुम्हारा मान सम्मान कैसा है| दामाद जी का व्यवहार कैसा है,’पिता की चिन्ता वाजिब थी....

बेटा, यहाँ सब ठीक तो है न|तुम्हारा मान सम्मान कैसा है| दामाद जी का व्यवहार कैसा है,’पिता की चिन्ता वाजिब थी....
मधुर गुंजन पर ऋता शेखर मधु 
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मोदी ने भी की ---नर्क यात्रा 

हमारे रक्षा मंत्री कहते हैं कि पाकिस्तान जाना नर्क के समान है। पहली बात तो यह कि क्या जनाब रक्षा मंत्री को नर्क की हकीकत मालूम है? क्या वे किसी नर्क की यात्रा पर गए हैं? क्योंकि स्वर्ग.नर्क की हकीकत तो कल्पनीय है। प्रसिद्ध शायर गालिब के अनुसार 'हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, दिल को बहलाने को 'गालिब' ये ख्याल अच्छा है।' सच पूछा जाए तो कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिनके चलते हम महसूस करते हैं कि हम स्वर्ग में हैं या नर्क में। इस तरह की परिस्थितियां अकेले पाकिस्तान में ही नहीं हमारे देश समेत दुनिया के सभी देशों में पाई जा सकती हैं... 
Randhir Singh Suman 
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हरित दर्शन और पढ़ाई की कठिन राह 

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 
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कुछ अलग 

हर सितम सर झुकाया 
रिश्ते की नाजुकता जानकर मौन हम, 
नीची औकात कहा उसने 
भौं तानकर मेरे अंगना तूफ़ान आया 
और सब उजड़ गया बचा वही 
जो उस पल झुका और संवर गया.... 
कलम कवि की पर Rajeev Sharma 
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चीन यात्रा - ९ 

बीजिंग को पेकिंग भी कहा जाता है। शब्द एक होने के बाद भी उसका उच्चारण मान्डरिन में बीजिंग और कैन्टॉनीस में पेकिंग है। गुआन्झो को कैन्टॉन के नाम से जाना जाता था और वहाँ की भाषा को कैन्टॉनीस। साम्यवादी सरकार ने कई वर्षों के लिये चीन का संबंध शेष विश्व से तोड़ दिया था और जब उसे धीरे धीरे खोला तो विदेशियों का आगमन गुआन्झो से ही सीमित रखा। यही कारण है कि पेकिंग भी बीजिंग का उतना ही प्रचलित नाम रहा है। यद्यपि अब उसका उपयोग न्यून हो गया है पर फिर भी... 
Praveen Pandey 
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"कालाहांडी सिंड्रोम" 

दाना मांझी अपनी मरी हुई पत्नी को लेकर दस किलोमीटर से अधिक चल लिया। चल लिया होगा। टीवी की मरीज़ उसका वजन ही कितना रहा होगा। ३०-३५ किलो। इतना लेकर वह चल लिया होगा। ठेंठ में पैसे नहीं रहे होंगे। घर पर भी पैसे नहीं रहे होंगे। और यदि रहे भी होंगे तो वह खर्च करने की बजाय बचाना बेहतर समझा होगा। और हमें इतना संवेदित होने की जरुरत भी नहीं है। हजारो नहीं लाखो दाना मांझी हैं हमारे आसपास... 
सरोकार पर Arun Roy 
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दाना मांझी के बहाने 

हम संवेदनशील होने का दम्भ भरते , जाने वो कब का दम तोड़ चूका है। कभी -कभी हम दाना मांझी के बहाने हर ओर से चीत्कार कर, उस संवेदनशीलता की छाती पर चढ़ बैढ़ते। इस आशा में की कही... 
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ज़िंदगी कुछ नहीं कहा तूने 

ज़िंदगी कुछ नहीं कहा तूने, 
मौन रह कर सभी सहा तूने। 
रात भर अश्क़ थे रहे बहते, 
पाक दामन थमा दिया तूने... 
Kailash Sharma  

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"आरती उतार लो, आ गया बसन्त है" (चर्चा अंक-2856)

सुधि पाठकों! आप सबको बसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। -- सोमवार की चर्चा में  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। राधा तिवारी (र...