नमस्कार , लीजिए फिर आ गया मंगलवार ….और हाज़िर हूँ आपके सामने सप्ताह भर की काव्य रचनाओं को ले कर …इस बार लायी हूँ कुछ नए चेहरे …नए ब्लॉगर्स तो नहीं कहूँगी ..पर मेरे लिए नए हैं …क्यों कि शायद पहली बार जाना हुआ है उनके ब्लॉग्स पर ….सभी पाठकों से उम्मीद करती हूँ कि आप उन्हें ज़रूर प्रोत्साहित करेंगे … मई का महीना प्रारम्भ हो चुका है ..और १ मई को श्रमिक दिवस मनाया जाता है …आज हम चर्चा का प्रारम्भ कर रहे हैं श्रमिकों को समर्पित कविता से …. |
विचार पर मनोज कुमार जी की रचना -- ![]() दिन जीते जैसे सम्राट, चैन चाहिए कंगालों की।रहते मगन रंग महलों में, ख़बर नहीं भूचालों की। |
![]() कुंडलियों का मज़ा लीजिए और आई ० पी० एल ० में चलने वाली आंधी पर दृष्टिपात भी कीजिये .. "कुण्डलियाँ-चीयर्स बालाएँ" |
![]() शिक्षा...न्यायमंदिर ..तीस हजारी में फिलहाल कार्यरत...सफ़र जारी है...लिखना , पढ़ना शौक था..कब आदत बनी पता नहीं चला..अब हालात जूनून की हद तक पहुँचते जा रहे हैं....मुझे लगता है इतना काफ़ी है न..जान पहचान के लिये..फ़िर भी यदि आपको लगता है कि बात करनी जरूरी है तो फ़ोन नं भी है न...09871205767 मजदूर दिवस पर विशेष प्रस्तुति --- पहले बनाते हैं ...बाद में चलाते हैं |
![]() पढ़िए ज़िंदगी के फलसफे को -- ज़िंदगी पन्ने पलटती रही |
एक खूबसूरत ----गज़ल |
![]() पढ़िए इनकी एक खूबसूरत रचना -- और युगों सा बीत गये |
![]() पढ़िए एक गहन रचना --- वो स्त्री और चित्रकार |
![]() एक बेहतरीन रचना ---हम अपना सूरज लाये हैं |
![]() श्रीमती ज्ञानवती सक्सैना ‘किरण’ : जीवन परिचय ( साधना जी की नज़र से )माँ का जन्म 14 अगस्त 1917 को उदयपुर के सम्मानित कायस्थ परिवार में हुआ |मात्र 6 वर्ष की अल्पायु में ही क्रूर नियति ने माँ के सिर से नानाजी का ममता भरा संरक्षण छीन लिया और यहीं से संघर्षों का जो सिलसिला आरम्भ हुआ वह आजीवन अनवरत रूप से चलता ही रहा !माँ का जन्म जिस युग और परिवेश में हुआ उस युग में महिलाओं को सख्त नियंत्रण और पर्दे में रहना पड़ता था | ईश्वर का धन्यवाद कि उन्होंने माँ के अन्दर छिपी प्रतिभा को पहचाना ! ससुराल के रूढ़िवादी वातावरण से पिताजी ने उन्हें बाहर निकाला और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिये उन्हें समुचित अवसर प्रदान किये ! माँ ने गृहणी के दायित्वों को कुशलता से निभाते हुए अपनी शिक्षा के प्रति भी जागरूकता का परिचय दिया ! उन्होंने विदुषी, साहित्यलंकार, साहित्यरत्न तथा फिर बी. ए., एम. ए. तथा एल. एल. बी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं ! पढ़ने का शौक इतना कि होमियोपैथिक चिकित्सा में भी डॉक्टर की उपाधि प्राप्त कर ली !इलाहाबाद में अल्पावधि के लिये प्रयाग महिला विद्यापीठ में अध्ययन के दौरान श्रीमती महादेवी वर्मा तथा श्री हरिवंश राय बच्चन व अन्य मूर्धन्य साहित्यकारों के सान्निध्य में प्रोत्साहन पा साहित्य सृजन का यह अंकुर और पुष्पित पल्लवित हो गया --- अधिक जानकारी के लिए ---यहाँ देखें …किरण जी की रचना पढ़ें --तुमने तो भारत देखा है .. |
![]() पढ़िए इनकी गज़ल ---मेरा यार |
![]() प्यार में |
![]() पढ़िए इनकी रचना -- तलब |
एक खूबसूरत रचना --बसंत २०११ |
![]() उनकी एक मार्मिक रचना पढ़िए --गरीब की झोंपड़ी |
एक यथार्थ परक रचना पढ़ें …मौत के बाद |
![]() पेश है इनकी एक गज़ल बोलने के लिए कुछ बात बाक़ी है दिन गुज़र गए हैं मगर रात बाकी है |
यथार्थ को अभिव्यक्त करती एक रचना पढ़िए ---हकीकत |
![]() इनकी रचना को पढ़ा और सुना भी जा सकता है … नदी और साबुन |
प्रस्तुत है एक गज़ल -- शहर में इनदिनों आख़िर बहोत माहौल बदला है |
![]() Skills EDUCATIONALIST, poetry ; prose writer ; Music composer - Director ; Electric Guitar Player Interests - Alp-Gyan: SHABDA,SWAR,SANGEET AARADHANA, poetry ; prose writer ; Music composer - Director ; Electric Guitar Player.. इनकी एक संवेदनशील रचना पढ़िए …कफ़न |
![]() पढ़िए एक संवेदनशील रचना ----नागफनियों के बीच |
![]() एक सकारातमक सोच को पढ़िए --- एक कच्चे धागे पर निरंतर वो चलता है |
![]() एक बेहतरीन गज़ल -- होटों का वो शीरींपन आँखों के वो पैमाने. |
![]() अपने मन की पीड़ा को कुछ यूँ बयाँ कर रहे हैं -- खाई है सूखी रोटी |
![]() एक सकारात्मक सोच ले कर आए हैं ..चलने की ख्वाहिश |
![]() उनकी रचना का आनन्द लीजिए--- यही कम नहीं है |
खूबसूरत रचना ---कहना मैंने याद किया है ... |
![]() पढ़िए इनके ---स्वप्न |
![]() मत पूछो मुझसे की कब याद आते हो |
आशा है यह चर्चा आपकी उम्मीदों पर खरी उतरी होगी …. आपकी प्रतिक्रिया और सुझावों का हमेशा इंतज़ार रहता है … आज बस इतना ही ….फिर मिलते हैं …अगले मंगलवार को नयी चर्चा के साथ …नमस्कार …. संगीता स्वरुप |
sangeeta ji bahut achchhi tarah se aapne charcha manch ko unchaiyan pradan kee hain.manoj ji se lekar aur kuchh naye blogar ko sath lekar jo aapne santulan bloggars ke beech baithaya hai vah kabile tareef hai.badhai.
जवाब देंहटाएंहम तो नये चेहरों में अपना नाम खोजते ही रह गये. :)
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लगा सबसे मिल जान कर.
shukriyaa sangeeta aunty .......charcha me ek tarah ka nayapan tha is baar sabke intro k saath :) accha manch sajaya :)
जवाब देंहटाएंपरिचय के साथ अच्छी चर्चा ...कई तो काफी जाने -माने भी हैं!
जवाब देंहटाएंअच्छा लगा सब से मिलना और उनके बारे में जानना| धन्यवाद|
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर संकलन है संगीता जी , एक साथ इतने सारे लिंक्स सहेज कर पढने के लिए उपलब्ध करा दिए आपने । शुक्रिया
जवाब देंहटाएंएक साथ इतने सारे नये चेहरे ... कैसे ढूंढ पाती हैं आप?
जवाब देंहटाएं:)
आप कविता प्रेमी है। कई कवियों को पढ़ा। अच्छा लगा।
जवाब देंहटाएंसुँदर लिंक्स से सजी बेहतरीन चर्चा .बहुत सारे बेहतरीन रचनाओ को पढने का मौका मिला . आभार .
जवाब देंहटाएंइतने प्रतिभाशाली ब्लॉगरों के बारे में जानकर अछ्छा लगा।
जवाब देंहटाएंआदरणीय बहन सुश्रीसंगीताजी,
जवाब देंहटाएंआपका बहुत शुक्रिया एवं अनेकोनेक धन्यवाद ।
मैं हररोज़ चर्चा मंच की अद्भुत चर्चा का आनंद उठाता हूँ।
कई विद्वान साथी ब्लॉगर्स के बारे में जानकर बहुत अच्छा लग रहा है।
मार्कण्ड दवे।
चर्चा मंच पर मुझे खड़ा करके मुझे आपने बहुत इज्ज़त दी है. आपका आभारी रहूँगा.
जवाब देंहटाएंये संकलन बहुत सुन्दर है. सही नए और पुराने चेहरों को बहुत बहुत बधाई.
बहुत अच्छा लगा चर्चा मंच का यह अंक----कफ़ी नये लोगों से परिचय हुआ---उम्मीद है आगे भी यह चर्चा जारी रहेगी। मेरी शुभकामनायें।
जवाब देंहटाएंहम कब से पुराने हो गए ?अजी हमारा नाम नही है ?
जवाब देंहटाएंसभी रचनाएं अच्छी लगी
जवाब देंहटाएंमजदूर दिवस पर लिखी गयी रचनाएँ विशेषकर ...
सभी नवागंतुकों को बधाई है ...
मुझे प्रोत्साहन देने के लिए और
मेरी रचना को शामिल करने के लिए ह्रदय से आभार ....
संगीता जी ने बहुत अच्छी रचनाओं का संकलन किया
जो ज्वलंत विषयों पर लिखे गए थे...
सदा की तरह बहुत सुन्दर, सुगठित और सुचयनित सदाबहार चर्चा संगीता जी ! मंगलवार के साप्ताहिक काव्य मंच का इंतज़ार रहता है ! कई बेहतरीन रचनाएं पढ़ चुकी हूँ ! जो शेष रह गयी हैं उन्हें दिन में पढूँगी ! आपके सुरुचिपूर्ण चयन को नमन !
जवाब देंहटाएंसंगीता जी, आपका बहुत-बहुत आभार आपने 'सदा' को चर्चा मंच में शामिल किया ... बहुत ही अच्छे लिंक्स हैं आपके संयोजन में सभी से मिलकर, उनके बारे में जानकर अच्छा लगा ... शुभकामनाओ के साथ ... ।
जवाब देंहटाएंसंगीताजी
जवाब देंहटाएंआपने चर्चा मंच पर हमारी ग़ज़ल का जो लिंक दिया.साथ ही हमारी तस्वीर के साथ ब्ल़ाग जगत को जो हमारा तअरुफ़ कराया उसके लिए हम आपके शुक्रगुज़ार हैं.
आदरणीया संगीता जी ,
जवाब देंहटाएंप्रणाम स्वीकारें
आज का साप्ताहिक काव्यमंच आप द्वारा बहुत ही मन से , बड़ी सुन्दरता के साथ सजा-सँवारकर प्रस्तुत किया गया है जो बरबस ही मन को बाँध लेने में समर्थ है | सभी रचनाकारों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उनकी रचनाओं की लिंक दी गयी है |
आपने मुझे स्थान दिया , ह्रदय से आभारी हूँ | सभी रचनाकारों एवं उनकी रचनाओं के बारे में इतनी सार्थक चर्चा सराहनीय है |
Sangeeta ji , aaj ki charcha to parichy ke sath saji hai ...aapne hame shamil kiya , shukriya ....
जवाब देंहटाएंआज तो पूरा दिन व्यस्त कर दिया आपने.नए चेहरे वाकई नए लगे .
जवाब देंहटाएंसुन्दर सार्थक चर्चा.
बहुत सुन्दर लगा चर्चा का यह नया रूप..आभार
जवाब देंहटाएंAdarniya Sangeeta ji,
जवाब देंहटाएंMujhe khusi hai ke main is manch par apni upasthiti darz kara saka...meri kavitaon ko padhne, sarahne aur pracharit karne ke liye bahot bahot dhanyavaad.
aabhar,
Chakresh.
बहुत ही सुंदर और विस्तृत चर्चा....बहुत से लिंक्सों के साथ ही नये चेहरों से रंगी ये चर्चा लाजवाब लगी।
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर और सार्थक चर्चा की है …………काफ़ी नये लिंक्स मिले……………आभार्।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लगा नए चेहरों से मिलकर ......
जवाब देंहटाएंधन्यवाद संगीता जी
चर्चामंच में जाने माने ब्लोग्गर्स के बीच नए ब्लोग्गर्स का परिचय और लिंक्स के साथ चर्चा बहुत सार्थक लगी...आपकी यह चर्चा बहुत अच्छी लगी.. आभार
जवाब देंहटाएंआज की चर्चा देखकर तो मन प्रसन्न हो गया!
जवाब देंहटाएंनये-पुराने ब्लॉगरों को एक मंच पर देखकर
सुख की अनुभूति हुई!
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आपसे मिलने की इच्छा तो अधूरी ही रह गई!
काश् आप एक फोन ही कर देतीं मुझे।
दिल्ली जाना सफल हो जाता!
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सम्मान/पुरस्कार पाने की आपको बहुत-बहुत बधाई!
बहुत अच्छी थी आज की चर्चा । आपने नए चेहरों में मुझे भी शामिल किया , आभारी हूँ । धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ ।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर लिंक के साथ मेहनत से तैयार की गई उत्तम चर्चा।
जवाब देंहटाएंदीदी...लेटलतीफ का प्रणाम स्वीकार करें....मगर इसका यह मतलब नही कि मैं कल आया ही नही...कल आया, चर्चा मंच पर भी पहुंचा और फिर लिंक्स के साथ लिंक्स...जुड़ते गए और..वापस आता था एक नया लिंक्स क्लिक करके फिर वापस....आज ध्यान आया कि नातो दीदी को थैंक्स बोला और शायद नही वहां कुछ लिखा मैंने !
जवाब देंहटाएंकान पकड़ के उठा बैठी करके सारी दीदी.......और थैंक्स भी ..इस बार अंदाज और स्थान दोनों बदला हुआ था !
naye chehro me purane chehre dhumil ho jaye aisa bhi na ho......
जवाब देंहटाएंsunder prayas.
सभी पाठकों का आभार ...
जवाब देंहटाएं@@ समीर जी ,
आप नए चेहरों में अपना खोजेंगे तो ...हम तो अभी ज़मीं से भी नहीं उगे हैं ...वैसे हमेशा ही आपका चेहरा नया तरोताजा लगता है :):)
@@ दर्शन कौर जी ,
अरे आप तो स्थापित ब्लॉगर हो गयी हैं ...बिल्कुल पुराने चावलों की तरह ...अलग ही खुशबू आती है :):)
@@ अनामिका जी ,
चिन्ता न करें ..पुराने चेहरे तो अपने आप ही चमकते रहते हैं ....उनको धुंधला करने वाली मैं कौन ...चर्चा मंच पर यदि उन्ही लोगों का परिचय कराया जाता रहे जिनसे काफी लोग परिचित हो गए हैं तो हमारे नए ब्लॉगर्स साथियों का क्या होगा ? सोचने वाली बात है न ....
संगीता जी ... आपका बहुत बहुत धन्यवाद ..मेरी पोस्ट को चर्चा में जगह मिली... और आपकी चर्चा हर बार की तरह उत्कृष्ट ... परिस्थितयों की वजह से मैं नेट में आने में समर्थ नहीं हो पा रही हूँ अतः इस विलम्ब के लिए क्षमा करेंगी... कैसें है आप.. :) और आपको बधाई आप पुरुस्कृत हुवीं
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