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Monday, May 23, 2011

दुर्लभ चित्र के साथ खास चर्चा ……………चर्चा मंच

दोस्तों 
काफी दिनों से मन था कि कभी- कभी चर्चा में सिर्फ भगवद प्रेम की चर्चा ही की जाये .........संयोग से आज कुछ पोस्ट मिल गयी हैं तो सोचा क्यों न आज लीक से हटकर आप सबको कान्हा के नजदीक ले जाया जाये क्योंकि आजकल मैं भी उन्ही की कथा में जा रही हूँ शायद उसी का प्रभाव है ये ..........तो चलिए देर किस बात की ..........देखिये किस किस ने अपने भावों को कैसे उजागर किया है

सबसे पहले ........ये चित्र मुझे फेसबुक पर मिला जो की अत्यंत दुर्लभ है तो सोचा आप सबको भी इस चित्र का दर्शन कराये जायें

किशोरी जी तुम बिन चैन ना आये कान्हा बुलाये मन भरमाये तुम बिन चैन ना आये एक बार दर्शन करने को खुद वृन्दावन आये फिर भी चैन ना आये तुम्हारे चरणन के दर्शन को कान्हा भी दौडा आये प्रेम की गागर छलक - छलक जा...

यहाँ देखिये राकेश जी ने कैसे ज्ञान की गंगा बहाई हुयी है जो हम सबको आनंद के सागर में गोते लगवाते रहते हैं वर्ना इतना अनूठा ज्ञान तो बड़े बड़े सत्संगों में जाकर भी प्राप्त नहीं होता  

यह मेरे लिए अति आनंद की बात है कि प्रिय सुधिजनों ने * 'रामजन्म -आध्यात्मिक चिंतन*' पर प्रकाशित मेरी पिछली तीनों पोस्टों का अपनी आनंदपूर्ण टिप्पणियों से भरपूर स्वागत किया है. देवेन्द्र भाई का कहना है क...

यहाँ आप ओशो के दिव्या प्रवचनों से खुद को अभिभूत कर सकेंगे और अपने जीवन को कैसे सार्थक बनाया जा सके उसके बारे में जन सकेंगे 

जीवन तो एक शिला का तुकडा है-हमें ही मूर्तिकार बनना होगा,अपने पुरुषार्थ रूपी हथोडी व सपने रूपी छेनी से इसमें मूर्ति ढालनी होगी,तभी पत्थर के तुकडे की कीमत आंकी जा सकेगी. क्राइस्ट,बुद्ध,महावीर आदि ऐसे ही मूर्...

 यहाँ जानिए कैसे भगवन बुद्ध ने यशोधरा को जीवन रहस्य समझाया है जिन्हें हम सब कसौटी पर कसते रहते हैं मगर जीवन के अंतिम सत्य को न समझ पाते हैं 
बुद्ध का पत्र यशोधरा के नाम तुझे सोता छोड़ मैं आया था मन मेरा भी घबराया था. रह रह के मन फिर सोचता है औचित्य का प्रश्न कचोटता है. मन पर हठ का जोर लगाया व्रत उपवास का राह दिखाया. लेकिन चला न कोई जादू...

 यहाँ सुनिए शिव महिमा को 
लोक गीत के माध्यम से  
पिछले कुछ दिनों से मेरे रूममेट ने सुबह सुबह एक भजन चला कर बोर किया हुआ है | वैसे बाद में जब मैंने आवाज और बोल पर ध्यान दिया तो मुझे यह बेहद पसंद आया | "शेफेर्ड'स सोंग्स" नाम की यह एल्बम राजिंदर सिंह एंड पार्...

 जहाँ सब को पहुंचना है ये है वो तट मगर 
हम सब भटक रहे हैं 
कैसे हम सब भटके हुयों  को 
किनारा मिले और एकाकार हो जायें 
आइये करें उस परमेश्वर से एक करबद्ध प्रार्थना
*तुम * *सागर तट हो* *मैं हूँ **इक लहर,* *मेरी * *नियति है* *तुम्हारी बाहों में समाना* *आ कर तुम में* *मिल जाना,* *मैं * *इक लहर* *समर्पण करती हूँ* *अपना अस्तित्व तुमको* *तुम ही दोगे* *मेरे अस्तित्व को * *पहच..

आज हर इन्सान अशांत है और यदि शांति पानी है तो इस और भी ध्यान दीजिये की कैसे शांति प्राप्त हो सकती है इसके लिए आपको इस ब्लॉग पर जाना होगा और जानना होगा वो सहज तरीका  

http://4.bp.blogspot.com/-2X161QeVXzQ/TR8pmcVmy6I/AAAAAAAAHnY/t_veoDfSHh8/s1600/AIMG_0201.JPG
पूज्य गुरूदेव ! मानसिक अशांति का आधार क्या हे ?  महाराजश्री :  जब तक इंसान बच्चों जैसा भोलापन अपने अंदर रखता है उसके अंदर अशांति नहीं रहती  ...

यहाँ देखिये हुनमान जी के मन्त्रों का प्रभाव कैसे पड़ता है 


यहाँ दोहों के माध्यम से 
जीवन को सहज और सरल 
बनाने का तरीका सीखिए

कितनी सत्य बात है की किसी को बदलने से पहले उसे प्रेम करना सीखना होगा और उससे पहले खुद को भी प्रेम करना आना होगा तभी किसी पर हमारे विचारों का प्रभाव पड़ सकता है
 किसी के विचारों को बदलना है तो उन्हें प्रेम...


जब पुष्प वाटिका में राम और सीता का मिलन होता है तब
राम को देखकर के जनक नंदिनी
बाग़ में बस कड़ी की कड़ी रह गयीं
राम देखें सिया को सिया राम को
चारों अँखियाँ लड़ी की लड़ी रह गयीं   
मनुष्य कर्मों से बंधा है तो जैसे कर्म करेगा 
वैसा ही फल भी भोगना पड़ता है इस बात को
कितनी सहजता से समझया है यहाँ 
जरा देखिये तो
 कर्मफल अवश्य ही भोगना पड़ता है

हनुमान जी की मूर्ति का रंग लाल ही क्यों होता है
इसे बता रहे हैं विनय बिहारी जी   
हनुमान मूर्ति लाल रंग में 

ज्ञान पिपासुओं के लिए ये जानना बहुत जरूरी है 
कि ज्ञान कैसे प्राप्त किया जाए उसके लिए पढ़िए
इस पोस्ट को   
एक फारसी दार्शनिक से पूछा गया कि उसने इतना ज्ञान कैसे अर्जित किया? उसने उत्तर दिया, "मैंने घमंड को कभी अपने आड़े आने नहीं दिया; यदि मैं किसी चीज़ के बारे मे... 

गुरु महिमा के बारे में अमृत वाणी पर जानिए
कि गुरु का मनुष्य जीवन पर क्या और कैसे
प्रभाव पड़ता है ........गुरु के बिना ज्ञानोदय नहीं हो सकता
आध्यात्मिक विचार - 21-05-2011 - *जब तक गुरु के प्रति दृढ़ श्रद्धा और गुरु की वाणी पर पूर्ण विश्वास नही होता है, तब तक भ्रम बना ही रहता है। * * * *गुरु वह होता जिसे हर वक्त अपने शिष्यों के... 

यहाँ जानिए कौन सा धर्म क्या कहता है
कुरआन या कोई धर्म माँस खाने को नहीं कहता । - ब्लागिंग में मुझसे कई बार यह सवाल किया गया । जीव हत्या द्वारा प्राप्त माँस खाना उचित है । या अनुचित ? ये तो खैर एक अलग ही बात थी । सबसे खास चौंकाने वाली बात 
कबीर जी से तो हम सब परिचित हैं ही
मगर उनके दोहे हमें जीने का ढंग 
सिखाते हैं साथ ही ज्ञान भी बढ़ाते हैं
कबीर के श्लोक - ७० - कबीर ऐसा जंतु इकु देखिआ, जैसी धोई लाख॥ दीसै चंचल बहु गुना, मति हीना नापाक॥१३९॥ कबीर जी कहते हैं कि मैने ऐसा मनुष्य देखा है जो ऐसा गुणी लगता है जैसे धोई हुई... 

 लीजिये कबीर जी की एक और नसीहत जान लीजिये
ताकि बाद में पछताना न पड़े 
मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह बुद्धिमान दिखना चाहता है। वैसे अन्य सांसरिक प्राणियों की अपेक्षा मनुष्य चतुर माना जाता है पर वह इससे संतुष्ट नहीं होता बल्कि वह हर मनुष्य दूसरे से अधिक बुद्धिमान दिखने के लिये मूर्खतापूर्ण हरकतों पर उतारु हो जाता है

मनुष्य भागता भागता जब थक जाता है 
मगर कहीं चैन नहीं पता तब सिर्फ एक ही 
शब्द निकलता है उसके मुख से
मुझे ले चल उस पार 
जहाँ आनंद का भंडार है   
ले चल उस पार 
ले चल उस पार रे मन, मुझे ले चल उस पार जहाँ स्वच्छंद प्रकृति राग सुनाए | पंख पसार फैली जहाँ चाँदनी हो ... 

भगवान की अनुपम कृपा का
चमत्कार देखिये

वरुण की याद ....!!
 आया हूँ मृदु राग लिए मैं -
नव चेतन मन -
अति उन्मादित  -
सुमिर करूँ -
प्रभु तेरा निसदिन -
जग से कांटे -
उम्मीद है दोस्तों 
आज की चर्चा में 
आपको भी मेरे साथ
भक्ति रस में डूबकर 
आनंद की प्राप्ति हुयी होगी
आज ये लिंक्स बड़ी मुश्किल
से मिले हैं पता नहीं कहाँ कहाँ से
प्राप्त किये हैं ..........फिर भी 
अपनी तरफ से कोशिश की है
कि आप सबको पसंद आयें
   चलिए दोस्तों अब अगले 
सोमवार मिलेंगे तब तक 
आप अपने विचारों से 
मुझे अवगत करते रहिये
यही हमारी अमूल्य सामग्री हैं   

38 comments:

  1. वाह!
    आज तो चर्चा सत्संग के रंग में
    पूरी तरह से रंगी हुई है!
    --
    बहुत बढ़िया लिंक मिले!
    --
    आभार!

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  2. आध्यात्मिक रंग में रंगी सुंदर चर्चा ....बहुत सुंदर लिनक्स वंदनाजी , आभार

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  3. आज तो चर्ह्चा भक्ति और आध्यात्म रंग में डूबी है ...
    दिन के इस खूबसूरत आगाज़ के लिए आभार !

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  4. अच्छी लिंक्स के लिए बधाई
    आशा

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  5. आज तो कमाल ही हो गया । वन्दना जी भक्ति की धारा ही बहा दी
    आपने तो । बधाई । आभार ।

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  6. आज की चर्चा का रंग ही अलग है ...!!सीधे-सीधे प्रभु चरणों का मार्ग है ...ऐसी चर्चा में मुझे स्थान मिला ...मैं कृतज्ञ हूँ वंदना जी ....!!शायद वरुण को और आशीष मिले ...!!
    बहुत बहुत आभार आपका .

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  7. धर्म की जय हो .........!

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  8. vandna ji vastav me aaj aapki prastuti v links vandniya hain.aabhar.

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  9. वदना जी आपके भक्तिमय हृदय की मैं दिल से 'वंदना' करता हूँ जिसने भक्ति रंग से ओतप्रोत लिंकों से परिचय करवाया.
    आपने सुबह सुबह पवित्र भावों की खुशबू से महका दिया वातावरण को.
    आप धन्य हैं.आपकी भावनाएं धन्य हैं.
    बहुत बहुत आभार.

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  10. वेद-स्मृति और रामायण के बारे में तो मैं यहां नहीं कहूंगा कि मांसाहार के बारे में उनका नज़रिया क्या है लेकिन पवित्र क़ुरआन के बारे में मैं ज़रूर बताना चाहूंगा कि क़ुरआन भक्ष्य और अभक्ष्य प्राणियों के बारे में भी जानकारी देता है और हज के दिनों में क़ुरआन के अनुसार ही क़ुरबानी की जाती है और उनका मांस खाया जाता है। जो आदमी मांसाहार को अनुचित मानता है वह इसके औचित्य पर बहस तो कर सकता है लेकिन यह नहीं कह सकता कि क़ुरआन या कोई धर्म मांस खाने को नहीं कहता। ऐसा कहना भ्रम में जीना कहलाएगा।

    धन्यवाद !

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  11. Aadhyatmik charcha bhi khoob kahi.really leek se hatkar.bahut saraahniya hai.

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  12. आज तो सत्संग में रम गये हम।

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  13. भक्तिभाव से परिपूर्ण चर्चा के लिये बधाई वन्दना जी ! बहुमूल्य लिंक्स दिए हैं आज ! आभार आपका !

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  14. bahut acchi links ke saath hui charcha ..

    bahut saare links ko padha aur bahut accha laga

    meri rachna ko sammilit karne ke liye hriday se aapka aabhaar

    ReplyDelete
  15. bahut acchi links ke saath hui charcha ..

    bahut saare links ko padha aur bahut accha laga

    meri rachna ko sammilit karne ke liye hriday se aapka aabhaar

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  16. Spiritual posts are today's attraction.Beautiful.

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  17. वाह!
    बहुत बढ़िया खूबसूरत आगाज़ के लिए आभार !

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  18. बहुत अच्छी चर्चा...भक्ति के रंग में रंगी....

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  19. ईश्वर की महिमा और भक्ति भाव से ओत प्रोत आज की चर्चा अत्यंत आनंन्द दायक है ।इस भक्ति लहर में मेरी भावनावों को भी स्थान मिला इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद…..वन्दना जी ।

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  20. सत्संग - माने अच्छे लोगों से संगति... अच्छा लगा आपके साथ इस मंच पर।

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  21. चर्चा का यह रूप भी प्रंशसनीय है ...बधाई

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  22. आप तो लाजबाब है वन्दना जी !

    "मेरे तो गिरधर गोपाल दुसरो न कोई
    जा के सर मोर मुकट मेरो पति सोही !!" वाह !!!

    आज तो आप पूरी ही मीरा नजर आ रही है ...वन्दना जी

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  23. बहुत सुंदर रही आज कि आध्यात्मिक चर्चा. सचमुच मुश्किल कार्य था जो आपने कर दिखाया. लेकिन इससे एक बात और स्पष्ट हुयी कि अध्यात्म पर काफी लोग लिख रहे, जो निसंदेह बहुत उत्तम सयोजन है.

    आप बधाई की पात्र है इस महीमामयी चर्चा के लिए.

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  24. यह विशेष चर्चा सच ही मन को आनंदित करती है ...बहुत अच्छे लिंक्स दिए हैं ... अभी सब पर जाना नहीं हुआ ..

    जाते हैं धीरे धीरे / आध्यात्म रस पीते हैं धीरे धीरे ...

    सराहनीय चर्चा

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  25. वंदना जी,
    आपने आज भगवान की सुगंध से पूरे चर्चा मंच को आच्छादित कर दिया है।
    आपके प्रति जितना भी आभार प्रकट किया जाए, कम है। एक बार फिर दुहरा रहा हूं-
    मेरा ब्लाग दिव्य प्रकाश आपका भी है।
    ईश्वर आपका जीवन मंगलमय करें।
    आपका ही- विनय बिहारी सिंह

    ReplyDelete
  26. वंदना जी,
    आपने आज भगवान की सुगंध से पूरे चर्चा मंच को आच्छादित कर दिया है।
    आपके प्रति जितना भी आभार प्रकट किया जाए, कम है। एक बार फिर दुहरा रहा हूं-
    मेरा ब्लाग दिव्य प्रकाश आपका भी है।
    ईश्वर आपका जीवन मंगलमय करें।
    आपका ही- विनय बिहारी सिंह

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  27. आज तो चर्चा ने भक्ति रस में रंग दिया.
    चित्र वाकई बहुत ही खूबसूरत है.

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  28. हम्म... अध्यात्म भी ज़रूरी है...

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  29. vandanaji aaj aapne adhyatmik rang main doobe link charchamanch main shamil karake humko bhi vandanaa karane ki raha dikhaai bahut bahut dhanyawaad aapka.itne achche link se parichay karane ke liye.badhaai aapko itanaaa bhakti ras main doobe lekh charcha manch main shaamil karane ke liye.

    ReplyDelete
  30. आज तो लगता है वंदना , पूरा समय आध्यात्म और सत्संग के साथ ही गुजारा है लेकिन इस दिशा में जो अनुभूति है वह शेष सभी के आगे सबसे दुर्लभ है.
    बहुत कुछ अच्छा अच्छा पढ़ाने को मिला. नए लिनक्स मिले. इसके लिए तुम्हें बहुत बहुत धन्यवाद.

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  31. Chittaakarshak chitron se susajjit
    charcha manch ne aadhyaatmik
    vatavaran paidaa kar diyaa hai .
    Naya andaz hai . Man prasann ho
    gayaa hai .Shubh kamnaayen .

    ReplyDelete
  32. सत्संग हो गया पूरा , बचपन में पढ़े "कल्याण " की भांति .

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  33. बहुत सुन्दर आध्यात्मिक चर्चा है, आभार!

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  34. बहुत सुंदर और भक्तिमय चर्चा......

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  35. वदना जी आपने सुबह सुबह पवित्र भावों की खुशबू से महका दिया वातावरण को.बहुत बहुत आभार

    ReplyDelete
  36. चर्चा बहुत अच्‍छी है, लेकिन कुछ बातों पर हमें भी कुछ कहना है, उधर शायद न रखी जायें तो इधर उम्‍मीद की जाती है कि हमारी भी बात रखी जायेगी जो राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ जी तक भी पहुंचेगी-


    कोई मांस खाये या न खाये, उससे मुझे मतलब नहीं लेकिन हैरत की बात है, मुसलमान भाई आये और कुरआन से सम्‍बन्धित आपकी गलत बातों को नज़रअन्‍दाज कर गयेः
    आप गलत लिखते हैं कि ''इसकी आयतों की तरह कोई दूसरी आयत नहीं बना सकता । या''
    सही लिखते हैं कि ''इसमें कुछ मिलाया नहीं जा सकता।''

    जनाब कुरआन में 114 सूरतें हैं यानि अध्‍याय हैं उनमें से एक जैसी सूरत बना कर दिखाने के लिए कहा गया है न कि आयत जो 6666 हैं
    And if you (Arab pagans, Jews, and Christians) are in doubt concerning that which We have sent down (i.e. the Qur'an) to Our slave (Muhammad, Peace be upon him ), then produce a surah (chapter) of the like thereof and call your witnesses (supporters and helpers) besides Allah, if you are truthful. [Qur'an 2:23]

    अल्‍लाह का चैलेंज पूरी मानव-जाति को

    This is a challenge that still stands today, as no one has met this challenge in the over one thousand four hundred (1,400) years since it was first made. This is a point upon which we ask the reader to ponder.

    और वाकई इसमें कुछ मिलाया नहीं जा सकता, आप जो यह मिलावट दिखा रहे हैं यह अनुवाद में है, असल कुरआन में कोई बदलाव कभी कर सका है न कर सकेगा, यह मैं नहीं अल्‍लाह कहता है
    a href="http://islaminhindi.blogspot.com/2009/02/3-7.html">
    अल्‍लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

चर्चा - 2817

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है  चलते हैं चर्चा की ओर सबका हाड़ कँपाया है मौत का मंतर न फेंक सरसी छन्द आधारित गीत   ...