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Thursday, February 04, 2021

'जन्मदिन पर' (चर्चा अंक-3967)

चर्चा का शीर्षक चयन- आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री जी


सादर अभिवादन। 

 गुरुवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।


आज वरिष्ठ लेखक, ब्लॉगर, समाजसेवी, साहित्यसेवी आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी का आज जन्मदिवस है।
आदरणीय शास्त्री जी को दीर्घायु की कामना के साथ चर्चामंच परिवार की ओर से  जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।


आइए पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ- 
--

चार फरवरी 
"जन्मदिन पर रूप मुझको भा गया है" 
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सिलसिला होगा शुरू, मिल जायेंगी ढेरों बधाई,
आज मेरे स्वजन-परिजन, खूब बाँटेंगे मिठाई,
वातावरण उल्लास उत्सव का सदन में छा गया है।
जन्मदिन पर रूप अपना, आज मुझको भा गया है।।

--

घर के कुत्ते ने शहरके कुत्ते के ऊपर भौंक कर आज

अखबार के पन्ने पर जगह पाई है बधाई है ‘उलूक’ बधाई है

अखबार में
फोटो आई है
सारा घर मगन है
मालिक
कभी दिखाया नहीं जाता है
घर के कुत्ते ने बहुत धूम मचाई है
--
वाह!! बसंत
कितने अच्छे हो तुम
जब भी आते हो
प्रेम में 
सुगंध भरकर चले जाते हो---
--
तड़पेगी याद मेरी, फिर अधूरी चाहों में !
भटकेंगे प्राण मेरे, फिर तुम्हारी राहों में !!

छूकर वह पारिजात, कलियाँ कुछ सद्यजात।
बंद कर पलकें, करोगे, याद कोई मेरी बात।
--

कैसे कह दूँ की अब घात होगी नही ...

उसकी मुट्ठी भरी हुई है, मेरी मुट्ठी  खाली- खाली।

उसने पहले छतरी मांगी, फिर चुपके से धूप चुरा ली।


वो चंदा है  आसमान का,  तारों से  मन बहलायेगा

उसको क्या मालूम पड़ेगा, मावस होती कितनी काली।

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मुस्कराएगा थोड़ी देर में आसमान,
खिल उठेगी उसे देखकर धरती,
सूख जाएंगे घास पर चमकते आँसू.
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चलने का फैसला ले लिया आनन-फानन  ..
एक बार मुड़ कर भी देख लिया होता ।
 कैसे दरकता है नेह का पुल ।।
--
किराए पे भीड़, बुला लेते हैं नेतागण 
बिजली पानी राशन, साथ देते है लंबे भाषण
ये किराए का जातिवाद और भ्रष्टाचार बहुत खलता है
--
जितनी दफ़ा, वो दोपहर की - -
धूप थी कोई मुंडेरों से
जाने कब उतर
गई, बेवजह
ही
--
--
रात बुझती नहीं दिन सुलगता नहीं 

रुख़ हवा का जरा भी बदलता नहीं 

मेरे आंगन को किसकी नजर लग गई 

द्वार सूना है, सपना ठहरता नहीं 

--

धूप चुरा ली | डॉ (सुश्री) शरद सिंह |

 ग़ज़ल संग्रह | पतझड़ में भीग रही लड़की

उसकी मुट्ठी भरी हुई है, मेरी मुट्ठी  खाली- खाली।

उसने पहले छतरी मांगी, फिर चुपके से धूप चुरा ली।


वो चंदा है  आसमान का,  तारों से  मन बहलायेगा

उसको क्या मालूम पड़ेगा, मावस होती कितनी काली।

--

"इंदौर में बेघर बुज़ुर्गों को नगर निगम के ट्रक में भरकर शहर से बाहर..."

एक बार अबोध बच्चों को 

शारीरिक स्वच्छता का पाठ पढ़ाया 

बच्चों को ख़ूब भाया 

अगले दिन महादेवी जी ने देखा

ख़ुद को मन ही मन कोसा  

बच्चों ने मैल की मोटी परत 

पत्थर से घिसकर हटाई 

तो कुछ बच्चों की चमड़ी तक खुरच गई 

ऐसा ही कुछ जूनून सवार है 

--

आज का सफ़र यहीं तक 
फिर फिलेंगे 
आगामी अंक में 

15 comments:

  1. प्रिय अनीता सैनी जी,
    मेरी ग़ज़ल को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए हार्दिक आभार 🙏
    यह मेरे लिए सुखद है। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

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  2. आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🙏🌹
    एवं
    सादर नमन 🌹🙏🌹

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  3. बहुत बढ़िया,हमेशा की तरह सुन्दर प्रस्तुति।

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  4. आभार अनीता जी। शुभकामनाएं जन्मदिन पर आदरणीय शास्त्री जी।

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  5. सुन्दर सराहनीय और सार्थक चर्चा प्रस्तुति । आदरणीय शास्त्री जी सर को जन्म दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं 🙏💐🙏.चर्चा मंच में मेरे सृजन को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार ।

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  6. हमेशा की तरह सुंदर लिंक से सुसज्जित चर्चा। आभार।

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  7. सुन्दर चर्चा। मेरी कविता को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार ।

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  8. आदरणीय दिलबाग सिंह विर्क जी के यहाँ शायद इंटरनेट बन्द है।
    चर्चा लगा लगाने के लिए आपका धन्यवाद अनीता सैनी जी।
    --
    मेरे जन्मदिन पर शुभकामनाएँ प्रेषित करने के लिए-
    हृदय तल से बहुत-बहुत आभार आप सबका।

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  9. आदरणीय शास्त्री सर जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाए,
    परमात्मा उन्हें स्वस्थ रखें और दीर्घायु करें
    बहुत ही सुंदर सराहनीय चर्चा अंक प्रिय अनीता जी ,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर नमन

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  10. वाह अनुपम चर्चा, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

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  11. हमेशा की तरह सुंदर लिंक ! आभार

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  12. प्रिय अनिता,
    बहुत बहुत आभार मेरी रचना को चर्चामंच में शामिल करने के लिए। हर बार की तरह अच्छी और सुरुचिपूर्ण रचनाओं का संयोजन, चर्चामंच का सुंदर पठनीय अंक देने के लिए सस्नेह धन्यवाद।

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  13. बहुत सुंदर लिंक संयोजन,हमेशा की तरह
    सम्मलित सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मलित करने का आभार
    सादर

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  14. प्रिय अनीता सैनी 'दीप्ति' जी,
    कतिपय आवश्यक कार्य के कारण मैं मंच पर उपस्थित नहीं हो सकी। क्षमा चाहती हूं। यहां विलम्ब से दे पा रही हूं आदरणीय डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक जी को उनके शुभ जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं... शास्त्री जी का आशीर्वाद नित नव ऊर्जा देता है।
    बहुत अच्छी चर्चा संकलित की है आपने। साधुवाद🙏

    मेरी पोस्ट को इसमें शामिल करने हेतु हार्दिक आभार 🙏
    शुभकामनाओं सहित,
    डॉ. वर्षा सिंह

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