Followers

Saturday, April 07, 2018

"झटका और हलाल... " (चर्चा अंक-2933)

मित्रों! 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

--

दोहे "झटका और हलाल"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

जय दुर्गा नवरात में, बोल रहे थे लोग।
बाकी पूरे सालभर, मुर्गा का उपभोग।।
--
जीभ चटाखे ले रही, होठों पर हरिनाम।
हिन्दू ज्यादा खा रहे, मौमिन हैं बदनाम।।
--
नहीं क्षमा के योग्य हैं, दोनों के ऐमाल।
रोजाना दोनों करें, झटका और हलाल... 
--

नारी हूँ मैं 


तुम क्या जानोआज की नारी हूँ मैं !
रसोई से बैठक तक  

घर से स्कूल तक  
रामायण से अखबार तक  
मैंने कितनी आलोचनाओं का ज़हर पिया है  
तुम क्या जानो... 
Sudhinama पर sadhana vaid  
--
--
--
--
--
--

ज़िन्दगी जीना चाहती हूं 

मैं ज़िन्दगी जीना चाहती हूं  
नशे के घूंट की तरह पीना चाहती हूं ...  
बूँद बूँद कर हर रोज़  
कम हो रही है न इसकी मियाद  
और मैं उस बूँद के वजूद को  
क्यों समझ नहीं पा रही हूँ... 
प्यार पर Rewa tibrewal  
--
--
--

नारी आज की 

निर्भय हो विचरण करती 
अपनी क्षमता जानती 
अनजान नहीं परम्पराओं से    
सीमाएं ना लांघती |
परिवार की है बैसाखी हर कदम पर साथ देती 
है कर्मठ और जुझारू आत्मविश्वास से भरी रहती... 

Akanksha पर Asha Saxena  
--
--

South India Trip:  

Hyderabad 

Dreams of Kailash पर Naresh Sehgal 
--

--

इंटरनेट :  

अपनी साइड को सुरक्षित  

और पास वर्ड मजबूत कैसे रखें 

आज के समय में हर कोई इंटरनेट पर कहीं न कहीं सोशल मीडिया से, ब्लॉग से, यू टूयूब से और नेट से अथवा अन्य कार्यों से जुड़ा रहता हैं और इन साइडों के लिए यूजर्स को इसके लिए मेल एड्रेस और मजबूत पास वर्ड की आवश्यकता होती है । कमजोर पास वर्ड होने पर या साइड साइन आउट न होने की स्थिति में हैक हो जाती है और हैकर आपका सारा डाटा चुरा लेता है इस अप्रिय से निपटने के लिये जरुरी है कि हम अपनी साइड का पास वर्ड मजबूत रखें... 
समयचक्र पर महेंद्र मिश्र  

उड़ान का हौसला...... 

कुसुम कोठारी 

विविधा.....पर yashoda Agrawal   

9 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. बढ़िया लिंक्स

    ReplyDelete
  3. आज के चर्चा मंच में मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद |

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  5. सुन्दर सूत्रों से सजी सार्थक चर्चा ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी !

    ReplyDelete
  6. मेरे ब्लॉग समयचक्र की पोस्ट को चर्चा मंच में प्रकाशित करने के लिए दिल से आभारी हूँ ...

    ReplyDelete
  7. चर्चा मंच पर मेरी रचना को सामिल करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। समग्र अंक पठनीय
    सादर।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"महकता चमन है" (चर्चा अंक-3160)

सुधि पाठकों!  सोमवार   की चर्चा में  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। राधा तिवारी (राधे गोपाल)    -- ग़ज़ल   "महकता चमन है...