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Thursday, February 11, 2021

चर्चा - 3974

 आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है 

ये दिन प्रेम सप्ताह के हैं| एक तरफ़ युवा इनका इन्तजार करते हैं, तो दूसरी तरफ़ पारम्परिक सोच वाले इसके घोर विरोधी हैं| वैसे प्यार के लिए जितनी बड़ी-बड़ी बातें कविताओं में होती हैं, जिंदगी में सभी इसके प्रति इतने उदार नहीं होते| खासकर जब बात अपने परिवार की बेटी से जुड़ी हो| यह भी सच है कि बच्चों को उचित-अनुचित के बारे में समझाया जाना चाहिए, क्योंकि किशोरावस्था में अक्सर भावना में बहकर गलत फैसले ले लिए जाते हैं, लेकिन इसके लिए हमें भी पारम्परिकता के खोल से तो निकलना ही होगा| प्रेम के बारे में खुलकर बात तो होनी ही चाहिए| प्रेम उस चीज से बहुत ऊपर है, जिसे हमारे युवा जानते हैं| यह मैं को मिटाकर ही संभव है और मैं तो उनकी भी मिटी नहीं होती, जिनकी उम्र मिटने के कगार पर होती है| यहाँ ओशो की टिप्पणी रखना चाहूँगा

तुम्हारा प्रेम तो अहंकार की सजावट है| तुम प्रेम में दूसरे को वस्तु बना डालते हो| तुम्हारे प्रेम में दूसरे की मालकियत है| तुम चाहते हो, तुम जिसे प्रेम करो, वह तुम्हारी मुट्ठी में हो, तुम मालिक हो जाओ| दूसरा भी यही चाहता है| तुम्हारे प्रेम में प्रेम के नाम पर मालकियत का संघर्ष चलता है|

चलते हैं चर्चा की ओर 

धन्यवाद 

दिलबागसिंह विर्क 

11 comments:

  1. अक्षरशः सत्य कहा कि जो मिटने के कगार पर होते हैं उनकी भी मैं मिटती नहीं है । प्रेम का संघर्ष यही है और यहीं पर पराजित भी होता है । हार्दिक आभार एवं शुभकामनाएँ ।

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  2. प्रेम को दर्शाती भूमिका और ओशो के विचार..वाह! बहुत सुंदर सर।मेरे सृजन को स्थान देने हेतु बहुत बहुत शुक्रिया।
    सभी रचनाकारो को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
    सादर

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  3. सशक्त भूमिका से सुसज्जित बेहतरीन सूत्रों की प्रस्तुति में मेरे सृजन को सम्मिलित करने हेतु सादर आभार दिलबाग सिंह जी।

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  4. सार्थक भूमिका के साथ सुन्दर चित्रमयी चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार आदरणीय दिलबाग सिंह विर्क जी।

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  5. वाह ! प्रेम की वास्तविकता से परिचित कराती भूमिका और सुंदर सूत्रों का मंचन, आभार!

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  6. हिन्दी की वृद्धि मे ही कविलेखक की सिद्धि है !
    चर्चामंच के इस प्रयास को सादर नमन !

    जय हिंद ! जय हिन्दी !!
    Tarun Kumar Thakur , Indore

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  7. बहुत सुन्दर सार्थक सूत्रों का संकलन आज का चर्चामंच ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार दिलबाग जी ! सादर वन्दे !

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  8. असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार आपका
    श्रमसाध्य कार्य लिंक्स चयन हेतु साधुवाद

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  9. बहुत अच्छी चर्चा आदरणीय विर्क जी
    शुभकामनाओं सहित,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  10. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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  11. सुप्रभात
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद |

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