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Sunday, April 15, 2018

"बदला मिजाज मौसम का" (चर्चा अंक-2941)

मित्रों! 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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"चौपाई के बारे में भी जानिए"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

चौपाई क्या होती है?
चौपाई सम मात्रिक छन्द है
जिसमें 16-16 मात्राएँ होती है।
        अब प्रश्न यह उठता है कि चौपाई के साथ-साथअरिल्ल” और पद्धरि” में भी 16-16 ही मात्राएँ होती हैं फिर इनका नामकरण अलग से क्यों किया गया है?
      इसका उत्तर भी पिंगल शास्त्र ने दिया है- जिसके अनुसार आठ गण और लघु-गुरू ही यह भेद करते हैं कि छंद चौपाई हैअरिल् है या पद्धरि है। लेख अधिक लम्बा न हो जाए इसलिए अरिल्ल” और पद्धरि” के बारे में फिर कभी चर्चा करेंगे।
लेकिन गणों को थोड़ा सा जरूर देख लीजिए-
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मिलता हूँ रोज़ खुद..... 

मिलता हूँ रोज खुद से,पर मुलाकात नही होती। 
मिलती हैं नजरों से नजर ,पर बात नही होती । 
बन कर अज़नबी जी रहे हैं ,दोनों बरसों से। 
पर चाह कर भी हममे ,कोई बात नही होती... 
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मानसिकता बदलें 

बात तो बहुत छोटी सी है और कोई नई बात भी नहीं है रोज होती है और सैंकड़ों हजारों के साथ होती है। फिर भी उसका जिक्र करना चाहती हूँ पूछना चाहती हूँ अपने सभी मित्रों से खास कर पुरुष मित्रों से। उम्मीद नहीं है कि आप यहां जवाब देंगे न भी दें लेकिन इस पर विचार तो करें। अपने आप में और अपने बेटों में इस तरह का व्यवहार देखें तो सजग हो जायें... 
कासे कहूँ? पर kavita verma 
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5 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. सुप्रभात|मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

    ReplyDelete
  3. सुन्दर चर्चा।
    अति आभार मेरी रचना शामिल करने के लिए

    ReplyDelete

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"सब के सब चुप हैं" (चर्चा अंक-3126)

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