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Monday, August 29, 2016

"शैक्षिक गुणवत्ता" (चर्चा अंक-2449)

मित्रों 
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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गीत  

"बचपन के दिन याद बहुत आते हैं"  

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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घर-आँगन वो बाग सलोने, याद बहुत आते हैं
बचपन के सब खेल-खिलौने, याद बहुत आते हैं

जब हम गर्मी में की छुट्टी में, रोज नुमाइश जाते थे
इस मेले को दूर-दूर से, लोग देखने आते थे
सर्कस की वो हँसी-ठिठोली, भूल नहीं पाये अब तक
जादू-टोने, जोकर-बौने, याद बहुत आते हैं... 
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तलाश अभी बाक़ी है 

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साँसों पर पहरा लगा है
जिन्दगी की तलाश बाक़ी है
आशा निराशा में झूलता मन
सत्य की तलाश अभी बाक़ी है
जहर तो मिल ही जाता है
अमृत की तलाश अभी बाक़ी है... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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रात की आवाज़ 

गहरी काली रात, 
न चाँद, न सितारे, 
न कोई किरण रौशनी की. 
चारों ओर पसरा है डरावना सन्नाटा, 
सिर्फ़ सांय-सांय हवा बह रही है... 
कविताएँ पर Onkar  

जिंदगी की तलाश 

चल एक बार फिर से जिंदगी की तलाश करे 
तेरी खुशियों में अपनी खुशियाँ तलाश करे... 
RAAGDEVRAN पर MANOJ KAYAL  
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तमिलनाडु के एक चिकित्सा महाविद्यालय की फीस २ करोड़ होने की खबर से नयी शिक्षा नीति निर्माताओं को सबक लेनी चाहिए। शिक्षा को धंधेबाजों के हाथों में देने से शिक्षा का भला नही होने वाला। सरकार को चाहिए कि शैक्षणिक संस्थान खोलने वाले के चाल चलन से लेकर योग्यता, क्षमता, नीयत की ठोक बजाकर परख करे... 
PAWAN VIJAY 
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अंदाज़े ग़ाफ़िल पर चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 

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कुछ   मुद्दतो  के  बाद  सही  फैसले  हुए ।
निकले   तमाम  हाथ  तिरंगे  लिए   हुए... 

Naveen Mani Tripathi 
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कैंसर से बचाव के लिए 

महत्वपूर्ण उपाय 

कैंसर से बचाव के लिए महत्वपूर्ण उपाय वैसे तो देखा जाये तो कैंसर ना ठीक होने वाली बीमारी है। लेकिन कहते है कि यहाँ कुछ भी असम्भव नहीं है। कुछ रोगों में पहले ही सम्हल जाये तो बहुत ही अच्छा होता है। और पहले जब सम्हाला जाता है जब हम कुछ परहेज करते है या कुछ उपाये अपनाते है। आज ऐसे कुछ कुछ उपाय मैं आपको बता रहा हूँ जिससे आप कैंसर जैसे रोग से निपटने में मदद मिलेगी... 
हिंदी इंटरनेट पर Mukesh Sharma 
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वह एकाक्षी था  

जो कार्यकर्ता रखता हो समभाव, देखता हो सबको एक नजर से, आगामी विधानसभा चुनाव के लिये- वह होगा दल का प्रत्याशी। एक कार्यकर्ता जो पहने था काला चश्मा- खड़ा हो गया। बोला, “ इस अर्हता का मैं एक मात्र प्रत्याशी हूँ। छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष, दोस्त और दुश्मन- सबको एक ही नजर से देखता हूँ। श्रीमान न हो विश्वास करलें पुष्टि, यह कहकर उसने अपना चश्मा उतार दिया। लोगों ने देखा वह एकाक्षी था। 

Jayanti Prasad Sharma 
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1 comment:

  1. आज की चर्चा बढ़िया है सुन्दर लिंक्स संयोजन |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सर |

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"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

मित्रों! शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...