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बुधवार, फ़रवरी 16, 2022

"भँवरा शराबी हो गया" (चर्चा अंक-4343)

 मित्रों सादर अभिवादन...!

बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

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गीत "जीवन किताबी हो गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

घाम अच्छा लग रहामौसम गुलाबी हो गया।
कुदरती परिवेश काजीवन किताबी हो गया।।

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इश्क की दीवानगी कारंग दुनिया पर चढ़ा,
फटे कपड़ों का यहाँ परढंग ज्यादा ही बढ़ा,

देह का अन्दाज भी, अब तो शबाबी हो गया।
कुदरती परिवेश काजीवन किताबी हो गया।। 

उच्चारण 

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ओखली और मूसल 

जानते हो?
ओखली और मूसल 
गाँव में घर-घर हुआ करते थे
वह रिदम 
आज भी 
गूँजती रहती है 
मेरे भीतर 
एक ही ओखली में 
अम्मा-चाची 
अपने-अपने 
मूसल से धान कूटती थीं 
--

गाँव पुकारे साथी म्हाने

हिवड़े आग ळगावे है।।

धुँधळी-धुँधळी गळियाँ दीसे

सुण! चौपाळ बुळावे है।। 

गूँगी गुड़िया 

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सोच में हूँ 

कहीं सास बहू से पीड़ित है

कहीं बहू सास से पीड़ित है

कहीं बेटी के लिए माँ का दुखड़ा है

कहीं भाई-भाई में झगड़ा है

सोच के कचरे की अति भीड़ का रगड़ा है

नासमझ, काल का बड़ा विशाल जबड़ा है

जो पीड़ित वो किसी के दिल का टुकड़ा है

जाल में मकड़ी का रहना ही बड़ा लफड़ा है 

"सोच का सृजन" 

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मेरी यादें -  डॉ (सुश्री) शरद सिंह 

एक ओर मैं (शरद सिंह) और दूसरी ओर प्रख्यात आलोचक परमानंद श्रीवास्तव जी और बीच में कोई सरदार जी नहीं बल्कि सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय काशीनाथ सिंह जी हैं, कहानीकार अमरीक सिंह जी पगड़ी में। स्थान..लखनऊ स्टेट गेस्टहाऊस का डायनिंग हॉल। सुबह नाश्ते की प्रतीक्षा में । 
कथाक्रम का आयोजन। सन् 2012 ।
      दोनों ही साहित्यकार जितने वरिष्ठ, उतने ही सहज स्वभाव के। परमानंद जी तो अब हमारे बीच नहीं हैं। जब वे गोरखपुर में अस्पताल में भर्ती थे तो उन्हें देखने जाने का अवसर मिला था। उनका उत्साह देखकर लग नहीं रहा था कि वे अस्पताल में है विदेश तक भावी योजनाओं पर चर्चा करते रहे। उन्हें नमन 🙏

Samkalin Katha Yatra 

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लहर मिले सागर से 

संसार से सुख लेने की आदत ने
मनुष्य को परमात्मा से दूर कर दिया है।
यह सुख जुगनू के टिमटिमाने जैसा प्रकाश देता है
और ईश्वरीय सुख सूर्य के प्रकाश जैसा है।
दोनों  में कोई तुलना हो सकती है क्या ?
ईश्वर को सच्चिदानंद कहा गया है।
सत अर्थात् उसका अस्तित्त्व कण-कण में है,
चित  अर्थात् वह चेतन है और
वह शुद्ध आनंद स्वरूप है।
जो सदा है, हर स्थान पर है,
चेतन है तथा आनंद है वही ईश्वर है।

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हाइकु 

बेमौसम वर्षा है 

सर्दी बढ़ेगी 

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हआ  सबेरा 

सोती दुनिया जागी 

हुई सक्रिय  

Akanksha -asha.blog spot.com 

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निमंत्रण 

ले हल्दियों से रंग, गुलमोहर संग,
लगी झूलने फिर, शाखें अमलतास की!

छूकर बदन, गुजरने लगी, शोख सी पवन,
घोलकर हवाओं में, इक सौंधी सी खूश्बू,
गीत कोई सुनाने लगी, भोर की पहली किरण,
झूमकर, थिरकने लगा वो गगन‌!

कविता "जीवन कलश" 

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एक साल बेमिसाल 

आज ही के दिन मैंने इस खूबसूरत ब्लॉग जगत में कदम रखा था!
ब्लॉगिंग करने का मेरा मुख्य कारण लोगों तक 
अपनी विचारों को साझा करना और अपने अंदर उठ रहे 
तमाम सवालों को लोगों के बीच रखना!
जिससे मुझे आत्म संतुष्टि मिलती है! 
जब मैं ब्लॉगिंग नहीं करती थी 
तब मुझे बहुत ही घुटन होती रहती थी 
जब कभी किसी का बलात्कार होता, 
किसी हत्या भीड़ द्वारा कर दी जाती, 
या किसी के साथ कोई भी अन्याय होता 
और मेरी रातों की नींद उड़ जाती थी 
मुझे चैन की नींद नहीं आती 
अजीब सी हलचल होती रहती थी 
मन में घुटन होने लगती थी। 
ऐसा लगता था कि मैं भी इसमें शामिल हूं 
क्योंकि मैं कुछ नहीं कर पा रही हूं 
चुप रहना मेरे लिए गुनाह करने जैसा था! 
इसलिए मैं अक्सर व्हाट्सएप स्टेटस पर 
छोटे-छोटे लेख डालती रहती थी, 
पर पता था कोई ज्यादा पढ़ता नहीं है 
किसी को फर्क नहीं पड़ने वाला! 
और न ही सुधार आने वाला, कुछ एक थे जो पढ़ते थे! 
पर मुझे फर्क नहीं पड़ता था 
क्योंकि मैं लिखती इसलिए थी कि 
मुझे अफसोस ना रहे कि 
मैं नहीं उतना भी नहीं किया जितना कर सकती थी! 
मैंने जब से लिखना शुरू किया यानी कि 
2015 में ही ब्लाग जगत में कदम रख चुकी होती 
पर कुछ कारणवश ऐसा नहीं हो पाया! 
मुझे इस बात का थोड़ा अफसोस है 
पर देर से ही सही!  

--

तुम्हारे आने से 

तुम्हारे आने से 
नदी किनारे बैठा 
बूढा पिंपल फिर से 
अपने पत्तों संग
शहनाई बजाएगा 

तुम्हारे आने से 
काली नदी में स्थित 
मछलियां तुम्हारे स्वागत 
के लिए नृत्य करते-करते 
पानी के बाहर उछलेगी 

कावेरी 

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प्यार 

प्यार से प्यारा अहसास कुछ नही है,

तुमसे प्यारा इस जहा मे कोई नही है,

हर पल तेरी याद मुझको तडपाती है,

हर वक्त तेरी बाते मुझको रुलाती है,

तुमसे दूर रहना बहुत मुश्किल है,

तुमसे बाते करना बहुत अच्छा लगता है, 

aashaye 

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आई उजली भोर 

 काली कोयल कूकती,अमराई की डाल।
खिलते हैं अब वाटिका, पुष्प गुलाबी लाल।

फूली सरसों खेत में,खुशियों की ले आस।
नव पल्लव तरुवर खिले, महक उठा मधुमास। 

सैलाब शब्दों का 

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शौर्य के प्रतीक 


सैनिकों की शहादत को शत शत नमन🙏💐
***********
आसमाँ से फूल बरसे आसमाँ से ।
जा रहा देखो सितारा इस जहाँ से ।।
वीर जो लिपटा तिरंगे में चला है,
हर दिशा में शौर्य उसका उड़ रहा है ।
वो महामानव, जगत से अलविदा कह,
देश का गौरव बढ़ा के जा रहा है ।।
चल रही है जिसके संग में ये जमी
आन दिखती है यहां से और वहां से ।। 

जिज्ञासा की जिज्ञासा 

--

आज के लिए बस इतना ही...!

--

9 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर लिंक्स आज के अंक की |धन्यवाद मेरी रचना को स्थान देने के लिए |

    जवाब देंहटाएं
  2. सादर प्रणाम
    हार्दिक आभार आपका
    श्रमसाध्य प्रस्तुति हेतु साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  3. आदरणीय शास्त्री जी, प्रणाम !
    विविध रचनाओं से परिपूर्ण उत्कृष्ट अंक ।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका हार्दिक आभार एवम अभिनंदन।
    सभी रचनाकारों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐👏👏

    जवाब देंहटाएं
  4. आदरणीय सर मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए आपका तहे दिल से बहुत बहुत धन्यवाद व आभार🙏
    निरंतर पूरी लगन के साथ चर्चा मंच पर सभी रचनाओं को प्रस्तुत करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर इसके लिए हम आप सभी चर्चा कारो के शुक्रगुजार हैं 🙏

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत बहुत धन्यवाद सर सुंदर संकलन

    जवाब देंहटाएं
  6. bahut hi shandar Blogt Post hai aur aap ke blog par to mai pahli bar visit kar raha hu.

    जवाब देंहटाएं
  7. सराहनीय संकलन।
    आखरी कागद को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय सर।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर प्रस्तुति। मेरी रचना को मंच पर स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं

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