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Tuesday, November 10, 2020

"आज नया एक गीत लिखूं"(चर्चा अंक- 3881)

स्नेहिल  अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। 

(शीर्षक और भूमिका आ.कुसुम जी की रचना से )
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क्षितिज मिलन की

मृगतृष्णा है 

धरा मिलन का

 राग लिखूँ मैं ।

आज नया एक गीत लिखूँ मैं ।

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चलते हैं, आज की कुछ खास रचनाओं की ओर.........

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 ग़ज़ल "तंज करने से बिगड़ती बात हैं"

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मुफ्त में मिलती नहीं सौगात हैं
तंज करने से बिगड़ती बात हैं

हो सके तो वक्त से कुछ सीख लो
सामने आकर खड़ी अब मात हैं

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इसलिए होता है मूल से अधिक ब्याज प्यारा


कहा जाता है कि बच्चे प्रभु का रूप होते हैं !

 पर प्रभु को भी इस धरा को, प्रकृति को, सृष्टि को बचाने के लिए 

कई युक्तियों तथा नाना प्रकार के हथकंडों का सहारा लेना पड़ा था !

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आज नया एक गीत लिखूं

वीणा का गर

तार न झनके 

मन  का कोई

साज लिखूँ मैं।

आज नया एक गीत लिखूँ मैं।

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विकल्प

 विकल्प हमेशा ऐसा ही होता है

जब चाहो 

साथ रखो

जब चाहो 

नजरअंदाज करो

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पुस्तकें अब कोई नहीं पढता, उंगली  के
अग्रभाग में हैं, अब अनुसंधान के
ठिकाने, वृहदाकार बरगद को
अब कोई नहीं देखता,
बोन्साई के हैं
सभी

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चुप रहिये

कुछ ऐसी वक्त की नजाकत है ज़रा चुप रहिये

सेक्युलरिज्म की सियासत है ज़रा चुप रहिये।

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हमको अपने ताल समंदर लगते हैं -सतीश सक्सेना
मेरे दोस्तों में उम्र में मुझसे २० वर्ष छोटे (45 वर्षीय जो खुद को उम्रदराज समझते हैं) भी अक्सर उन्मुक्त होकर हंस नहीं पाते और अगर कोई मजाक या जोक शेयर कर दूँ तो इधर उधर देखने लगते हैं कि कोई क्या कहेगा !

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तिमिर दासता हट जाने पर

 तिमिर दासता हट जाने पर सोचा था धरती महकेगी  ,

लेकिन अब तो पहले से भी ज्यादा गहरा अँधियारा है 

फूल फूल का तन झुलसा है ,

कली कली बेहोश पड़ी है |

हर गुलाब केसर की क्यारी ,

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695. हम (10 हाइकु)
चाहता मन   
सिर्फ़ जिंदा ही हैं हम मां 
जीना क्या है ये तो हम भूल ही गए हैं 
तुम थी तो त्यौहार  त्यौहार सा लगता था
अब तो ये केवल रस्में ही रह गई हैं
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प्लास्टिक की बाल्टी और मग को कैसे साफ़ करे? 

प्लास्टिक के बाल्टी और मग की गंदगी आसानी से साफ़ नहीं होती। 
इन्हें साफ़ करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। 
आज मैं आपको प्लास्टिक की बाल्टी और मग को साफ करने का बहुत ही 
आसान तरीका बताउंगी। जिसे अपनाकर आप आसानी से इन्हें साफ़ कर पायेंगे। 

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आज का सफर यही तक 
आप सभी स्वस्थ रहें,सुरक्षित रहें 
कामिनी सिन्हा 
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12 comments:

  1. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत आभार

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  2. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

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  3. रचना पसंद आयी सो आभार आपका !

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति |

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  5. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार आदरणीया कामिनी सिन्हा जी।

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  6. बहुत ही सुंदर चयन आदरणीय कामिनी दीदी।सराहनीय प्रस्तुति।
    सादर

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  7. बेहतरीन संकलन
    एक से बढ़कर एक रचनाएँ।
    विशेषकर
    आज नया एक गीत लिखूँ मैं बहुत पसन्द आई।

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  8. मेरी रचना को यहां जगह देने के लिये बहुत आभार सखी ....

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति । सभी रचनाएँ अत्यन्त सुन्दर । सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई ।

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  10. मुग्ध करती सभी रचनाएँ और आकर्षक प्रस्तुति, कुछ उपयोगी घरेलू टिप्स मंच को परिपूर्णता प्रदान करते हैं - - मुझे शामिल करने हेतु आभार।

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  11. आप सभी स्नेहीजनों का तहेदिल से शुक्रिया एवं सादर अभिवादन

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