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Wednesday, August 10, 2022

'हल्की-सी सीलन'( चर्चा अंक-4517)

सादर अभिवादन। 

बुधवारीय प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। 

शीर्षक व काव्यांश आदरणीय ओंकार जी की कविता 'सीलन' से 

इस सूखी दीवार में 

हल्की-सी सीलन है,

इसे रोकना ज़रूरी है,

सिसकी को न समझो,

तो रुलाई फूट जाती है.


बहुत दिनों से यहाँ 

कोई भी नहीं है, 

पर यहाँ की दीवारें 

सीलन से भर गई हैं,

लगता है,अच्छा नहीं लगा 

घर को अकेले रहना. 


आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-   

--

उच्चारण: गीत "सूखे मौसम में अब, कैसे सजें-सवाँरे सावन में" 

हरियाली तीजों पर,
कैसे लायें चोटी-बिन्दी को,
सूखे मौसम में अब,
कैसे सजें-सवाँरे सावन में।
मेघ-मल्हारों के गाने को,
कभी न भूलें सावन में।।
--

मैं घर छोड़कर गया था,

तो दीवार बिल्कुल सूखी थी,

अब इस पर सीलन के निशान हैं,

लगता है, मेरे पीछे से 

बहुत रोई है दीवार. 

--

अलविदा

हम दोनों के बीच हमेशा से
एक मौन रात चलती रही 
और उस रात को दिन में 
तबदील करने के लिए 
मैं कहीं जख्म सहती रही 
और एक दिन सवेरा भी हो गया 
--
जहां
लफ़्ज़ों का तिलिस्म थक जाए, एक
एहसास जो ख़ामोश रह कर
भी दिल की परतों को
खोल दे,
--
ये मेरे साथ हुआ
हाल ही में
तथाकथित अपनों ने
जब मुझसे पूछा
क्यों उदास हो?
मैंने रोते हुए
--
लहरा रहा हमारा अभिमान है तिरंगा।  
घर-घर फहर रहा है जय गान है तिरंगा। 
तन कर खड़ा गगन में यह दृश्य है विलक्षण।
उर भारती सुशोभित परिधान है तिरंगा।।
--
चाँदनी चौक,जामा मस्जिद
लाल किला
जंतर-मंतर, राज घाट 
मजनूँ के टिला..
--
झंझा नहीं मन भय भरे भोले सदा ही साथ हैं।
भटके नहीं पथ से कभी विपदा पड़े चाहें बड़ी॥
करना शिवा हम पर दया करते सदा हम वंदना। 
कर शीश प्रभु अपना रखो कहती सुधी हठ पर अड़ी॥
--
झंझा नहीं मन भय भरे भोले सदा ही साथ हैं।
भटके नहीं पथ से कभी विपदा पड़े चाहें बड़ी॥
करना शिवा हम पर दया करते सदा हम वंदना। 
कर शीश प्रभु अपना रखो कहती सुधी हठ पर अड़ी॥
--
एक दिन उन्होंने नवरात्रि पूजन के लिए कुँवारी कन्याओं को बुलवाया। माँ वैष्णो कन्या वेश में भी उन्हीं के बीच आ बैठीं। अन्य कन्याएँ तो चली गईं किंतु माँ वैष्णों नहीं गईं। बह श्रीधर से बोलीं-'सबको अपने घर भंडारे का निमंत्रण दे आओ।'
श्रीधर ने उस दिव्य कन्या की बात मान ली और आस-पास के गाँवों में भंडारे का संदेश पहूँचा दिया। लौटते समय गोरखनाथ व भैरवनाथ जी को भी उनके चेलों सहित न्यौता दे दिया।
--
अपराधों और शराब दुष्परिणामों के लिए हम विश्व में सबसे ऊपर के देशों में , माने जाते हैं , और उसका कारण केवल अज्ञानता है , जर्मनी में , मैं जिस किसी भी स्विमिंग पूल में तैरने जाता हूँ उनमें स्नान करने वाली, अंतरवस्त्रों में ही , बेहद खूबसूरत महिलायें अधिक होती हैं , मैंने एक भी पुरुष को उन्हें घूरते नहीं पाया जबकि हमारे देश में ऐसा होना एक अजूबा माना जाता और पुरुषों की वहां भरमार होती क्योंकि हमारे यहाँ, अपने घर में ही बिकिनी पहने हुए खुद की पत्नी को ही असहज होकर टोका जाएगा कि बच्चे क्या सोचेंगे , ऎसी मानसिकता हमारी अशिक्षा और अपरिपक्वता ही दर्शाती है और यही अशिक्षा हमारी असहजता का कारण है !
-- 
आज का सफ़र यहीं तक 
@अनीता सैनी 'दीप्ति'  

11 comments:

  1. धन्यवाद आदरणीय सुन्दर संकलन

    ReplyDelete
  2. पठनीय लिंकों के साथ सार्थक चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार @अनीता सैनी 'दीप्ति' जी।

    ReplyDelete
  3. पठनीय आकर्षक लिंकों का सुंदर तानाबाना।
    सभी ब्लाग कुछ कह रहें हैं सुंदर संकलन।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को चर्चा में शामिल करने के लिए हृदय से आभार।
    सादर सस्नेह।

    ReplyDelete
  4. विविधता से परिपूर्ण उत्कृष्ट अंक। मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका आभार प्रिय अनीता जी ।सभी रचनाकारों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।।

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  5. सुंदर अंक। मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार

    ReplyDelete
  6. बहुत खूबसूरत चर्चा संकलन

    ReplyDelete
  7. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  8. सुंदर प्रस्तुति।
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार आदरणीया।

    सादर

    ReplyDelete
  9. हलकी सी सीलन जब वायु मैं होबड़ी अनूठी लगती है |उम्दा लिंकों के साथ |

    ReplyDelete
  10. बहुत सुंदर प्रस्तुति। मेरी रचना को मंच पर स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीया।

    ReplyDelete

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