समर्थक

Saturday, June 19, 2010

ख़ुशबू के छोड़ें फव्वारे! (चर्चा मंच - 189)



नन्हे-मुन्ने, प्यारे-प्यारे!
इस दुनिया में सबसे न्यारे!
हम सब की आँखों के तारे!
ख़ुशबू के छोड़ें फव्वारे!
जिन्हें देख मन कहता गा रे!
जिनके मन में शक्करपारे!
जो हैं सबके राजदुलारे!


कोई कुछ भी कहे,

पर इस दुनिया में सबसे प्यारी

और न्यारी

तो

बच्चों की फुलवारी ही होती है,

क्योंकि यह फुलवारी हमारे

मन को ख़ुशियों के फव्वारे से सराबोर कर देती है!

-----------------------------------------------------------------



आशू अंकल की तरफ से मेरा प्यारा-सा चित्र : पाखी!




एक बार कछुए ने खरगोश को पता है क्या बोला?
और
एक पिल्ले ने अपना गृहकार्य कैसे पूरा किया?




बारिश में इशिता की मनपसंद मस्ती!






बैंकॉक के सफ़ारी वर्ल्ड की सैर कीजिए आदित्य के साथ!




पितृ-दिवस पर चुलबुल का उपहार!






कैसे जन्म हुआ रसगुल्ले का? आइए पता करते हैं!






और अब मिलते हैं उससे, जो बच्चों को सबसे ज़्यादा प्यार करती है!

image





संगीता स्वरूप जी ने एक और मनभावन शिशुगीत रचा है!






माधव ने तो अपने घर की पुताई ही कर डाली !






- एक ख़ुशख़बरी -


आनेवाले रविवार यानि कल से प्रत्येक रविवार को


पर भी नन्हे साथियों की ऐसी ही रंग-रँगीली चर्चा मेरे द्वारा की जाएगी!


17 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ............बेहद उम्दा चर्चा ! आभार !

    ReplyDelete
  2. बढ़िया प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. मनोहारी और रंगबिरंगी चर्चा अच्छी लगी , रसगुल्ले देख कर रहा नहीं गया और सुबह सुबह बेटी से आपने डांट डलवा दी, ऐसे फोटो नहीं लगाना चाहिए ! शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति... और ये माधव भाई सारा घर पेंट कर डालेंगे क्या ?

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  8. बज़ (Buzz) से इंदु पुरी गोस्वामी की
    एक बहुत ही मर्मस्पर्शी और प्रभावशाली टिप्पणी --

    indu puri goswami –

    माँ कहती है चरा बकरियाँ
    बापू कहता दो पैसे कमा
    होटल मे कप प्लेटे धो या
    प्लास्टिक,लोहा बीन के ला

    19 Jun 2010

    ReplyDelete
  9. भाई सतीश जी,
    रसगुल्ला खाने पर तो आवाज़ तक नहीं होती!
    --
    रसगुल्ला अगर हल्ला-गुल्ला करके खाएँगे,
    तब तो ऐसा ही होगा!
    --
    फिर भी मैं आपकी बात का ध्यान रखते हुए
    अब ऐसे फ़ोटो नहीं लगाऊँगा!
    --
    इस बार रसगुल्ले का नहीं,
    इमरती का फ़ोटो लगाने की तैयारी है!

    ReplyDelete
  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति....

    ReplyDelete
  11. very nice presentation. you are just rocking. we all are very greatful to you for your generous contribution

    ReplyDelete
  12. hamesha ki tarah bahut sundar charhca...ek manbhavan charcha aur padhne milegi ye to sabse pyara surprise gift raha...ab to Saturday ke saath saath sunday bhi baal divas ban jayega... :)

    ReplyDelete
  13. शुभम् जी,
    "सरस पायस" पर पहली "सरस चर्चा"
    प्रकाशित होने में अब कुछ ही देर बची है!
    --
    यह मध्यरात्रि के तुरंत बाद
    12 : 01 AM पर प्रकाशित हो जाएगी!

    ReplyDelete
  14. कित्ती प्यारी चर्चा है...मजेदार. 'पाखी की दुनिया ' की चर्चा के लिए विशेष आभार !!

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin