Followers


Search This Blog

Friday, August 05, 2022

'युद्द की आशंकाओं में फिर घिर गई है दुनिया' (चर्चा अंक 4512)

सादर अभिवादन। 

युद्द की आशंकाओं में फिर घिर गई है दुनिया,

चैन से सो नहीं पा रही है नन्ही मासूम मुनिया।  

*****

शुक्रवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।

लीजिए पढ़िए चंद चुनिंदा रचनाएँ-

दोहे "शैतानी उन्माद" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

करवाते बेखौफ जोदंगा और फसाद।

दहशतगर्दों में बढ़ाशैतानी उन्माद।।

हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख सबरब की हैं सन्तान।

हत्याओं से पेशतरसोच अरे नादान।।

*****

प्रेम को नमी से बचाने

रास्ते में

प्रेम के कराहने की

आवाज़ सुनी

रुका

दरवाजा खटखटाया

प्रेम का गीत बाँचा

जब तक बाँचा

जब तक

प्रेम उठकर खड़ा नहीं हुआ

*****

 746. चिन्तन

ताउम्र गुहार लगाती रही

पर समय नाराज़ ही रहा

और अंतत: चला गया

साथ मेरी उम्र ले गया

अब मेरे पास न समय बचा

न उसके सुधरने की आस, न ज़िन्दगी।

*****

माँ, तुम्हें भी स्वयं का, कुछ ध्यान रखना चाहिए -सतीश सक्सेना

इसीलिए वृद्ध अवस्था में लोगों को रनिंग की जगह उनके लिए लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज की ही सलाह दी जाती है , इसमें वॉकिंग, स्विमिंग , साइकिलिंग , रोइंग , योगा आदि आता है , इसका उपयोग एथलीट अधिकतर आंतरिक चोट रिकवरी के समय या बीच बीच में बॉडी को आराम देने के लिए करते हैं ! रनिंग करने से पहले हर किसी को लौ इम्पैक्ट एक्सरसाइज से ही शुरू करना चाहिए ! तथा दौड़ने के अभ्यास मध्य भी इसे जोड़कर रखना चाहिए तभी शरीर मुक्त मन से इसे अपना पाता है !

*****

हाइकु

पुराने ख़त

परतों में समेटे

यादों के पुष्प।


काली घटाएं

गाँव गली में गूँजे

राग मल्हार।

*****

क्षणिकाएँ

जिन्हें आदत होती हैं

जख्मों पर नए

जख्म रखने की

उन्हें पुराने जख्मों की

गाथा सुनाना व्यर्थ हैं

*****

विवाह और गर्भ के नाम पर ब्‍लैकमेलिंग का नया धंधा

आधुनिकता और सशक्‍तीकरण के नाम पर जिस तरह समाज की सांस को ही घोट देने का कुचक्र रचा जा चुका है, उसने हमारे बीच से ही कुपुत्रियों, कुमाताओं और पत्‍नी होने का बाजार सजाए बैठी महिलाओं के कुत्‍सित प्रयासों द्वारा अपराध की एक पूरी दुनिया बना दी गई है।  

चलिए अब सुनाती हूं वे मामले जिन्‍होंने मुझे ये सब लिखने को बाध्‍य किया।  

*****

उजान देश की ओर - -

इस

बहाव यात्रा की मंज़िल

का पता कोई भी

नहीं जानता,

मौन सभी

अपनी

जगह पड़े रहते हैं, अर्द्ध डूबे हुए जर्जर घाट,  

*****

पागलपन 

सवाल इस बात का है कि पागलखाने में कौन रहता है ? वे कौन से पागल है, जिन्हें अस्पताल की सुविधाएँ प्राप्त होती हैं , जिन्हें घर वाले स्वयं छोड़ आते हैं या फिर छुटकारा पाना चाहते हैं, जिनके ठीक होने संभावना होती है तो फिर उनके ठीक होने की संभावनाओं पर बगैर परीक्षण के प्रश्नचिह्न क्यों लग जाता है

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

9 comments:

  1. सुन्दर सूत्रों से सजी बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति । मेरे सृजन को मंच पर साझा करने के लिए सादर आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह जी ।

    ReplyDelete
  2. विविध रचनाओं से परिपूर्ण सराहनीय प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. उम्दा चर्चा।

    ReplyDelete
  5. सराहनीय चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  6. धन्यवाद आदरणीय

    ReplyDelete
  7. खूबसूरत संकलन...👏👏👏

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर और सार्थक चर्चा प्रस्तुति !
    आपका बहुत-बहुत आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी!!

    ReplyDelete
  9. बहुत सुंदर लिंक संयोजन
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मलित करने का आभार

    सादर

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।