Followers

Wednesday, February 17, 2021

"बज उठी वीणा मधुर" (चर्चा अंक-3980)

 मित्रों।

माता शारदे की आप सब पर कृपा बनी रहे।
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

देखिए कुछ ब्लॉगों के अद्यतन लिंक।
--

गीत  

"बज उठी वीणा मधुर"  

खिल उठा सारा चमन
,
दिन आ गये हैं प्यार के।
रीझने के खीझने के,
प्रीत और मनुहार के।। 
--
कचनार की कच्ची कली भी,
मस्त हो बल खा रही,
हँस रही सरसों निरन्तर,
झूमकर कर इठला रही,
बज उठी वीणा मधुर,
सुर सज गये झंकार के।
रीझने के खीझने के,
प्रीत और मनुहार के।।

उच्चारण  

--

दोहाकारों की दृष्टि में वसंत | वसंतपंचमी की शुभकामनाएं | डॉ. वर्षा सिंहजीवित हुआ बसन्त

अच्छे दिन आने लगे, हुआ शीत का अन्त।

धीरे-धीरे चमन में, सजने लगा बसन्त।।


नदियों में बहने लगा, पावन निर्मल नीर।

जल में डुबकी लगाकर, निर्मल करो शरीर।।


पतझड़ का मौसम गया, जीवित हुआ बसन्त।

नव पल्लव पाने लगा, बूढ़ा बरगद सन्त।।

--

- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

सपने वासंती हुए, रंगों से भरपूर। 

ऐसे में कोई रहे, क्यों अपनों से दूर।।

खेतों में सरसों खिले, जंगल खिले पलाश ।

खजुराहो की भांति ऋतु, किसने दिया तराश ।।

--

- सुमन अग्रवाल “सागरिका”

पीत चुनरिया ओढ़कर, आई बसंत बहार।

धरा वासंती हो गई,…कर सोलह श्रंगार।।

सूर्य उदित अब हो गया, भोर हुई अब जाग।

चहचहाती चिड़ियाँ भी, करती कलरव राग।।

--

- डॉ. वर्षा सिंह

माघ शुक्ल की पंचमी, प्रकृति करे श्रृंगार ।

वर देती वागीश्वरी, विद्या का उपहार।।

  

"वर्षा" की शुभकामना, रहें सभी ख़ुशहाल।

अपनेपन का, प्रेम का, मौसम रहे बहाल।।

--
एक गीत :  सरस्वती वंदना 
हंसवाहिनी ! ज्ञानदायिनी !
ज्ञान कलश भर दे !
माँ शारदे वर दे ।

मिटे तमिस्रा कल्मष मन का
मन निर्मल कर दो जन जन का

वीणापाणी ! सिर पर मेरे,
वरद हस्त धर दे!
माँ!वागेश्वरी ! वर दे !
आनन्द पाठक, आपका ब्लॉग  
--
ताल-लय हर हृदय प्रकटे 
गा रही है वाग देवी  
गूँजती सी हर दिशा है, 
शांत स्वर लहरी उतरती 
शुभ उषा पावन निशा है !

श्वेत दल है कमल कोमल 
श्वेत वसना वीणापाणि,
राग वासन्ती सुनाये 
वरद् हस्ता महादानी !
--
माँ सरस्वती की अराधना 
सरस्वती ! तुम बुद्धि की रानी 

मेरी शक्ति मेरी भक्ति 
तुम ही मेरी कहानी 
सरस्वती तुम.......

तुम को जब से है अपनाया 
जग की जानी कहानी 
सरस्वती तुम.......
--
--
जय माँ शारदे 
वागीश्वरी ! हे हंसासना माँ !
अर्चन तेरा ,हम करें साधना माँ !

तू स्वर की जननी , सुरों से सजा दे
चलें जिसपे वो सत्य का पथ दिखा दे
निराशा के छाने लगें जब अँधेरे
आशा की किरणें हृदय में जगा दे
उजालों की तुझसे करें याचना माँ !
अर्चन तेरा ••••••
ज्योति-कलश, ज्योति-कलश  
--
--
OMG! पोल्ट्री फार्मिंग की तरह की जाती है बेबी फार्मिंग!! 
आज मैं आपको एक ऐसे अजीब किस्से से रूबरू करवा रहीं हूं, जो बहुत ही घिनौना है, लेकिन है सच्चाई। पूरी मानव जाति के लिए यह शर्म की बात है कि जहां हम नारी-पुरुष समानता की बातें करते है, वहां कुछ देश ऐसे है, जहां कम उम्र की लड़कियों को जबरन प्रेग्नेंट कर उनसे बच्चे पैदा करवाएं जाते है, ताकि उन बच्चों को बेच कर पैसा कमाया जा सके। अफ्रीका महाद्वीप में अत्यधिक गरीबी होने की वजह से अन्य देशों की कुरीतियों की तरह ही नाइजीरिया में बेबी फार्मिंग जैसा घिनौने काम का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।  
--
--
--
आज का उद्धरण 
विकास नैनवाल 'अंजान', एक बुक जर्नल 
--
क्षणिका 
है शक्ति तुम्हारी राधा  रानी 
भक्ति रूप में मीरा पहचानी 

शेष  हुए    अनुयाई तुम्हारे

 क्या कोई रिक्त स्थान नहीं 

  बचा है हमारे लिए |

--
पिघलती बर्फ 
बसन्त आगमन का दिन ही 
चुन लिया था मैंने
बासंती जीवन के लिए .
पर  बसंत !  
तुम तो न आये । 
संगीता स्वरुप गीत.......मेरी अनुभूतियाँ  
--
कुछ कह न पायेंगे 
किस्सा कहा जो दर्द का वो सह न पायेंगे,
हर इक बयाँ पे रोये बिना रह न पायेंगे !

हर रंग है जफा का मेरी दास्ताँ में दोस्त,
इलज़ाम खुद पे एक भी वो सह न पायेंगे !
Sadhana Vaid, Sudhinama 
--
--
पारुल स्कूल से निकलते हुए पारुल सोच रही थी कि घर पहुँचते-पहुँचते अँधेरा हो जायेगा। उसके स्कूल में आज से एक्स्ट्रा क्लास थी। वह अपने गांव के पास के कस्बेनुमा शहर के स्कूल में बारहवीं कक्षा की छात्रा है। शिक्षकों पर दिवाली से पहले कोर्स समाप्त करने का दवाब होता है। उसके बाद प्री -बोर्ड की परीक्षा की तैयारी भी तो होती है। इसलिए स्कूल की छुट्टी के बाद दो घंटे एक्स्ट्रा क्लास लेना तय हुआ है। " यह तो रोज की बात हो जाएगी ! " वह बुदबुदाई... 
--
आज के लिए बस इतना ही...।
--

14 comments:

  1. उम्दा लिंक्स। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

    ReplyDelete
  2. सजा सुन्दर लिंक्स से आज का यह अंक
    मेरी रचना को भी शामिल किया है आज
    \धन्यवाद सर |

    ReplyDelete
  3. सुन्दर, मोहक संयोजन!
    हार्दिक बधाई, आभार 🙏

    ReplyDelete
  4. एक ओर माँ सरस्वती की वंदना से सजी पोस्ट्स तथा दूसरी ओर अफ्रीका में हो रही शर्मनाक घटना को दिखाता निरपेक्ष चर्चा मंच, इतना वीभत्स अत्याचार यदि इसी तरह दुनिया में होता रहता है तो प्रलय आने में कितनी देर लगने वाली है, कोरोना जैसे वायरस भी इसके सामने कुछ नहीं, आभार !

    ReplyDelete
  5. बसंत के खुशबु से महकते वातावरण में अफ्रीका की जीवंत सच्चाई से सामना होना ये दर्शा गया कि-हम बहुत सौभाग्यशाली है जो भारत देश में जन्मे है। बाकी देशों की क्रूरता को देखकर तो इंसानियत शर्मशार है। बहुत ही सुंदर चर्चा अंक आदरणीय सर,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं सादर नमन

    ReplyDelete
  6. सुन्दर सार्थक सूत्रों से सुसज्जित आज का चर्चामंच ! अपनी रचना को यहाँ पाकर बहुत हर्षित हूँ ! आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

    ReplyDelete
  7. आदरणीय शास्त्री जी,नमस्कार ! बहुत ही सुन्दर समसामयिक रचनाओं से सुशोभित चर्चा अंक..मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका हृदय से आभार एवं अभिनंदन..

    ReplyDelete
  8. समस्त चर्चमंच को बसंतोत्सव एवं माँ सरस्वती प्रकटोत्सव की हार्दिक शुभकामनएे !
    आदरणीय डाँ. साहब
    इस मरीज का निरंतर ख्याल रखने के लिए तहेदिल से शुक्रिया !
    जयो जयो माँ सरस्वती ! जय भारत !! जय भारती !!!

    ReplyDelete
  9. सुन्दर और सराहनीय चर्चा प्रस्तुति ।

    ReplyDelete
  10. बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  11. पूरी तरह बासंती रंग से सराबोर, सुंदर संकलन !

    ReplyDelete
  12. आदरणीय शास्त्री जी,
    बेहतरीन लिंक्स का बेहतरीन संयोजन है। मां सरस्वती का आशीर्वाद हम पर बना रहे यही कामना है।
    मेरी पोस्ट को सम्मिलित करने हेतु आपके प्रति हार्दिक आभार 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।