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Tuesday, December 28, 2010

साप्ताहिक काव्य मंच --- 30 चर्चा मंच -- 382

नमस्कार , मंगलवार का साप्ताहिक काव्य – मंच  आपके सम्मुख रख रही हूँ …इस बार यह मंच कुछ विस्तृत आकार लिए हुए हैं …यही प्रयास है कि अधिक से अधिक और अच्छी रचनाओं को आप सब तक पहुंचा सकूँ … चिट्ठा जगत सुचारू रूप से हम सबके समक्ष हो इसी उम्मीद से आज के मंच का प्रारंभ कर रही हूँ रश्मि जी की नयी उम्मीद से ----( लिंक तक पहुँचने के लिए चित्र पर भी क्लिक कर सकते हैं …)
मेरा फोटो
रश्मि प्रभा जी कर रही हैं एक      ----------
नई उम्मीद ---
मैंने अपना कमरा बुहार लिया है...
जन्म से लेकर अब तक
बहुत कुछ बटोर लिया था
खुद के लिए ही कोई जगह नहीं बची थी !
श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना \साधना वैद जी लायी हैं अपनी माँ ज्ञानवती जी की एक बेहतरीन रचना ---

विफल आशा

आई थी मैं बड़े प्रात ही
लेकर पूजा की थाली,
फैला रहे क्षितिज पर दिनकर
अपनी किरणों की जाली !
उषा अरुण सेंदुर से अपने
मस्तक का श्रृंगार किये,
चली आ रही धीरे-धीरे
प्रिय पूजा का थाल लिये !
अपर्णा मनोज भटनागर जी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त कर रही हैं .---शादी की सालगिरह पर - २७ दिसंबर
तुमने मुझे बहुत सारे दिन दिए
मैं उन्हें भरती रही
जैसे आकाश भरता है तारे
ताल भरता है कौमुदी
जंगल चीड़ के गीत
तुमने मुझे बहुत सारे पल दिए
My Photoमुदिता गर्ग जी लायी हैं कि किस तरह अभिमान(अहंकार) और अवमान (तिरस्कार) ऐसी दो स्थितियां हैं जो बहुत से सामाजिक , मानसिक और शारीरिक अपराधों को जन्म देती हैं..

अभिमान और अवमान

समझ श्रेष्ठ
औरों से
निज को
दम्भी हो जाता
इंसान ..
चाहे हरदम
मिले प्रशंसा

वाणी शर्मा जी बता रही हैं ..साथ मिला जैसे --

समान्तर रेखाएं ...

दो समान्तर रेखाएं
हमेशा साथ चलती हैं
मगर कभी
आपस में मिलती नहीं
उन्हें पीछे रह जाने का डर नहीं
मुड कर देखने की जरुरत भी नहीं
हाँ ...
और वे कभी एक- दूसरे को
काटती भी नहीं
हरीश प्रकाश गुप्त जी का नवगीत पढ़िए मनोज ब्लॉग पर ---

कब बजे पायल


मुट्ठी में दबकर
फूल
हो रहे घायल।
हर गली में
घिर गया
रात सा तम,
टूट करके
फिर उनींदी
सो गई सरगम
तलवारें हैं कागज की पर जुल्म मिटाने निकले हैं
अपनी बस्ती मे देखो ये कुछ दीवाने निकले हैं

अत्याचारों की ये लंका आखिर कब तक चमकेगी
पवनपुत्र-सी हिम्मत लेकर आग लगाने निकले हैं
 My Photo
प्रतिभा जी बता रही हैं कि भूत काल कभी पीछा नहीं छोड़ता --
भूत
भूत कभी मरता नहीं .
जितना भागोगे ,घेरेगा .
दौड़ना मत, भगाता चला जाएगा.
दूर ,और दूर !


मेरा फोटोआराधना चतुर्वेदी कह रही हैं ..हंसती हुई औरत दुखी नहीं होती
सुनो, एक कविता लिखो
या यूँ ही कुछ पंक्तियाँ
जिन्हें कविता कहा जा सके
और इसी बहाने याद रखा जाए
My Photoसतीश सक्सेना जी एक पिता के एहसासों को बता रहे हैं जब बेटी का विवाह कर उसे पराये घर भेजने का वक्त आता है ….
कैसी  रीति  समाज  की ?
गुडिया द्वारा चावल ,
मुट्ठी में भरते ही
आँख छलछला उठीं
अपनी लाडली का यह  स्वरुप 
कैसे  देख पाऊंगा ..मैं पिता
मेरा फोटो
वंदना गुप्ता जी की पेशकश – तप -त्याग के बाद मुहब्बत का अंजाम पढ़िए ..

'कहीं तुम वही तो नहीं हो जाना

वो जोगी
अलख जगाता रहा
पूजन अर्चन वंदन
करता रहा
तप की अग्नि में
खुद की आहुति 
देता रहा
My Photoराजीव जी नारी हृदय को अति सूक्ष्मता से पढते हुए कह रहे हैं कि---
क्यों नहीं जा पाते तुम ?
मैं पूछती हूँ
क्यों नहीं जा पाते तुम
हमारे तन के पार?
क्यों नहीं लाँघ पाते
रीति-रिवाजों से से नियंत्रित
परम्पराओं की देहरी
जहाँ तिरता है जीवन-मूल्य
पानी पर तेल सा
मेरा फोटोललित शर्मा जी लाये हैं योगेन्द्र मौदगिल जी की एक रचना
मंहगाई बढ़ रही हमको आजमाने के  लिए
बढ रही मंहगाई हमको आजमाने के लिए।
आदमी जिंदा है केवल तिलमिलाने के लिए।
बेकसी बढती रही गर दाने-दाने के लिए।
तन पड़ेगा झोंकना चूल्हा जलाने के लिए।
My Photo
आशीष जी बढते जा रहे हैं नव जीवन पथ की ओर
मै निकल पड़ा हूँ घर से  , सम्मुख चलता पथ का प्रमाद
  जो मिले सफ़र में छूट गए,पर साथ चल रही उनकी याद
अन्यमयस्क सा चला जा रहा, गुजर रहा निर्जन वन से
मेरे  विषम विषाद सघन हो उठे,  गए सब निर्मम बन के
My Photo
ओम् आर्य जी की बहुत संवेदनशील रचना ..
कथा – परिकथा
मुझे अपने देखे और सुने हुए से
यह भान है कि
मृत्यु एक नियम है
सभी नियमों में सबसे ज्यादा सच और शाश्वत
और उस नियम को जीवित रखने के लिए जन्म होता है
My Photoपी० सी० गोदियाल जी दे रहे हैं ------
लेखा - जोखा  इक्कीसवीं  सदी के प्रथम दशक का
शठ, रंक-राजा दुर्जनों का, काम देखा, काज देखा,
हमने ऐ सदी इक्कीसवीं,ऐसा तेरा आगाज देखा।
बनते हुए महलों को देखा, झूठ की बुनियाद पर,
छल-कपट, आडम्बरों का,इक नया अंदाज देखा॥
My Photoप्रिया बता रही हैं कुछ रिश्तों की
ये ना कहना कभी
के मैंने तुम्हे
तन्हा छोड़ा
याद है साथ चलते चलते
राह में अक्सर
मैं रुक जाया करता था
तो
तुम नाराज़ हो जाए करती थी
My Photo
मंजुला जी लौटी थीं बहुत बरस बाद घर …उनके एहसास पढ़िए
..मेरा  घर  मेरे लोग
बरसो बाद 
अपने घर लौटना हुआ         
अजीब सी ख़ुशी थी
पलके भीगी हुई थी                           

सबने गले लगाया 
कुछ उलाहना भी दिया
मेरा फोटोवीनस  भिगो रही हैं ------
सिराहने का दायाँ छोर
जाने क्यूँ सुबह रोज़ आती थी
उसे देखने .....
रोज़ बिस्तर के दाहिने तरफ़
सरहाने का दाहिना छोर पकड़े
मुहं सरहाने में दबा सोयी होती
बायीं तरफ भी इक आकृति दिखती
पर सुबह सिर्फ उसे एकटक देखती
एक नयी रचना ---पलाश के फूल


ऋचा की पढ़िए –

कैफियत
वो साहिल की रेत में दबी
किताब सा मिला
कुछ नम, कुछ रुखा,
नम पन्नों पर
कुछ धूल सी जम आयी थी
वीणा जी की एक खूबसूरत सलाह --प्यार का दामन-

मन को बांधो
भावनाएं साथ चलेंगी
ह्रदय भरेगा उड़ान
रोशनी के

किनारे होंगे
दीपों की राह पर
हौसलों के कदम होंगे
My Photo
स्वराज्य करुण बच्चों की निश्छल मुस्कान की बात कर रहे हैं ..
बच्चों की मुस्कान में
खुशनुमा  सुबह, हसीन शाम   बच्चों की मुस्कान में,
अमन का, प्यार का पैगाम बच्चों की मुस्कान में !
मंदिर-मस्जिद कहाँ -कहाँ  खोजोगे  भगवान को
घर  में  है   तीरथ  धाम बच्चों की मुस्कान में !
My Photoमृदुला प्रधान महसूस कर रही हैं कि बीते वक्त में उनकी आँखों में मरुस्थल उतर आया है …
मरुभूमि कितना
'मरुभूमि
कितना सूना लगता है.......'
अनायास ही
निकल गया था
मुंह से ,…..

नयी प्रस्तुति -
आत्मीयता से भरी बातों को
My Photo

अमृता तन्मय  लायी हैं एक  विरोधाभास
क्यूँ मैं कहूँ
पारदर्शी हो तुम 
पूरे सौ प्रतिशत
जबकि तुममें
दिखती हूँ मैं...
पर कहीं न कहीं
है विरोधाभास
मेरा फोटोअंजना जी का कहना है ----उनकी ख़ामोशी को समझना उनको समझने से भी मुश्किल काम है...
क्या है यह ख़ामोशी? क्यूँ ये सुनाई सी देती है? ख़ामोशी जितनी लम्बी हो उतनी ही तेज़ सुनाई देती है, मगर इसकी आवाज़ में लफ्ज़ नहीं होते, यह सुबकती है, मुस्कुराती है, बुलाती है, लौटा भी देती है, मगर इस उम्मीद में रहती है की शायद कभी मर मिटेगी और लफ़्ज़ों में बयां होगी... तो पढ़िए उनकी रचना …खामोशी
एक  नयी रचना ---- ज़रा मुस्कुरा  दीजिए
My Photo
जोशी जी कह रहे हैं कि ---
इतिहास को दुहराने में बीस नहीं सिर्फ १२ साल लगते हैं !  १९९८ की लिखी हुई कुण्डलियाँ आज फिर सन्दर्भ में है …. पढ़िए उनकी बारह साल पहले कि लिखी  रचनाएँ .
इतिहास  के पन्नों से प्याज़  की  दुहाई
नयी प्रस्तुति  --  नौटंकी
“सदा “ बता रही हैं कि  सारी ज़िंदगी -वो चलती रही निरन्‍‍तर
जैसा जिसने चाहा
वह करती रही
अपने लिये
उसने
कभी सोचा नहीं
या वक्‍त
नहीं मिला सोचने का….
मेरा फोटोधीरेन्द्र सिंह बता रहे हैं कि आज ज़िंदगी कैसे बह रही है बाजारवाद – बहाववाद
ज़िंदगी हर हाल में बहकने लगी
कठिन दौर हंस कर सहने लगी
मासिक किश्तों में दबी हुई मगर
कभी चमकने तो खनकने लगी  ….
My Photoवरुण गगनेजा  की एक खूबसूरत नज़्म पढ़िए -
वो लम्हा
एक ख्वाब इक लम्हा 
छुप गया था कहीं मेरी बाहों में
न कोई शोर
न सरगोशी
न किसी लम्स की हरारत
अलसाया , उनींदा सा
My Photoउदय वीर सिंह जी कह रहे हैं
दो शब्द
उन्माद  की     राहों  में   ,पनाहों  में  ,
बसर      नहीं     होता   --------------
गुमनाम - सी   गलियों      में     कहीं   ,
अपना  ,  शहर   नहीं      होता   ----------

नयी प्रस्तुति  "प्रीतम "
My Photoकैलाश सी० शर्मा जी बता रहे हैं कि 
फिर  भी प्यास  नहीं बुझ पायी
पीडाओं के  घिर आये घन,
                  अश्कों में डूब गया अंतर्मन,
फिर भी प्यास नहीं बुझ पायी अधरों के प्यासे मरुथल की.
clip_image001
राजीव श्रीवास्तव की रचना नारी ! तुम ये सब कैसे सह लेती हो
अपने ही घर में अपमानित हो कर, तुम कैसे रह लेती हो,
दिन में कई बार तिरस्कृत होती हो,ये सब कैसे सह लेती हो!
महेश चन्द्र द्विवेदी कि रचना पढ़िए सप्तरंगी पर -

आभास :

दिवस के श्रम से श्लथ थकित
अवनि हो जाती है जब निद्रित
नील-नभ को घेर लेती कालिमा
और नक्षत्र भी सब होते हैं तंद्रित
 मेरा फोटोअजय कुमार झा जी तलाश कर रहे हैं ज़िंदगी ---
जीने को जी ही रहा हूं रोज़ कतरा कतरा ,
मुद्दत से एक पूरी जिंदगी ढूंढता  हूं मैं ….
आसमां तो चूम लिया कब का ,
अब खडे होने को जमीं ढूंढता हूं मैं

राजभाषा पर पढ़िए  नए साल का -

आह्वान

आह्वान मत करो
नए साल में खुशियों का
क्यों कि खुशियाँ तो
महज़ धोखा हैं ।
आह्वान करना है तो करो -
ख़ुद से ख़ुद को मिलने का
मेरा फोटो
जेन्नी  शबनम जी चाहती हैं कि -

तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया


चाह थी मेरी
तीन पल में
सिमट जाए दूरियाँ,
हसरत थी
तुम्हारी आँखों से
देखूँ दुनिया !
मेरा फोटोज्ञान चंद मर्मज्ञ जी २६ दिसंबर २००४ का दिन याद करते हुए कह रहे हैं ..--“
इसी दिन प्रकृति के  प्रकोप ने `सुनामी` बन कर मौत का वीभत्स खेल खेला था और पागल समुद्र की लहरों ने न जाने कितने लोगों  को जिन्दा निगल लिया !
आज उन्हीं को श्रद्धांजली  स्वरुप यह कविता प्रस्तुत है!”
की है सागर ने लाशों की चोरी
जो समंदर ने लिख दी लहर पर ,
          हादसों    की  कहानी   है  पानी !
          रेत   पर  आज  तक बन न पाई,
          एक   ऐसी   निशानी   है  पानी !
Anupamaअनुपमा पाठक बता रही हैं कि-

वक़्त हो चला है..

कहते हुए
सुनते हुए
वक़्त हो चला है
सपने बुनते हुए
अब चलने की बारी है
गति और विश्वास साथ हों
फिर निश्चित ही
जीत हमारी है!


My Photoरावेंद्रकुमार रवि बता रहे हैं कि नव वर्ष की नयी सुबह में उनको क्या नया लगा … आप भी जानिए

कल भी मैं
सुबह पाँच बजे उठकर
पढ़ने का संकल्‍प लेकर
सोया था,
पर आज उठा वही आठ बजे
मेरा परिचय यहाँ भी है!डा० रूप चन्द्र शास्त्री जी की कर्मठता देखते ही बनती है …उनके गीतों से सीख और समाज के प्रति चेतना  जागृत होती है …उच्चारण पर यह उनकी ८०० वीं पोस्ट है .. पढ़िए  उनका -- "अमन का पैगाम"
दे रहा है अमन का पैगाम भारत!
अब नहीं होगा हमारा देश आरत!!
आदमी हँसकर मिले इनसान से,
सीख लो यह सीख वेद-कुरान से,
वाहेगुरू का भी यही उपदेश है,
बाईबिल में प्यार का सन्देश है,
दे रहा है अमन का पैगाम भारत!
अब नहीं होगा हमारा देश आरत!!
चलते चलते ----
My Photoराजीव शर्मा जी कह रहे हैं उड़ने वालों सुनो ..आकाश
पर उड़ने वालों सुनो /तुमेह  धरती का है ये कहना / ऊँचा उड़ो चाहे तुम नभ छुलो / पर धरती पर तुम्हे है रहना .

मेरा फोटो
संजय दानी जी लाये हैं दिल का गागर/भुरभुरा है दिल का गागर,/क्यूं रखेगा कोई सर पर।/हिज्र का दीया जलाऊं,/वस्ल के तूफ़ां से लड़ कर।


**कबाडखाना ब्लॉग पर गगन गिल की कविता थोड़ी सी उम्मीद चाहिए

मेरा फोटोअमित श्रीवास्तव जी लाये हैं उधार आंसुओं का----- यह माना कि प्यार,/किया था बहुत तुमने मगर,/कम हम भी ना तड़पे थे उस रोज़,/जब मांगा था तुमने हिसाब आंसुओं का।

**प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल जी की रचना खत्म हुआ खेल “ख”(खुशियों) का --

My Photo
मनीष तिवारी की एक खूबसूरत गज़ल जिंदगी से भी अब अपनी ना यारी रही

My Photoसौम्या  लायी हैं आडी  तिरछी रेखाएं

मैं जब छोटी थी ना / तो अक्सर .......बड़े शौक से  /कुछ टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें / बनाती रहती थी  /घर की दीवारों पर…


My Photoसारिका सक्सेना जी देख रही हैं   ख्वाब
कच्ची मिटटी से थे /जो ख़्वाब  कल बनाए थे, / चलो  आज पका लें उन्हें…


My Photoमोहिंदर कुमार जी देख रहे हैं स्वप्न मेरे
स्वप्न मेरे /आश्रित नहीं /नैनों के /नींद के / रात के /यह पलते हैं.

मेरा फोटोचन्दन जी कर रहे हैं शत शत नमन
जो रहे अविचल,/ संघर्ष किये, /जो अटल रहे इरादों पर,/माँ से किये अपने वादों पर, /लुटा दिए अपने तन मन,/करो उन्हें नमन|


चर्चा मंच का समापन  शास्त्री जी के अमन के पैगाम के साथ करते - करते कुछ और लिंक्स मिल गए चलते - चलते … तो आज हमने भी अर्ध- शतक तो ठोक ही दिया है … बाकी जिताने के लिए आपको रन बनाने हैं ….  आपकी प्रतिक्रिया ही हमारा मनोबल है ….फिर मिलेंगे अगले मंगलवार को  नए साल में नयी   चर्चा के साथ .. आपको नए वर्ष की शुभकामनायेंसंगीता स्वरुप

51 comments:

  1. बहुत सी लिंक्स |अच्छा संकलन |बधाई
    आशा

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  2. priya maim

    pranam

    itane sare fulon ko ak upwan men saja dena ak sidh-hast mali he kar sakta /bahut sunder / dhanyawad !

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  3. कितना लिखूं आपकी मेहनत के बारे में , ज्यादा लिखने पर चापलूसी- सा लगने लगता है ..
    सभी शानदार लिंक्स ...
    आपके चयनित लिंक्स में खुद को देखना बहुत गौरव और उर्जा प्रदान करता है ..
    बहुत आभार !

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  4. आज का चर्चा मंच बहुत ही सुन्दर है मैँ कह सकता हूँ.....

    ये उपवन खुशियोँ से महका रखा है ,
    अँधेरोँ के बीच चिरगोँ को जला रखा है।

    चिट्ठा जगत की कमी के दर्द को काफी हद तक राहत दी हैँ संगीता दी आपने !

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  5. संगीता जी, वास्तव में आप बहुत मेहनत करती हैं चर्चा सजाने में।
    लिंक ढूंढना भी एक श्रम साध्य कार्य है।

    चर्चा के अर्धशतक के लिए आपको ढेर सारी शुभकामनाए।

    शिल्पकार की चर्चा के लिए आभार

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  6. आज का चर्चा मंच बहुत ही सुन्दर है मैँ कह सकता हूँ.....

    ये उपवन खुशियोँ से महका रखा है ,
    अँधेरोँ के बीच चिरगोँ को जला रखा है।

    चिट्ठा जगत की कमी के दर्द को काफी हद तक राहत दी हैँ संगीता दी आपने !

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  7. sangeeta ji,
    mann se aabhaari hun, charcha manch mein jagah dekar mujhe sneh aur samman dene keliye. bahut achhi achhi charchaayen hain. shukriya aur aabhar.

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  8. क्या कहूं ..बेहतरीन , बहुत सुंदर ..बुकमार्क करने लायक ..

    समझ सकता हूं कि इन मोतियों को एक माला में पिरोने के लिए आपको कितनी देर तक समुद्र मंथन करना पडा होगा । बहुत आभार मेरी पंक्तियों को यहां सजाने के लिए । सैल्यूट टू यू ....

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  9. बहुत ही सुन्दर फ़ारर्मेट, अच्छे लिंक्स , अच्छी चर्चा।
    मेरी ग़ज़ल को चर्चा मंच में शामिल करने के लिये धन्यवाद।

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  10. हमेशा की तरह अद्भुत चर्चा . मेहनत से सजाई गई चर्चा .. मेरी कविता को चर्चा में स्थान देने के लिए आभार.

    आशीष

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  11. आद.संगीता जी,
    आज चर्चा मंच के सारे लिंक्स एक से बढ़ कर एक हैं !
    मेरी कविता को चर्चा में शामिल करने के लिए धन्यवाद !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  12. साल के अन्त में चर्चा मंच का रंग यौवन पर है!
    पने बहुत परिश्रम से चर्चा मंच सजाया है!
    --
    आपके काव्यंमंच का पूरे सप्ताहभर इन्तजार रहता है!

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  13. सुन्दर चर्चा ... संगीता जी..

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  14. बहुत बढ़िया चर्चा!
    --
    रविमन को शामिल करने के लिए आभार!

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  15. gazab ka sanklan hai,padhti hoon aur fir padhti hoon.meri ore se vishesh dhanywad sweekar kariyega.

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  16. सुन्दर लिंक्स इस मंच पर पढ़ने को मिले

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  17. बहुत सुन्दर और धडाधड महाराज की बेरुखी से बने गैप को कम करती चर्चा संगीता जी ! धडाधड महाराज (चिट्ठाजगत ) नहीं तो क्या, आपने ढेर सारे सुन्दर लिंक एक स्थान पर इकठ्ठे कर लिए !

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  18. दीदी,
    बहुत मेहनत से सजाया है आपने यह मंच..कितने भिन्न भिन्न विषयों पर एक ही जगह पढ़ने को मिल जाता है वो भी आपकीपरिष्कृत द्रिध्ती से गुज़रे हुए लिंक्स... मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभार ...

    मुदिता

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  19. बगीचे में घूमने का मन हो तो चलो हो आया जाये ! इस फूलों के मौसम में अच्छी बहार आयी है इस बगीचे में

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  20. संगीता जी, चर्चामंच के लिए नज़्म चुनने के लिए हार्दिक धन्यवाद्.....साहित्य के लिए किये जा रहे आपके श्रमसाध्य कार्य के लिए नमन......पहली बार चर्चामंच पर आने का मौका मिला..पढ़कर देखकर बहुत अच्छी अनुभूति जिसे शब्दों में वर्णन करना बहुत मुश्किल जान पड़ रहा है.....
    बधाई स्वीकार करें

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  21. बहुत ही सुन्दर चर्चा………कुछ लिंक्स पर हो आई हूँ बाकी बाद मे पढूँगी……………बेहद सुन्दर संकलन्।

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  22. संगीता जी , बहुत सुंदर चर्चा .....काफी लिंक मिले..........आभार

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  23. इतने सुन्दर लिंक्स से संजोयी बहुत सुन्दर चर्चा..मेरी रचना को चर्चा मंच में सामिल करने के लिए धन्यवाद. आभार

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  24. महत्वपूर्ण और सार्थक लिंक्स के साथ सधी हुई सुव्यवस्थित चर्चा.

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  25. धन्यवाद ,आप की इस चर्चा के कारण कुछ अच्छे लिंक मिले

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  26. शानदार चर्चा. बहुत कुछ मिला पढने को और विविधताएँ इतनी कि अच्छी खुराक मिल गयी. आपको कोटिश: धन्यवाद.

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  27. बहुत ही सुन्‍दर चर्चा है यह आभारी हूं आपने मेरी रचना को इस काव्‍य मंच पर स्‍थान दिया ...बधाई के साथ शुभकामनायें ...।

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  28. इतने सुन्दर लिंक्स से संजोयी बहुत सुन्दर चर्चा..मेरी रचना को चर्चा मंच में सामिल करने के लिए धन्यवाद. आभार

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  29. बहुत सारे लिंक्स से सुसज्जित सुन्दर संकलन!!!
    आभार!

    ReplyDelete
  30. @ अजीब कैफियत है -ऋचा ....sach kahun..mzaa aa gyaa aapki rchnaa pr ke......
    @खुद के लिए ही कोई जगह नहीं बची थी-रश्मि जी
    @शादी की सालगिरह तह ए दिल से मुब अरक -अपर्णा जी
    @उन्हें पीछे रह जाने का डर नहीं
    मुड कर देखने की जरुरत भी नहीं --वाणी जी
    @तप की अग्नि में खुद की आहुति देता रहा -वन्दना जी ...प्रभावशाली प्रस्तुती
    @ख़ामोशी जितनी लम्बी हो उतनी ही तेज़ सुनाई देती है, मगर इसकी आवाज़ में लफ्ज़ नहीं होते, यह सुबकती है, मुस्कुराती है, बुलाती है,--अंजना जी....शानदार लेखन
    @अपने लिये उसने कभी सोचा नहीं- सदा ...ह्म्म्म...बहुत गहरे भाव हैं
    @तनाव त्रासदी से ऊँची हुई तृष्णा -धीरेन्द्र सिंह जी..आपकी भाषा शैली. बहुत शानदार है
    @अधरों का होता है कम्पन, अनबूझे रह जाते बंधन, छली गयी है आज सदा की तरह आस मम अंतस्तल की.---कैलाश जी ...मैं अपनी अगली रचना आपकी रचनाओं सी लिखना चाहती हूं....सुन्दरता अगल है आपके लेखन में
    @हसरत थी तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ooooooo,...jeennnnyyy जी......इतनी खुशी हो रही है मुझे आप को देख कर..जैसे कोई जाना पहचाना मिल गया हो...बहुत प्यारी रचना है जेन्नी जी
    @डा० रूप चन्द्र शास्त्री जी...काश आपकी बातें उन दिमागों को हिला पाए जिन्हें इन बातों को सच में समझने की ज़रूरत है..बहुत उम्दा .....
    @रावेंद्रकुमार जी ..आपको सपरिवार नव वर्ष की शुभकामनाये
    ***************************
    संगीत दी..आज की आपकी चर्चा बहुत ही सफल रही...बहुत ही खूबसूरत लिनक्स मिले आपके कारण ...उम्दा रचनाये पड़ने को मिली .....आपका तह ए दिल से शुक्रिया..
    सभी लिनक्स तो नही देख पायी...पर हाँ जो जो देख पायी बहुत प्रभावशाली ...
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए शुर्किया...[:)]
    बहुत अच्छी और सफल चर्चा रही ..आपको धन्यवाद और बधाई
    Take care

    ReplyDelete
  31. @ अजीब कैफियत है -ऋचा ....sach kahun..mzaa aa gyaa aapki rchnaa pr ke......
    @खुद के लिए ही कोई जगह नहीं बची थी-रश्मि जी
    @शादी की सालगिरह तह ए दिल से मुब अरक -अपर्णा जी
    @उन्हें पीछे रह जाने का डर नहीं
    मुड कर देखने की जरुरत भी नहीं --वाणी जी
    @तप की अग्नि में खुद की आहुति देता रहा -वन्दना जी ...प्रभावशाली प्रस्तुती
    @ख़ामोशी जितनी लम्बी हो उतनी ही तेज़ सुनाई देती है, मगर इसकी आवाज़ में लफ्ज़ नहीं होते, यह सुबकती है, मुस्कुराती है, बुलाती है,--अंजना जी....शानदार लेखन
    @अपने लिये उसने कभी सोचा नहीं- सदा ...ह्म्म्म...बहुत गहरे भाव हैं
    @तनाव त्रासदी से ऊँची हुई तृष्णा -धीरेन्द्र सिंह जी..आपकी भाषा शैली. बहुत शानदार है
    @अधरों का होता है कम्पन, अनबूझे रह जाते बंधन, छली गयी है आज सदा की तरह आस मम अंतस्तल की.---कैलाश जी ...मैं अपनी अगली रचना आपकी रचनाओं सी लिखना चाहती हूं....सुन्दरता अगल है आपके लेखन में
    @हसरत थी तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ooooooo,...jeennnnyyy जी......इतनी खुशी हो रही है मुझे आप को देख कर..जैसे कोई जाना पहचाना मिल गया हो...बहुत प्यारी रचना है जेन्नी जी
    @डा० रूप चन्द्र शास्त्री जी...काश आपकी बातें उन दिमागों को हिला पाए जिन्हें इन बातों को सच में समझने की ज़रूरत है..बहुत उम्दा .....
    @रावेंद्रकुमार जी ..आपको सपरिवार नव वर्ष की शुभकामनाये
    ***************************
    संगीत दी..आज की आपकी चर्चा बहुत ही सफल रही...बहुत ही खूबसूरत लिनक्स मिले आपके कारण ...उम्दा रचनाये पड़ने को मिली .....आपका तह ए दिल से शुक्रिया..
    सभी लिनक्स तो नही देख पायी...पर हाँ जो जो देख पायी बहुत प्रभावशाली ...
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए शुर्किया...[:)]
    बहुत अच्छी और सफल चर्चा रही ..आपको धन्यवाद और बधाई
    Take care

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  32. @ अजीब कैफियत है -ऋचा ....sach kahun..mzaa aa gyaa aapki rchnaa pr ke......
    @खुद के लिए ही कोई जगह नहीं बची थी-रश्मि जी
    @शादी की सालगिरह तह ए दिल से मुब अरक -अपर्णा जी
    @उन्हें पीछे रह जाने का डर नहीं
    मुड कर देखने की जरुरत भी नहीं --वाणी जी
    @तप की अग्नि में खुद की आहुति देता रहा -वन्दना जी ...प्रभावशाली प्रस्तुती
    @ख़ामोशी जितनी लम्बी हो उतनी ही तेज़ सुनाई देती है, मगर इसकी आवाज़ में लफ्ज़ नहीं होते, यह सुबकती है, मुस्कुराती है, बुलाती है,--अंजना जी....शानदार लेखन
    @अपने लिये उसने कभी सोचा नहीं- सदा ...ह्म्म्म...बहुत गहरे भाव हैं
    @तनाव त्रासदी से ऊँची हुई तृष्णा -धीरेन्द्र सिंह जी..आपकी भाषा शैली. बहुत शानदार है
    @अधरों का होता है कम्पन, अनबूझे रह जाते बंधन, छली गयी है आज सदा की तरह आस मम अंतस्तल की.---कैलाश जी ...मैं अपनी अगली रचना आपकी रचनाओं सी लिखना चाहती हूं....सुन्दरता अगल है आपके लेखन में
    @हसरत थी तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ooooooo,...jeennnnyyy जी......इतनी खुशी हो रही है मुझे आप को देख कर..जैसे कोई जाना पहचाना मिल गया हो...बहुत प्यारी रचना है जेन्नी जी
    @डा० रूप चन्द्र शास्त्री जी...काश आपकी बातें उन दिमागों को हिला पाए जिन्हें इन बातों को सच में समझने की ज़रूरत है..बहुत उम्दा .....
    @रावेंद्रकुमार जी ..आपको सपरिवार नव वर्ष की शुभकामनाये
    ***************************
    संगीत दी..आज की आपकी चर्चा बहुत ही सफल रही...बहुत ही खूबसूरत लिनक्स मिले आपके कारण ...उम्दा रचनाये पड़ने को मिली .....आपका तह ए दिल से शुक्रिया..
    सभी लिनक्स तो नही देख पायी...पर हाँ जो जो देख पायी बहुत प्रभावशाली ...
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए शुर्किया...[:)]
    बहुत अच्छी और सफल चर्चा रही ..आपको धन्यवाद और बधाई
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  33. @ अजीब कैफियत है -ऋचा ....sach kahun..mzaa aa gyaa aapki rchnaa pr ke......
    @खुद के लिए ही कोई जगह नहीं बची थी-रश्मि जी
    @शादी की सालगिरह तह ए दिल से मुब अरक -अपर्णा जी
    @उन्हें पीछे रह जाने का डर नहीं
    मुड कर देखने की जरुरत भी नहीं --वाणी जी
    @तप की अग्नि में खुद की आहुति देता रहा -वन्दना जी ...प्रभावशाली प्रस्तुती
    @ख़ामोशी जितनी लम्बी हो उतनी ही तेज़ सुनाई देती है, मगर इसकी आवाज़ में लफ्ज़ नहीं होते, यह सुबकती है, मुस्कुराती है, बुलाती है,--अंजना जी....शानदार लेखन
    @अपने लिये उसने कभी सोचा नहीं- सदा ...ह्म्म्म...बहुत गहरे भाव हैं
    @तनाव त्रासदी से ऊँची हुई तृष्णा -धीरेन्द्र सिंह जी..आपकी भाषा शैली. बहुत शानदार है
    @अधरों का होता है कम्पन, अनबूझे रह जाते बंधन, छली गयी है आज सदा की तरह आस मम अंतस्तल की.---कैलाश जी ...मैं अपनी अगली रचना आपकी रचनाओं सी लिखना चाहती हूं....सुन्दरता अगल है आपके लेखन में
    @हसरत थी तुम्हारी आँखों से देखूँ दुनिया ooooooo,...jeennnnyyy जी......इतनी खुशी हो रही है मुझे आप को देख कर..जैसे कोई जाना पहचाना मिल गया हो...बहुत प्यारी रचना है जेन्नी जी
    @डा० रूप चन्द्र शास्त्री जी...काश आपकी बातें उन दिमागों को हिला पाए जिन्हें इन बातों को सच में समझने की ज़रूरत है..बहुत उम्दा .....
    @रावेंद्रकुमार जी ..आपको सपरिवार नव वर्ष की शुभकामनाये
    ***************************
    संगीत दी..आज की आपकी चर्चा बहुत ही सफल रही...बहुत ही खूबसूरत लिनक्स मिले आपके कारण ...उम्दा रचनाये पड़ने को मिली .....आपका तह ए दिल से शुक्रिया..
    सभी लिनक्स तो नही देख पायी...पर हाँ जो जो देख पायी बहुत प्रभावशाली ...
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए शुर्किया...[:)]
    बहुत अच्छी और सफल चर्चा रही ..आपको धन्यवाद और बधाई
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  35. चर्चामंच के बहाने कई अच्छे लिंक्स मिल जाते हैं. कुछ जाने-पहचाने और कुछ नए. आपके इस परिश्रम के लिए आभार.

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  36. Sangeeta ji
    charcha se kai links mil jaate hain padhne ko ..
    sundar sankalan ke liye aapko dher saari badhai!
    zoya ji ne badi mehanat se sabhi blogs padhe aur unke baare mein tippaniyan din.
    zoya ji , aapko bhi vishesh aabahar!
    Thanks again ..

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  37. संगीता जी , आपको हार्दिक धन्यवाद मेरी रचना को चर्चा मंच पर लाने के लिए ...साथ ही इतने सुन्दर , सुव्यवस्थित चर्चा के लिए . आपने एक साथ इतने लिंक्स उपलब्ध कराये हैं कि पुनः धन्यवाद . आप सबों को नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनायें .

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  38. बहुत बढ़िया चर्चा!
    शानदार लिंक्स ... बहुत आभार !
    नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनायें .

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  39. सभी पाठकों का आभार ...प्रतिक्रिया देने वालों का विशेष आभार ...

    @@ जोया ( वीनस )

    जितनी प्यार से टिप्पणी की है उतनी ही शिद्दत से यहाँ छप भी गयीं हैं :):)
    तुम्हारी टिपणी से सच ही चर्चा करने का आनंद आ गया ...

    सभी प्रतिक्रियाओं से मनोबल बढा ..शुक्रिया

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  40. 50 नॉट आउट की पारी को शतकीय साझेदारी मे तबदील करने के लिए एक योगदान तो मैं भी कर ही दूं।
    बाक़ी इस खूबसूरत पारी के हर शॉट का विश्लेषण करता हू,...
    हां हमें भी मंच पर शामिल करने के लिए शुक्रिया।

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  41. बहुत अच्छे लिंक्स से सजी सुंदर एवं सार्थक चर्चा. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  42. achche links! naye links bhi mile. apki charcha mujhe shaamil karne ke liye dhanyawaad!

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  43. aapne bhi adbhut mehanat kee hai. itani sundar charchaa dekh kar man prasann ho gaya. aapki mehanat ko mai pranaam karata hoon.

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  44. मेरी रचना भी सम्मिलित हुयी है इस चर्चा में देख कर अच्छा लगा|
    मेरा उत्साह वर्धन करने के लिए आप सबों कोध्न्य्वाद|
    साथ ही आप सबों का एक साथ एक ही मंच पर मिलना भी मेरा सौभाग्य ही है|

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  45. चर्चा मंच के अंतर्गत काव्य-मंच को इस बार भी संगीता जी आपने काफी मेहनत और मनोयोग से सजाया -संवारा है , बल्कि मै तो कहना चाहूँगा कि यह आपके विगत प्रस्तुतिकरण से भी ज्यादा अच्छा लगा. अनेक नए और वरिष्ठ हस्ताक्षरों से परिचित होने का मौक़ा मिला .मेरी रचनाओं पर भी आपका ध्यान गया. आभारी हूँ .

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  46. lo ji hamari taraf se bhi chukha/chhakka jod lijiye apne ardh-shatak me. aur links bahut acchhe lag rahe hain..aaj to abhi aana hua net par ab inhe kal hi padh paungi.

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  47. संगीता जी ,
    मैं तो चकित रह जाती हूँ ,आप इतना भ्रमण कर ,सुन्दर पुष्पों का चयन कर इतने श्रम से यह आयोजन करती हैं ,साथ में अपना लेखन भी .
    धन्यवाद बड़ी छोटी चीज़ है इसके आगे .
    यह ऊर्जा ऐसी ही बनी रहे और आगत वर्ष आपके और यहाँ सब के लिए नया हर्षोल्लास और सफलताओं की भेंट लाए .अशेष शुभ-कामनाएँ !

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  48. बहुत शानदार चर्चामंच ! कई बहुमूल्य लिंक्स मिले ! आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद !

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  49. लेट आने के लिए कान पकड़ता हूँ मैम ...प्रामिस सारा होम वर्क पूरा कर लूँगा ! वैसे लोग मेरी बुद्धि समझ गए हैं अक्सर मैं कान क्यों पकड़ता हूँ :-)),
    वाकई लोगों को यहाँ उपरोक्त एक लाइन में स्नेह और सम्मान नहीं दिखता उन्हें लगता है कि मूर्ख है :-) क्या करूँ मैम...????
    खैर ,
    यह चर्चा देख कर निशब्द रह गया ...शायद ही इतनी मेहनत कोई करता होगा ...निस्संदेह चर्चा मंच का सम्मान बढ़ा है आपके कारण !
    हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार करें !
    कल भूल जाने के कारण, नहीं आ सका ! ईमानदारी से माफ़ कर देना !
    नव वर्ष की शुभकामनायें !

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मित्रों! शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...