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Monday, June 28, 2010

कुछ ख्याल कुछ हकीकत्…………चर्चा मंच-198

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चर्चाकारा --------वन्दना गुप्ता
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दोस्तों,
हाजिर हूँ सोमवार की चर्चा के साथ्………………कोशिश करूँगी ज्यादा से ज्यादा लिंक्स आप तक पहुँच सकें…………………लीजिये हाजिर है आज की रंग-बिरगी चर्चा नये -पुराने लिंक्स के साथ।

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posted by जसबीर कालरवि - हिन्दी राइटर्स गिल्ड at जसबीर कालरवि - हिन्दी राइटर्स गिल्ड - 4 hours ago
तुम जीत ही गयी ....... मुझे खेलना नहीं आता मैं जानता हूँ ... बस खेलते हुए खेल खेल में हार जाता हूँ मैं ..... पर तुम ?? हर वार जीत जाती हो तुम ... यानि कौन ? बहुत चिहरे हैं इस तुम के पीछे सब के सब अप्पन...


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posted by Sadhana Vaid at Unmanaa - 14 hours ago
स्वप्न किसके सच हुए हैं ! रो न पागल क्या क्षणिक सुख से अपरिमित दुःख मुए हैं ! स्वप्न किसके सच हुए हैं ! भाव उर के बूँद बनने को मचल सहसा पड़े हैं, नयन शाश्वत बरसने को मेघ बन करके अड़े हैं, जल उठी है आग उर में ...

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posted by आशुतोष दुबे at हिन्दीकुंज - 17 hours ago
*काया जरा सी क्या मेरी थकी, अपने बच्चों को ही हम अखरने लगे, जिनकी खुशियों पे जीवन निछावर मेरा, मेरे मरने की घडियाँ वो गिनने लगे // * *मेरे मरने से पहले वो भूले मुझे**,* किन्तु, मेरी कमाई पे लडने लगे, ...


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23 मिनट पूर्व अपूर्ण... पर निपुण पाण्डेय
रहता था जब शहर के बीच में मेरी खिड़की से दिखती थी दूसरी खिड़की और बालकोनी से दूसरी बालकोनी घर के नीचे सड़क, बड़ी बड़ी गाड़ियाँ और आसमान तक बस बालकोनी और खिड़कियाँ ...कला
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2 घण्टे पूर्व राकेश शर्मा... पर rakeshindore.blogspot.com
[अभी गोवा से लौटा हूँ ,आप जानते हैं की गोवा सुंदर जगह है वहां एक समुद्र है जिसके तट गोवा को छूते हैं ,एक और समुद्र है मदिरा ,का जिसमें गोवा डूबा रहता है. खैर , आप ...समाज
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4 घण्टे पूर्व pragyan-vigyan... पर Dr.J.P.Tiwari
मुझे तलाश है जिसकी वर्षों से, दशकों से, इसलिए ढूंढ़ रहा हूँ उसे अनवरत लगातार, इतनी बड़ी दुनिया में, कहीं तो दिखेगी, कभी तो मिलेगी, वह मेरी 'स्वप्न सुन्दरी'. वह ...समाज
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4 घण्टे पूर्व शब्द-शिखर... पर Akanksha~आकांक्षा
हेलन कैलर का नाम हममें से बहुतों ने सुना होगा. अमेरिकी लेखिका, राजनीतिक कार्यकर्ता और प्रवक्ता हेलन कैलर पहली दृष्टिहीन व बधिर व्यक्ति थीं, जिन्होंने अपने ...समाज
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4 घण्टे पूर्व वीर बहुटी... पर निर्मला कपिला
कर्ज़दार अन्तिम कडी।अपने पति की मौत के बाद कितने कष्ट उठा कर बच्चों को पढाया प्रभात की शादी मीरा से होने के बाद प्रभात ने सोचा कि अब माँ के कन्धे से जिम्मेदारियों ...समाज


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4 घण्टे पूर्व मेरा सामान... पर गौरव सोलंकी
सब कुछ छिना जा रहा रेंगकर छिपकलियां होती जा रहीं ओझल दीवारों पर से उतरती पपड़ी के निशान किसी हिन्दी शब्द जैसे हैं जिसका अर्थ अभी इसी क्षण हम कुएं में फेंक आएंगे भूल ...कला
चिट्ठाकार


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रूपचंद शास्त्री "मयंक" जी के चित्र यू-टयूब पर बिना अनुमति के लगा लिये गये हैं ।
ये शास्त्री जी का लिंक है--------------
http://powerofhydro.blogspot.com/2010/06/blog-post_26.html
और ये यू -ट्यूब का लिन्क है--------------------


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8 घण्टे पूर्व poet_india... पर नवनीत पाण्डे
प्रेम जो भी करता है उसे अपना ही एक अर्थ देता है किसी के लिए राधाष्याम, मीरागिरधर, सोहनीमहिवाल, हीररांझा, ढोलामरवण है प्रेम किसी के लिए किसी को देखना भर प्रेम ...समाज
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11 घण्टे पूर्व viplove-diary of a revolutionary poet... पर विप्लव
सृजन, कुछ शब्दों का बस मेल नहीं यह तो सारी कल्पनाओं का जीवंत सार है एफिल, गीज़ा और मोनालिसा तो नमूने भर हैं सृजन में तो अनंत सा विस्तार है। बांध तो सृजन ...कला


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(1)'ब्लॉगवाणी' विलुप्त हुई, लग नही रहा, हरा भरा सा आज कलम(मेरी कलम) कुंठित हुई , लिख न पा रहा, जरा सा.(2 )ड्राइंग रूम में बैठ कर देखने लगा दूर दर्शन कार्यक्रम चल रहा ...समाज


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4 घण्टे पूर्व मथुरा... पर Dr. Ashok Bansal
वृन्दावन में मौजूद है एक ग्रन्थ समाधि अशोक बंसल कृष्ण की क्रीड़ा स्थली वृन्दावन में साधु-सन्तों की समाधियों के मध्य एक ऐसी अनूठी समाधि भी हैं जिसमें किसी ...समाज


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4 घण्टे पूर्व PP's blog... पर Pushpesh
आसमान की ओर तकते उस किसान का चेहरा उदास है कभी हरी भरी इस धरती को फिर से कुछ बूंदों की आस है लगी हैं आसमान में आँखे कि कब ये बादल गरजेंगे फिर लहलहायेंगी वो फसलें झूम ...समाज


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55 मिनट पूर्व Apne Vichar... पर Udit bhargava
बच्चे के फेवरेट रंग सिर्फ उसकी पसंद या नापसंद नहीं होते, ये उसकी पर्सनैलिटी के बारे में भी बताते हैं। हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा दुनिया ...समाज
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posted by हरकीरत ' हीर' at हरकीरत ' हीर' - 2 hours ago
मैं हैरान थी ....रंगों ने पानी में कई सारी चूड़ियां सी बना रखी थीं ....मैंने छुआ तो हाथों को राह मिल गई ....ख्यालों ने रंगों की चूड़ियां पहनी और बदन खिल उठा ....मैंने ऊपर देखा ....सामने वही परिंदा था जिसे ...





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मोहब्बत के पंख कतरे पड़े थे
posted by वन्दना at ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र - 40 minutes ago
मोहब्बत के पंख कतरे पड़े थे हैवानियत के अब ये सिलसिले चले थे आन के नाम पर मिटा दिया था गुलों को ये किस मज़हब के बाशिंदे थे अभी तो परवाज़ भी भरी ना थी परिंदों ने सैयाद ने जाल फैला दिया था सिर्फ नाक बचाने ..

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दोस्तों 
आज के लिये बस इतना ही………………अगले सोमवार फिर मुलाकात होगी एक नये अन्दाज़ मे……………उम्मीद है आज की चर्चा आप सबको पसन्द आयेगी। अपने विचारों से अवगत करायें।

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19 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा!
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    मेरा सुझाव है कि पोस्ट के साथ "...घण्टे पहले" को यदि हटा दिया जाए तो कोई हानि नही है!

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  2. बहुत सुन्दर चर्चा!

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  3. बहुत सुन्दर चर्चा....!

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  4. सुन्दर चर्चा ! 'स्वप्न किसके सच हुए हैं' को चर्चा में शामिल करने के लिए आपकी आभारी हूँ ! बाकी सारी लिंक्स भी बहुत सशक्त और सुन्दर हैं ! सधन्यवाद !

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  5. बहुत बढिया चर्चा !!

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  6. बहुत सुन्दर चर्चा!

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  7. बेहतरीन चर्चा....अच्छे लिंक्स देने के लिए आभार

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  8. wah, kitti shandar charcha..badhai.

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  9. रंग बिरंगी चर्चा.अच्छी लगी.

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  10. सुन्दर चर्चा..लिंक्स भी सुन्दर...

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  11. वंदना जी आपके चयन की दाद देती हूँ ....कई ब्लोगों पे गयी .....

    कुछ नए आये ब्लोगर बहुत अच्छा लिख रहे हैं ....!!

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  12. bahut sundar charcha ban padi hai...dhanywad...!!

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  13. बहुत सुन्दर रचनाओं का चुनाव कर चर्चा मंच सजाया है आपने |बधाई
    आशा

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  14. रंगों से सजी सुन्दर सी चर्चा!!
    आभार्!

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  15. चर्चा मे लिंक देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद! प्रायः सभी चर्चाओं का आनन्द लिया। सभी लेख/आलेख/कवितायें बहुत ही शानदार व जानदार हैं। मगर इस चर्चा मे उन्हे प्रस्तुत करना और भी जानदार हैं बहुत बहुत बधाई।

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