यह हिन्दुस्तान कि खासियत है कि सभी धर्म के लोग यहाँ एक दूसरे के त्योहारों मैं शरीक होते हैं, बधाई देते हैं. इस से आपस का प्रेम बढ़ता है. यह महीना रक्षा बंधन, जन्माष्टमी और रमजान कि बधाइयों का महीना था. मेरी तरफ से भी सब को बधाई. रमजान के मुबारक दिनों मैं आखरी सप्ताह कि बहुत ही अहमियत है. इस सप्ताह अल्लाह कि इबादात आप कि दुनिया और आखिरत दोनों सुधार देती है. हाँ इस सप्ताह मैं एक दुखद घटना भी है और वो है २१ रमजान को मुसलमानों के खलीफा हज़रत अली (अ.स) को इसलिए शहीद किया गया क्यों कि वो समाज को भाईचारे और शांति का सदेश देते थे. |
एकाकीपन के चित्र क्यों अच्छे लगते हैं |
अभी अपनी कुछ परेशानियों के कारण नेट पर नियमित नहीं हो पाऊँगा। कुछ रचनाएँ शैड्यूल की हैं आप इनका आनन्द लेते रहिए। डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) |
किस उम्र से बच्चे को ट्यूशन भेजना चाहिए?ये एक ऐसा विषय है जिस पर आज तक कोई सार्थक बहस नहीं हो पाई, आज ट्यूशन फैशन के साथ जरूरत भी बन गया है, बिना ट्यूशन बच्चा नर्सरी भी पास नहीं कर पाता है, |
“दर्द होता रहा छटपटाते रहे, आईने॒से सदा चोट खाते रहे, वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे |
आपके वेबसाइट बनाने से संबधित सवाल हमारे जवाब |
अंग्रेजों की नाजायज़ औलादें (व्यंग्य) |
|
खुकटोरे पे कटोरा, बेटा बाप से भी गोरा...खुशदीपबचपन में ये कहावत सुना करता था...जनलोकपाल या लोकपाल को लेकर देश में जो हाय-तौबा मची है, उसे देखते हुए वो कहावत अचानक फिर याद आ गई...अपना मतलब साफ करूं, उससे पहले एक किस्सा.. |
प्रस्तुतकर्ता नीरज जाट |
राजनीति में स्लेजिंग – ताकि भटके सबका ध्यान |
ब्लॉगर्स मीट वीकली (5) Happy Janmashtami & Happy Ramazan |
एक गाँव को आप भी दुरस्त कर दें। बस बैठे-बैठे खीसें निपोरना ही आता है |
फ़ॉलोअर
यह ब्लॉग खोजें
मंगलवार, अगस्त 23, 2011
अन्ना और अमन शांति
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
चर्चा मंच के स्तर को ,बनाये रखने को प्राथमिकता देनी होगी , ज्ञानात्मक प्रतिस्पर्धा ,सदैव सार्थक होती है / आपका संकलन ,संपादन ,स्तरीय है ,फिर भी इसको विस्तृत ,बहुयामी बनाने की आवश्यकता है , ...शुभ कामनाएं
जवाब देंहटाएंअच्छी चर्चा!
जवाब देंहटाएंआभार!
--
यह महीना रक्षा बंधन, जन्माष्टमी और रमजान कि बधाइयों का महीना है. मेरी तरफ से भी सब को बधाई.
सुन्दर चर्चा
जवाब देंहटाएंwaah ji waah bahut sundar
जवाब देंहटाएंअच्छी चर्चा!
जवाब देंहटाएंआभार!
--
यह महीना रक्षा बंधन, जन्माष्टमी और रमजान कि बधाइयों का महीना है. मेरी तरफ से भी सब को बधाई.
यह बात बिल्कुल सही है कि मुल्लाओं में से कुछ मुल्ला अल्लाह के आदेश से हटकर भी कुछ ऐसा कह देते हैं कि अल्लाह के बंदे उससे सहमत नहीं होते।
जवाब देंहटाएंऐसा ही कुछ अन्ना हज़ारे के बारे में इमाम बुख़ारी साहब के बयान के बाद हमने लिखा है। जिसे आप फ़ेसबुक पर देख सकते हैं इस लिंक पर
बुख़ारी साहब का बयान इस्लाम के खि़लाफ़ है
अच्छी चर्चा के लिए आभार और शास्त्री जी के बेटे के लिए दुआ।
हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु को भी ऐसे लोगों ने आजीवन तकलीफ़ें ही दी हैं जो कि अल्लाह से हटकर चलते थे और अंततः उन्होंने शहीद भी एक ऐसे ही नाफ़रमान ने किया। अल्लाह उनके दरजात बुलंद करे और हमें उनके तरीक़े पर चलना नसीब करे।
आमीन !
अच्छी लगी आज की भी चर्चा।
जवाब देंहटाएंयह सिलसिला यूं ही चलता रहे।
------
लो जी, मैं तो डॉक्टर बन गया..
क्या साहित्यकार आउट ऑफ डेट हो गये हैं ?
बढ़िया लिंक्स देने और आलेख शामिल करने के लिए आपका आभार.
जवाब देंहटाएंसुन्दर और सामयिक चर्चा
जवाब देंहटाएंbadhiya charcha .abhar
जवाब देंहटाएंBLOG PAHELI
बहुत ही सार्थक और सामायिक चर्चा थी .....आभार
जवाब देंहटाएंबढ़िया लिंक्स सार्थक और सामायिक चर्चा के लिए आभार....
जवाब देंहटाएं