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Monday, February 08, 2021

'पश्चिम के दिन-वार' (चर्चा अंक- 3971)

  सादर अभिवादन।

सोमवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

राजनीतिक पक्षधरता 

अब लोगों को 

भावनात्मक दोहन में 

उलझा चुकी है 

कुछ तो 

अपना आपा ही खो बैठे हैं

इंटरनेट पर

विरोधियों को

अश्लील गालियाँ

बलात्कार की धमकी 

देनेवालों को 

ट्रोल आर्मी 

नाम 

किसने दिया?

आर्मी (सेना) 

एक सम्मानजनक शब्द है 

जिसके साथ 

आत्मगौरव,भावनाएँ और अर्थ जुड़े हैं।

-रवीन्द्र सिंह यादव

आइए पढ़ते हैं विभिन्न ब्लॉग्स पर प्रकाशित कुछ रचनाएँ- 

--

दोहे "पश्चिम के दिन-वार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रोज-रोज आता नहींप्यारा दिवस गुलाब।
बाँटों महक गुलाब सीसबको आज ज़नाब।।
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प्रणय-प्रीत के प्रथम दिनबाँट रहा मुस्कान।
सह कर पीर गुलाब-गुलकभी  होता म्लान।।
--

मधुमास अंगना का मेरे


चन्द्र रश्मियाँ तेज़ उड़ेले 
और चाँदनी करे शृंगार
मुखमंडल आभा से चमके
सौंपे ममता धीर उपहार
करूं निछावर सब कुछ उस पर
कंठ हार मोती का मेरे ।।
--


--
किसे दिखाओगे दिल के शब्दकोश
हर शख़्स समझदार नहीं
होता, हदे नज़र है
धुंध की चादर,
हर क़न्दील
वाला
मददगार नहीं होता,
--
कुम्भ ,छठ हो
या चतुर्थी
चौथ का जलता दिया हो,
पुण्य सबको
मिले चाहे
पत्र का वह हाशिया हो,
अमावस्या
पंचमी का 
चाँद हो या प्रतिपदा हो ।
--
है, दूर कितना, कितने पास!

हो दूर लेकिन, हो एहसासों में पिरोए,
बांध लेते हो, कैसे बंधनों में!
पल-पल, घेर लेता हो, जैसे कोई एहसास,
गुम-सुम, मौन, पर वाचाल कितना!
मेरा आकाश!
--
ले चलीं वो आसमाँ के पार मुझको 
चाँद और तारों ने स्वागत गीत गाया

देखकर उनके जहाँ की आबे रौनक़ 
कशमकश में पड़ गई दिल हिचकिचाया 
--

दर्पण उदास है या चेहरा उदास है 

आख़िर कोई बताए, क्या-क्या उदास है 


खाली पड़ा हुआ है मन का मकान भी 

साँकल लगी है चुप की, ताला उदास है 

--

उत्तरदायी

बौद्धिकता के
चुंबकीय आभा से
सम्मोहित अनुसरणकर्ताओं को
आत्मोत्सर्ग के लिए 
उकसाया गया 
अलग-अलग प्रकार से
कभी स्वप्नों की थैली तो कभी
जीवन मूल्य तत्वों के रक्षा का
--

छवि को देख गुंजन को यकीन नहीं हुआ कि यह   वही

छवि है जिसकी चंचलता और शरारतों से उन पाँच सखियों

की मंडली गुलजार हो जाया करता

 थी । अगर एक दिन वह न आती तो दूसरे दिन उसकी

जम कर क्लास लगती कि कल वह 

कहाँ थी ? कॉलेज से बी.ए.करने के बाद वह अपने

पिताजी के ट्रांसफर के साथ ही परिवार सहित भोपाल

शिफ्ट हो गई । उदयपुर में सभी से फोन सम्पर्क कुछ

समय रहा लेकिन धीरे-धीरे सभी घर-गृहस्थी में रम गई ।

--
26 जनवरी के कांड के दो दिन बाद एकबारगी तो लगा कि नौटंकी का पटाक्षेप हो गया है और सरकार ने पूरी तरह स्थिति पर काबू पा लिया है। पर अचानक नाटक में जुटे बीसियों किसान नेताओं में से एक, पश्चिमी उतर प्रदेश के राकेश टिकैत, जो अपने दल का मुख्य प्रवक्ता था, मुखिया नहीं, ने अपने अभिनय का कौशल दिखलाया और इस बार पंजाब के बदले उत्तर प्रदेश के किसानों के हुजूम को दिल्ली बार्डर पर ला, चरित्र अभिनेता से नायक बन गया ! यहीं से लगने लगा कि शतरंज पर एक नए व्यूह की रचना कर दी गई है !
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हमारे स्कूल के जूडो-कराते के कोच भाटिया सर इन दोनों खेलों में अपने ब्लैक ब्लैक-बैल्ट होने पर बहुत इतराते हैं.
नंगे हाथों से ईंटों का ढेर तोड़ना उनके लिए मामूली बात है.
अपनी किक्स से वो अपने दुश्मन को हवा में दो-दो मीटर तक ऊँचा उछाल देते हैं.
हम बच्चे उनके बड़े फ़ैन्स हैं पर हमारे पी. टी. सर को ऐसा करना हमारी नादानी लगती है.
पी. टी. सर हमसे कहते हैं
--
और चलते-चलते प्रोफ़ेसर गोपेश मोहन जैसवाल जी की कुछ रचनाओं की चर्चा वीडियो-ब्लॉग में-
 भाग एक 




भाग दो 
--

आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले सोमवार।
 



11 comments:

  1. Wow this is fantastic article. I love it and I have also bookmark this page to read again and again. Also check first kiss quotes

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  2. सुन्दर सराहनीय संकलन । मेरे सृजन को संकलन में स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार ।

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  3. उपयोगी लिंकों के साथ सारगर्भित चर्चा।
    अनीता सैनी जी को पुत्र के जन्मदिन पर बधाई एवं बेटे को शुभाशीष।
    सुन्दर चर्चा प्रस्तुति के लिए, आपका आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी।

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार सर बेटे को आपका आशीर्वाद मिला।
      सादर

      Delete
  4. आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी,
    ट्रोल आर्मी को ले कर उठाया गया आपका प्रश्न विचारणीय है। आदरणीय "मयंक" जी के दोहे से चयनित शीर्षक भी जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला है। बहुत अच्छा संयोजन है।
    मेरी ग़ज़ल को शामिल करने हेतु हार्दिक आभार 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  5. बहुत ही सुंदर सराहनीय प्रस्तुति।मेरे नवगीत को स्थान देने हेतु सादर आभार आदरणीय सर।

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  6. उम्दा व सराहनीय अंक। मुझे सहभागी बनाने हेतु हार्दिक आभार

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  7. विविध रंग बिखेरता हुआ चर्चा मंच हमेशा की तरह अपनी अलग छाप छोड़ जाता है, मुझे स्थान देने हेतु असीम आभार आदरणीय रवींद्र जी - - नमन सह।

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  8. रोचक तथा लाजवाब संकलन की सुन्दर प्रस्तुतिकरण के लिए हार्दिक आभार ..मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय से अभिनंदन करती हूँ..असीम शुभकामनायें..सादर. जिज्ञासा सिंह..

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  9. हार्दिक आभार आपका |विलंब के लिए क्षमा

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