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Tuesday, May 10, 2011

पुरानी कमीज़ , चाय और बहुत बात हुई … साप्ताहिक काव्य मंच - 45 चर्चा मंच - 511

नमस्कार , लीजिए मंगलवार आ गया और मैं ले आई हूँ आपके लिए अपने पसंद की कुछ रचनाएँ … मातृत्व दिवस के उपलक्ष में काफी रचनाएँ माँ से सम्बंधित पढ़ीं …कुछ यहाँ भी आपको मिलेंगी …माँ के प्यार से सराबोर रचनाएँ … आज इंसान के पास वक्त नहीं है  …हर कोई अपने में गुम है  ..फिर भी निकाल लेता है वक्त नफरत के लिए … आज ऐसी ही रचना से  चर्चा मंच का प्रारम्भ करते हैं …
  गिरीश पंकज जी  बस्ती में ढूँढ रहे हैं प्यार मुहब्बत …पर उनको मिला क्या ? यह पढ़िए उनकी गज़ल में ---नफ़रत ही नफ़रत बस पाए बस्ती में...
आ कर हम बेहद पछताए बस्ती में
कितने हो गए लोग पराए बस्ती में
पानी तक के लिए नहीं पूछा सब ने
पता नहीं क्या सोच के आए बस्ती में
मेरा फोटो  रश्मि प्रभा जी लायीं हैं समय के चाक पर गढती जिंदगी …पाठकों के नाम …दवा 2.5 mg का
समय अपने चाक पर
मुझे घुमाता गया
तेज तेज बहुत तेज
गडमड गडमड चेहरे
खुद से परेशान खुद में लीन
इधर उधर जिधर देखा यही नज़र आया
My Photo  शिखा वार्ष्णेय  प्रेम की गहन अनुभूति को महसूस कराती  एक रचना लायीं  हैं …पुरानी कमीज़
कल रात
किवाड़ के पीछे लगी खूंटी पर टंगी
तेरी उस कमीज पर नजर पड़ी
जिसे तूने ना जाने कब
यह कह कर टांग दिया था
कि अब यह पुरानी हो गई है.
My Photo  प्रतिभा कटियार जी  कह रही हैं कि ज़रूरत से ज्यादा पाने की चाह -सच तो ये है कि  कसूर अपना है 
सच तो ये है कुसूर अपना है ...
चाँद को छूने की तमन्ना की
आसमा को जमीन पर माँगा
   मनोज ब्लॉग पर श्यामनारायण मिश्र जी की रचना का आनन्द लीजिए …एहसासों का चौरा  दरका
कौन करे दिये-बत्तियां
तुमने जो लिखी नहीं
मैंने  जो   पढ़ी   नहीं
        आंखों में तैर रहीं चिट्ठियां।
  पी० बिहारी “ बेधड़क “ चाय की खासियत बता रहे हैं --
गम को कम करने की शायद
मुफीद जगह है चाय खाना,
जहाँ लेन-देन के मामले तय होते हैं,
बनती चाय महज बहाना.
    चाय की चुस्की लेकर अटका कार्य ,
    पुन: सरकने लगता है
मेरा फोटो अरुण सी० राय जी को दिख जाती है छवि माँ की --सीधे पल्ले की साड़ी में
जब भी
पहने देखता हूँ तुम्हे
सीधे पल्ले की
साड़ी
लगता है
मानो कोई आम का पेड़
लकदक  है
पीले और रसीले
आमों  से और  
गढ़ रहा  हैं
नया सूत्र
प्रतिभा सक्सेना जी की कविता मुक्ति में पढ़िए एक माँ के मन की भावनाएं -
कोई एहसान नहीं किया हमने तुम पर !
यह तो तुम्हारा अधिकार था और हमारा कर्तव्य !
पीढियों का ऋण चढा था जो हम पर ,
उतार, दिया तुमने आनन्द और सुख !
आभार तुम्हारा !
आत्मज मेरे !
एस० एम० हबीब  कह रहे हैं  " माँ तुझसे दूर हम किधर जायेंगे "

टुकड़ों में टूट कर
बिखर जायेंगे,
मां तुझसे दूर
हम अगर जायेंगे...
My Photo  हरीश भट्ट जी माँ के प्रति अपनी भावनाओं को कुछ यूँ बयाँ कर रहे हैं ..
मेरे छोटे से घर से ही मेरी दुनियां अयाँ होती हैं
मैं इक कमरे मैं होता हूँ  पूरे घर मैं माँ होती हैं
मेरी दुश्वारियां भी उसकी दुआओं  से डरती हैं
मेरा हर दर्द सो जाता हैं तब जा के माँ सोती हैं
मेरा फोटो  अतुल प्रकाश त्रिवेदी  जी ने बातों - बातों में सारे जहाँ की बात समेट ली है …पढ़िए उनकी रचना ---
बहुत बात हुयी

एक  अजनबी से मुलाकात हुई
बहुत बात हुई .
देश दुनिया की
घर द्वार की
ख़बर अखब़ार की
बूढ़े लाचार की
अपंग की लाठी की
पहलवान की काठी की
मेरा फोटो  आशा जी लायीं हैं एक बहुत संवेदनशील रचना --भावना असुरक्षा की
है बेचैन असुरक्षित
अपनी राह तलाश रही
जीवन की शाम के
लिए आशियाना खोज रही |
अपनों ने किनारा किया
बोझ उसे समझा
बेगानों में अपने पन का
अहसास तलाश रही |
  रंजन ज़ैदी जी की रचना पढ़िए …परिवर्तन
बोली बदली, भाषा बदली,
बदले आँचल और परिवार. /
पगडंडी ने सड़क पकड़ ली,
गावों ने खोये आकार
My Photo महेश्वरी कनेरी जी पूछ रही हैं कि ---
किसी को फूट्पाथ में भी
गहरी नींद सोते देखा,
किसी को नरम गद्दों पर
करवट बदलते देखा ।
किसी को पेट में भूख लगती है
किसी की आँखों में भूख दिखती है।
Vandana Singh वंदना सिंह वाग्वैभव  पर एक विचारणीय रचना लायी हैं …अर्थ की तलाश में
नदी की तरह

पर्वतों से समंदर तक
एक तयशुदा रास्ता
हर कोई बह लेता है
मेरा फोटो राजीव भरोल जी की खूबसूरत गज़ल …
तुम्हारी सोच के सांचे में ढल भी सकता था,
वो आदमी ही था इक दिन बदल भी सकता था.
हमारा एक ही रस्ता था एक ही मंजिल,
वो चाहता तो मेरे साथ चल भी सकता था.
My Photo    अखिल जी की एक गज़ल पढ़िए --अब क्या मतलब है रूठ जाने का

अब क्या मतलब है रूठ जाने का,
वक़्त मिलता नहीं मनाने का.
ए हवा सुन मेरा इरादा है,
चाँद को रात भर जगाने का.

  एस० डी० एम० सिंह जी की बेहतरीन  -
सिर्फ ज़रा सी जिद की खातिर अपनी जाँ से गुज़र गए,
एक शिकस्ता किश्ती लेकर हम दरिया में उतर गए !!
तन्हाई में बैठे बैठे यूँ ही तुमको सोचा तो,
भूले बिसरे कितने मंज़र इन आँखों से गुज़र गए !!
images (13)  मौन काव्य पर मंजु जी दे  रही हैं ---
मदर्स डे के अवसर पर माँ की ओर से बेटी को धन्यवाद !
मेरे घर में मेरे दिल में
मेरी आँखों के ख़्वाबों में
मेरे खुशबू मेरी सांसों
बहारों में चराग़ों में //
मेरा फोटो  विशाल जी लाये हैं
जुगनू
   दिन के उजाले में
जो जुगनू
                               तेरी आँखों से
                               निकल भागे थे
                             रात के अंधेरों में
                           मेरा पीछा
                         किया करते हैं
                      मुझे सोने नहीं देते
  काव्य मंजूषा  पर स्वप्न शैल “ अदा “ जी लायीं हैं एक खूबसूरत नन्ही सी नज़्म …तू मेरे ज़हन-ओ-दिल पर, कुछ इस तरहां तारी है...
तू मेरे ज़हन-ओ-दिल पर,
कुछ इस तरहां तारी है,
ख़ुश्बू लगाऊं कोई, 
लगती वो तुम्हारी है,
My Photo    कुमार देव  की रचना अपनी पहचान ...
तोड़ दो सारे बंधनों को,
रस्मो को रिवाजों को,
बदल दो दिशा अपनी,
बदल दो पहचान अपनी,
अवधारणा को बदलो.....
My Photo आलोकिता अपना हौसला बनाए हुए कह रही हैं कि --मुझे आदत नहीं.... यूँ हार जाने की

आदत हो चुकी हैं गम  को पी जाने की
आती नहीं अदा... खुशियाँ छिपाने की


हंस जो देती हूँ.......... जरा खुश होकर
नज़र लग ही जाती है....... ज़माने की
My Photo  अनुपमा त्रिपाठी जी बसुंधरा को बसुंधरा की नज़र से  तराश रही हैं
सूरज की परिक्रमा करती ...
                       साथ-साथ घूमती ...
                      अपनी  धुरी   पर  भी .....
                         मैं धरा हूँ .......
मेरा परिचय  आज की चर्चा का समापन मैं डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की एक खूबसूरत रचना के साथ करना चाहूंगी ..जो आज के समय में युवकों को अच्छा सन्देश और सीख दे रही है …दामन बचाना  चाहिए
इन दरिन्दों से सदा दामन बचाना चाहिए।
अब न नंगे जिस्म को ज्यादा नचाना चाहिए।
हुस्न की परवाज़ तो थम ही नहीं सकतीं कभी,
पंख ज्यादा जोश से ना फड़फड़ाना चाहिए।
आशा है आपको यह संकलन पसंद आया होगा … आपकी प्रतिक्रिया और सुझावों का सदैव स्वागत है … फिर मिलते हैं अगले मंगलवार को नयी चर्चा के साथ … नमस्कार --- संगीता स्वरुप

36 comments:

  1. संगीता जी, बहुत अच्छा संकलन है. बहुत अच्छे अच्छे ब्लॉग और अच्छे अच्छे पोस्ट पढ़ने का मौका मिला.

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  2. sidhahast hanthon ka supachya sakalan
    madhur aur manohari hai .bahut sunder rachana sansar ,bha gaya man ko ji .
    sadaiv swagat.....

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  3. बहुत मेहनत से बुनी हुई पोस्ट.
    सभी लिंक बहुत बढ़िया हैं.
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार.

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  4. सुन्दर लिंकों से हुआ, प्रातराश भी लंच।
    "संगीता" की महक से, महका चर्चा मंच।।
    --
    बहुत सुन्दर मन लगा कर की गई श्रमसाध्य चर्चा!
    आभार!

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  5. सगीता जी नमस्कार ....!!
    प्रभु कृपा...!! चर्चा - मंच पर आज बहुत सुंदर संकलन हैं -आपका आभार.....!!! इस अपार सौंदर्य का मैं एक छोटा सा हिस्सा बनी ....!!!!!
    बहुत सुंदर लिनक्स .

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  6. सगीता जी नमस्कार ....!!
    प्रभु कृपा...!! चर्चा - मंच पर आज बहुत सुंदर संकलन हैं -आपका आभार.....!!! इस अपार सौंदर्य का मैं एक छोटा सा हिस्सा बनी ....!!!!!
    बहुत सुंदर लिनक्स .

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  7. बहुत खुबसुरत चर्चा -मंच आपने सजाई हे --मन प्रसनं हो गया ---बधाई !

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  8. संगीता जी , मेरी रचना नियमित पढने के लिए धन्यवाद . नाम में त्रिवेदी की जगह द्विवेदी हो गया है . समय मिलने पर सुधार लेवें - आग्रह है . प्रस्तुति के लिए बहुत बधाई और आभार .

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  9. अतुल जी नाम ठीक कर दिया है ...त्रुटि सुधरवाने के लिए आभार

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  10. खूबसूरत और उम्दा कविताओ के लिंक्स मिले . मंगलवार का विशेष इंतजार हमेशा पुरसुकून देता है . हमेशा की तरह सराहनीय चर्चा .

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  11. मेरी रचना को अपनी चर्चा मे शामिल किया इसके के लिये बहुत –बहुत धन्यवाद । चर्चामंच हम जैसे नवीन लेखकों के लिए उर्जा का काम कर रही है, येसा मेरा विश्वास है । आज की चर्चामंच ्की खुशबू को हृदय में भर लिया आभार सहित धन्यवाद ।

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  12. kitane hi sarthka blogaro ke link mile. ab in tak pahunchana hai. aapke kaam ko pranaam itana samay nikalana hi yah batata hai ki aap pavitra hriday valee hain..

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  13. अच्छा संकलन ... अच्छे ब्लॉग ....

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  14. बहुत सुन्दर संकलन है…………काफ़ी अच्छे लिंक्स संजोये हैं…………सार्थक चर्चा।

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  15. हिंदी में लिखी जा रही खूबसूरत ग़ज़लों को सामने लाने के लिए बहुत शुक्रिया .

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  16. अच्छी लिंक्स से सजाया है आज का चर्चा मंच |बहुत अच्छा लगा पढ़ कर |कुछ पढ़ना बाकी है |
    आभारी हूँ कि आपने मेरी कविता को आज चर्चा मंच के लिए चुना |आज की चर्चा के लिए बधाई |
    आशा

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  17. बहुत ही अच्‍छी चर्चा ... ।

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  18. Di , is bar bhi aapne, pehle kitarha hi sixer mara he!, bahut bahut hi bejod sanklan kiay he aapne!
    aapke is mehnat ko salaam!

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  19. bahut accha sangita G
    badiya prayash hai

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  20. आपकी खोजी नजर और मेहनत की दाद देती हूँ. कुछ भी अच्छा नही छिपता आपसे.
    बहुत आभार सुन्दर चर्चा का.

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  21. आपकी मेहनत को नमन अच्छे पोस्ट पढवाने और मेरी रचना को भी इन मोतियों में स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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  22. achi rachnaon ko sammilit karke rachnakaaron ko protsaahan dene ke liye aaapka bahut aabhaar sangeeta ji...
    good wishes ...

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  23. बहुत खूब , धन्यवाद जी मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ
    http./anjaan45.blogspot.com

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  24. बहुत खूब , धन्यवाद जी मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ
    http./anjaan45.blogspot.com

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  25. चर्चा - मंच पर आज बहुत सुंदर संकलन हैं - खासतौर पर अरुण रॉय जी की एक माँ को समर्पित कविता "सीधे पल्ले की साड़ी में " बहुत पसंद आई. स्तरीय रचनाओं को पढवाने के लिए आभार .

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  26. धन्यवाद जी, मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ तो मेरा मार्गदर्सन करे..
    www.anjaan45.blogspot.com

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  27. धन्यवाद जी, मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ तो मेरा मार्गदर्सन करे..
    www.anjaan45.blogspot.com

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  28. बहुत सुन्दर संकलन है...
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार...

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  29. Bahut sundar lagi aaj ki charcha kuchh bahut pyare se posts bhi mile yahaan se padhne ko wakai maza aa gaya aaj :)

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  30. बहुत सुंदर बिभिन रचनाओं से सजा गुलदस्ता आपने चर्चा -मंच में पेश किया है .पढकर बहुत अच्छा लगा /बहुत बहुत बधाई आपको /

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  31. बहुत सुन्दर संकलन ...अच्छे ब्लॉग लिंक्स के लिए आभार.

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  32. संगीता जी, सभी रचनाएँ एक से बढ़ कर एक हैं.... एक जगह पर इतना कुछ पढवाने के लिए धन्यवाद. मुझे आपके चर्चामंच के संग्रह में स्थान देने के लिए आपका आभार

    सब को मदर्स दे के शुभकामनायें

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  33. चर्चामंच से जुड़े सभी लोगों का मेरे ब्लॉग www.pradip13m.blogspot.com में सादर आमंत्रण है ।
    कविता के क्षेत्र में मैं बहुत मंजा हुआ तो नही हूँ पर आप सबका प्रोत्साहन, शुभकामनाएँ और मार्गदर्शन चाहता हूँ ।

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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"स्मृति उपवन का अभिमत" (चर्चा अंक-2814)

मित्रों! सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...