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Thursday, August 25, 2022

'भूख '(चर्चा अंक 4532)

सादर अभिवादन। 

गुरुवारीय प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। 

शीर्षक व काव्यांश आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी की लघुकथा 'भूख' से- 

 कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर नजीबाबाद के पास गाँव में जाने का कार्यक्रम था। अतः रास्ते में मेरा घर होने के कारण मिलने के लिए आये।औपचारिकतावश् चाय नाश्ता बनाया गया। प्रीतम की लड़की चाय बना कर लाई। परन्तु उसने चाय को बना कर छाना ही नही।      पहले सभी को निथार कर चाय परोसी गई। नीचे बची चाय को उसने अपने छोटे भाई बहनों के कपों में उडेल दिया।सभी लोग चाय पीने लगे।  लेकिन प्रीतम के बच्चों ने चाय पीने के बाद चाय पत्ती को भी मजा लेकर खाया। ये लोग अब बस से जाने की तैयारी में थे कि प्रीतम ने मुझसे कहा कि डॉ. साहब कल से भूखे हैं। हमें 2-2 रोटी तो खिला ही दो।

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-   

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उच्चारण: "लघुकथा-भूख" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

 कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर नजीबाबाद के पास गाँव में जाने का कार्यक्रम था। अतः रास्ते में मेरा घर होने के कारण मिलने के लिए आये।
औपचारिकतावश् चाय नाश्ता बनाया गया। प्रीतम की लड़की चाय बना कर लाई। परन्तु उसने चाय को बना कर छाना ही नही। पहले सभी को निथार कर चाय परोसी गई। नीचे बची चाय को उसने अपने छोटे भाई बहनों के कपों में उडेल दिया।
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हुई पश्चिम दिशा सलौनी ,
अब खेले आँख मिचौनी .
पर्वत ,मैदान ,किनारे ,
छुप गये पक्षी भी सारे .


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तेरे हाथों मिलने वाला 
एक ही प्याला ज़ाम बहुत है

माना तुमको न्याय मिलेगा 
फिर भी इसमें झाम बहुत है 
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राग-विराग सुभाव लिए ,दृग लाज भरे वृषभानु सुता।
मोहन साज सँवार करें, वह भूल गए अपनी नृपता।।
प्रीत भरें वह कुंज गली,निखरी तब कृष्ण सखा पृथुता ।
दिव्य अलौकिक दृश्य लिए,हिय में बसती प्रभु की प्रभुता।
किसी के प्यार में दीवाने  हुए है 
शायद किसी ने दी  सलाह जज्बाती होने की 
सोचा नहीं था  क्या हश्र होगा इसका 
जल्दबाजी में जो कदम उठाया
 उसी से मात खाई बिना सोचे बहक गए हम  दोनों 
अब पछताकर  होगा क्या  ?
 खुद में मस्त हूँ,मलँग हूँ
मैं मुझको बहुत पसंद हूँ
बनावट से बहुत दूर हूँ
सूफियाना सी तबियत है
रेशम में ज्यूँ पैबंद हूँ...

मिठाई का डिब्बा सामने रखे मेज पर रख राघव ने  रमेश की तरफ हाथ बढ़ाया, जबरन हाथ पकड़कर खुशी-खुशी बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाकर लड़की की तरफ इशारा कर बोला, "ये मेरी पत्नी है श्रुति और श्रुति ये हैं रमेश जी और नेहा जी हमारे पड़ोसी" ।

सुनकर हतप्रभ सी नेहा की आँखें फटी की फटी रह गयी, "हुँह" की आवाज के साथ वह लड़खड़ाकर गिरने को हुई तो पास खड़े बच्चों ने उसे सम्भाल लिया । कितने ही सवाल एक साथ उसके जेहन में बबाल मचाने लगे परन्तु होंठ फड़फड़ाकर रह गये । तभी कन्धे पर रमेश के हाथों का स्पर्श महसूस किया तो जबरन आँखें मूँदकर मुँह फेर लिया ।

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तेंदुआ कहाँ गया - शामली

उत्तर प्रदेश के जनपद शामली के कांधला थाना क्षेत्र के गांव कनियान भनेडा के जंगल में पिछ्ले माह जुलाई की 26 तारीख से तेंदुआ होने की आहट थी, जहां रात को तेंदुआ देखे जाने के बाद से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया था , ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने आसपास के जंगलों में सर्च अभियान चलाकर तेंदुए की तलाश शुरू की, सूचना के तत्काल पश्चात रेंजर वन विभाग राजेश कुमार सहित वन विभाग की टीम खूंखार तेंदुए को पकड़ने के मौके पर पहुंच गई तथा तेंदुए की तलाश में वन विभाग की टीम ने सर्च अभियान शुरू किया । काफी रात होने के चलते वन विभाग की टीम तेंदुए को नहीं पकड़ सकी। तेंदुए की धरपकड़ के लिए वन विभाग की टीम ने मौके पर सर्च अभियान चलाए. क्षेत्र में अलग-अलग ग्राम पंचायतों में तेंदुआ देखे जाने की सूचना से दहशत व्याप्त होती रही 
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आज का सफ़र यहीं तक 
@अनीता सैनी 'दीप्ति'  

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर और सार्थक चर्चा प्रस्तुति।
    @अनीता सैनी 'दीप्ति' जी आपका आभार।

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  2. बहुत ही सुंदर लिंक्स का समायोजन किया है आपने अनीता जी, मेरी पोस्ट "तेंदुआ कहाँ गया-शामली" को चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏

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  3. सुप्रभात! सराहनीय सूत्रों का चयन, सुंदर चर्चा प्रस्तुति!

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  4. सुंदर लिंक्स

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  5. उम्दा लिंको से सजी लाजवाब चर्चा स्तुति
    मेरी रचना को यहाँ स्थान देने हेतु दिल से आभार एवं धन्यवाद अनिता जी !

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  6. बहुत सुंदर सराहनीय अंक।

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  7. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  8. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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