चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Thursday, May 05, 2011

गुलदस्ता फूलों का…………चर्चा मंच


दोस्तों
वीरवार की चर्चा में
आपका स्वागत है  
 चर्चा मंच सज चुका है
बस आप इस गुलदस्ते में से
अपनी पसंद के फूल चुनिए
और उसकी खुशबू में 
सराबोर होइए    
प्रभु को तो ताज़ा फल देना चाहिए 


और रोने पर दिल हँसता है 


बिलकुल रहोगी याद 


 ये हैं जीवन के रंग


 रह गए हम अकेले


 किसकी ?


 लीजिये आनंद शायरी का 


मुस्कुराने की .......ज़ख्म खाने की 


फिसलती दोनों ही हैं 


निश्चित होना चाहिए 

हमेशा करना चाहिए 


 

जहाँ नाम नहीं होता
वहीँ आवाज़ होती है


  उसमे इतनी उदासी क्यूँ?



 यही दोगलापन अब बदलना होगा  




 किसी की मोहब्बत में दीवानी हुयी जाती है  


 ताकि भर न सकें 


 यही दस्तूर है
  • अब मिलेंगे सोमवार की चर्चा में 
    तब तक आप अपने विचारों से 
    अवगत कराकर हमारा 
    उत्साहवर्धन करते रहिये  

28 comments:

  1. श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

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  2. बहुत उम्दा लिंक मिले....आभार.

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  3. वंदना जी नमस्कार
    सुबह सुबह फूलों का गुलदस्ता ...और उसमे मेरे भी फूल ......!!!!!
    आपने दिया ...मैंने लिया ....
    बहुत खूबसूरत गुलदस्ता है ....!!!
    आभार ..आभार ....आभार ...!!!

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  4. प्रणाम वंदना जी आपने मेरी लिखी लघु कथा को चर्चा मंच पे प्रस्तुत किया बहुत बहुत शुक्रिया
    और भी अच्छे लोगों की रचनाएँ पढने को मिली आभार आपका

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  5. sarahniy prayas ,sanyamit sanyojan,
    sargarbhit sankalan ,sampadan .sadhuvad ji.

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  6. वीरवार की चहकती-महकती चर्चा के लिए आभार!

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  7. नित नई नवीन खुशबू से भरा ये गुलदस्ता बहुत ही ताज़गी प्रदान करता है हमेशा । शुक्रिया

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  8. ek acchi charcha jisme kuch gambhir vishayon par bhi likhi gayi rachnaye padhne ko mili..
    iske liye aapka aabhaar...

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  9. बहुत सुंदर लिंक ........ आभार जगह देने का वंदनाजी

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  10. बहुत उम्दा लिंक और बहुत खूबसूरत गुलदस्ता...
    चर्चा के लिए बहुत आभार.....

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  11. बहुत सारे लिंक मिले एक जगह पर , अब मेहनत तुम करो और फिर चर्चा में सजा कर हमें पेश करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

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  12. संक्षिप्त व्याख्या करके आपने शानदार ब्लॉग चर्चा की है।
    बहुत ही चुने हुए लेख पढने को मिले।

    मेरे आलेख
    सुज्ञ: जीवन का लक्ष्य
    को सम्म्लित करने का आभार!!

    शुभकामनाएँ

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  13. खूबसूरत फूलों से सुगन्ध भरे गुलदस्ते की चर्चा दूर तक ...!

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  14. वंदना जी, बहुत-बहुत आभार इस बेहतरीन चर्चा के लिये शुभकामनाएं ।

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  15. बढ़िया लिंक मिले! मेरी शायरी चर्चामंच पर शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

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  16. वंदना जी आप का धन्यवाद जो आपने मेरी कविता को चर्चा मंच में सामिल किया और इसका लिंक दे कर नए पाठकों तक मेरी रचना पहुंचाई .मैं आपका आभारी हूँ --अनंत

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  17. गज़ब का गुल्दास्त्ता सजाया है. एक एक फूल शानदार
    आभार बहुत बहुत.

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  18. bandana ji sadar namaskar...dhanybad...ek baar fir aapne mere post ko select kia charcha manch pe...aabhar....bhut khubsurti se laybadh karke aapjo andaj me chrcha karti hai...kabile ttarif hai..badhai

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  19. बहुत उम्दा लिंक्स। शुक्रिया।

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  20. बहुत ही खूबसूरत गुलदस्ता....वन्दना जी . एक साथ इतने फूलों की सुगंध हम तक पंहुचाने और मेरी रचना को कई लोगों तक पंहुचाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

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  21. आज का गुलदस्ता बहुत ही अच्छा सजा है वंदना जी..सुबह से ही आज...फूलों की खुसबू से चर्चा मंच का आँगन महक रहा है....
    मुझे भी इस घर में जगह देने के लिए धन्यवाद !

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  22. विभिन्न फूलों से सजा गुलदस्ता मनभावन सुगंध लिए हुए .....उम्दा चर्चा

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  23. बहुत ही खूबसूरत गुलदस्ता है. एक एक फूल शानदार हैअच्छे लोगों की रचनाएँ पढने को मिली आभार

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  24. बड़े अच्छे लिंक मिले इस चर्चा में, मेरी रचना को स्थान देने के लिए धन्यवाद

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  25. बहुत ही सुंदर और मनमोहक चर्चा।

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  26. Vandana ji , Beautiful charcha...thanks.

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  27. वंदना जी, रंग-बिरंगे फूलों की खुशबु से मह-मह महकता गुलदस्ता इस ग्रीष्म ऋतु में शीतलता का अहसास करा गया.....चुनिन्दा खुबसूरत लिंक्स से सुसज्जित गुलदस्ते के लिए आपको धन्यवाद.....

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