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Sunday, July 03, 2022

"प्रेम और तर्क"( चर्चा अंक 4479)

सादर अभिवादन आज रविवार की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है शीर्षक और भूमिका आदरणीय दिगम्बर जी की रचना से --

तर्क वाले कहाँ समझते हैं दिल की बातें, 

प्रेम का मकसद 

जहाँ से तर्क की शुरुआत  होती है प्रेम वही अपना अस्तित्व खो देता है.....
चलते हैं, आज की 
कुछ खास रचनाओं की ओर.... 
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गीत "उलझन-झमेले रहेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हमको जीवन मिला तो वतन भी मिला,

एक तन भी मिला एक मन भी मिला,

शुद्ध कितने भी हों फिर भी मैले रहेंगे।

वेदनाओं के सँग सुख के मेले रहेंगे।।

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 प्रेम और तर्क

तारों की जिद्द ... नहीं उगेंगे तुम्हारे सामने
नहीं करनी थी उन्हें बात तुम्हारे सामने  
और नहीं मंज़ूर था उन्हें दिगंबर हो जाना
उठा देना किसी के आवारा प्रेम से पर्दा


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दुनिया में बहुत से ऐसे पुल हैं जिनको बनाने वाले इंजीनियरों की तारीफ़ सभी करते हैं ।उनकी खूबसूरती और मज़बूती की 

चर्चाएँ भी अक्सर हुआ करती है । गोल्डन गेट ब्रिज, सनफ्रांसिस्को, यूनाइटेड स्टेट्स , टॉवर ब्रिज, लंदन, इंग्लैंड और सिडनी 

हार्बर ब्रिज, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया ऐसे ही विश्व प्रसिद्ध पुलों के उदाहरण हैं ।

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उमंग भरा मन ,जीवन !!

खिलते कुसुमों से अनुराग लिए ,

पल पल बढ़ता है मन ,

गुनते हुए क्षण क्षण ,

अभिनव  आरोहण ,

बुनते हुए रंग भरे कात से ,

रंग भरा ,

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६५५. तस्वीर  

मैंने तुम्हारी तस्वीर देखी है, 

तुम्हें नहीं देखा,

तुम्हारी तस्वीर को चिपकाया है, ये

तुम्हें नहीं,

तुम्हारी तस्वीर से बातें की हैं,

तुमसे नहीं

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अपना हाथ जगन्नाथ 

सपनों को समेट कर 

हौले से धूल झाड़ कर 

अच्छी तरह तहा कर 

हथेली की रेखाओं के बीच 

सहेज कर रख देना । 

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लघुकथा- सौभाग्यशाली

माणिकचंद जी को तीन बेटे ही थे। इस बात का उन्हें बहुत घमंड था कि उन्हें तीन-तीन बेटे ही है। वे सीना तान कर बात-बात में कहते थे कि मैं बहुत भाग्यशाली हूँ...तीन बेटों का बाप हूँ। उनके बड़े बेटे को जब से बेटा हुआ तब से तो उनके पैर जमीन पर पड़ते ही नहीं थे।

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अंधविश्वास या वैज्ञानिक दृष्टिकोण चुनाव आपका हैजब हमें बिटिया होने वाली थी तो अपने देशी मान्यता के अनुसार हमारी माता जी ने पहले ही पता करने का प्रयास किया कि बेटा होगा या बेटी | इसमें होता ये हैं कि हर  दिवाली में हमारे यहाँ काजल पारा जाता हैं | इसमें पूजा करने के बाद दीया  जला कर उसके ऊपर मिटटी का घंटी तिरछा करके  रख दिया  जाता हैं | घंटी की छत पर ढेर साला कालिख या काजल जमा हो जाता हैं फिर उसे घर में सभी सदस्यों को हर दिवाली लगाया जाता हैं |
अंशुमाला
-------------------------क्या भटक गए हैं योगी - साध्वी
साधु का अर्थ है जो ' साधना ' का अभ्यास करता है या आध्यात्मिक अनुशासन के मार्ग का उत्सुकता से अनुसरण करता है। हालांकि अधिकांश साधु योगी हैं , सभी योगी साधु नहीं हैं। एक साधु का जीवन पूरी तरह से मोक्ष (मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति), चौथा और अंतिम आश्रम ( जीवन का चरण), ध्यान और ब्रह्म के चिंतन के माध्यम से प्राप्त करने के लिए समर्पित है । साधु अक्सर साधारण कपड़े पहनते हैं, जैसे हिंदू धर्म में भगवा रंग के कपड़े और जैन धर्म में सफेद या कुछ भी नहीं, जो उनके संन्यास (सांसारिक संपत्ति का त्याग) का प्रतीक है । हिंदू धर्म और जैन धर्म में एक महिला भिक्षुणी को साध्वी कहा जाता है और कुछ ग्रंथों में आर्यिका के रूप में ।

---------- पका दिन मंगलमय हो कामिनी सिन्हा -----





10 comments:

  1. सार्थक लिंको के साथ सुंदर चर्चा प्रस्तुति|
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी|

    ReplyDelete
  2. सुंदर प्रस्तुति.आभार.

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  3. सुन्दर सूत्रों से सजी सार्थक प्रस्तुति । चर्चा में सृजन
    को सम्मिलित करने के लिए बहुत बहुत आभार कामिनी जी !

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  4. सुन्दर प्रस्तुति, मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद कामिनी जी 🙏🙏

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  5. नमस्कार कामिनी जी !! आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपने मेरी रचना को रविवार की चर्चा में स्थान दिया | उत्कृष्ट लिंक संचयन हेतु बधाई स्वीकारें !!

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  6. प्रेम और तर्क । विषय बहुत दिलचस्प और विरोधाभासी है ।
    हर रचना का अपना स्वतंत्र अंदाज़ है ।
    क्या खूब कही अपनी-अपनी बात है !
    चर्चा में सम्मिलित करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । अभिनंदन ।

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  7. विविधता से परिपूर्ण उत्कृष्ट अंक। सभी रचनाकारों को बधाई। आभार आपका कामिनी जी ।

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  8. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

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  9. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  10. मेरी पोस्ट चर्चा मे शामिल करने के लिए धन्यवाद ।

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