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Saturday, March 30, 2013

वन्दना की गीतमाला-ए-चर्चा

वन्दना की गीतमाला -ए-चर्चा में आप सबका स्वागत है 

होली के रंगों से सराबोर 
आपका तन मन झूम ही रहा होगा 
तो उसे कुछ मस्ती भरे नगमों से 
और खुशगवार बनाया जाये 
वैसे भी दिल्ली में मौसम भी मेहरबान है 
आजकल बिन मौसम बरसात हो रही है 
तो कैसे ना दिल की कली खिलेगी 
और आपके मन की बगिया महकेगी 




"बादल हुआ शराबी" (डॉ.रूपचन्द्र शास

खोया खोया चाँद खुला आसमान 
आँखों में सारी रात जायेगी 
तुमको भी कैसे नींद आएगी 




पल भर के लिए कोई हम से प्यार कर ले झूठा ही सही 
दो दिन के लिए कोई इकरार कर ले झूठा ही सही 



मैं----एक खारा समुंदर बन जाऊं

दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूंढ रहा है 
आवाज़ दे तू कौन सी नगरी में छुपा है 


जाइये आप कहाँ जायेंगे 
ये नज़र लौट के फिर आएगी 


ज़ुल्म होने न दें ग़रीबों पर..........

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवन 
कितना बदल गया इंसान 



इक दिन बिक जायेगा माटी के मोल 
जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल 



अपनी पसंद के भजन या सोंग अपने पीसी में सेव करे चुटकियो में

बजाये जा तू प्यारे हनुमान चुटकी 
तेरे प्रभु जानते हैं बात घट घट की 


नरेन्द्र मोदी से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मिला तो उनके पीए ने उनसे सबसे पहले क्या पूछा?


आगे भी जाने न तू पीछे भी जाने न तू 
जो भी है बस यही इक पल है 


तुझे जीवन की डोर से बांध लिया है बांध लिया है 
तेरे जुल्मो सितम सर आँखों पर 


मेरा प्यार भी तू है ये बहार भी तू है 
तू ही नज़रों में जाने तमन्ना तू ही नज़ारों में 



क्षणिका ..प्रेम (२)

इतना  है तुमसे प्यार मुझे मेरे राजदार
जितने के आसमान पर तारे हैं बेशुमार 




जो हर बेरंग को रँग दें , वो दुनिया जीत लाते हैं '

हाल कैसा है जनाब का क्या ख्याल है आपका 
तुम तो मचल गए हो हो हो यूं ही फिसल गए हा हा हा 



मैंने रखा है मोहब्बत अपने अफसाने का नाम 
तुम भी कुछ अच्छा सा रख दो अपने दीवाने का नाम 



दुनिया में हम आये हैं तो जीना ही पड़ेगा
 जीवन है अगर ज़हर तो पीना ही पड़ेगा 


पिया संग खेलूँ होली फागुन आयो रे 



रेशमी सलवार कुरता जाली  का 
रूप सहा न जाए नखरे वाली का 


इन्तहा हो गयी इंतज़ार की 
आई न कुछ खबर मेरे प्यार की 



मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं 
तुम होती तो ऐसा होता तुम होती तो वैसा होता 



ये चाँद सा रोशन चेहरा जुल्फों का रंग सुनहरा 
ये झील सी नीली आँखें कोई राज़ है इनमे गहरा 
तारीफ करूँ क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया 


अभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं 


अगर बेवफा तुझको पहचान जाते 
खुदा की कसम हम मोहब्बत न करते 

तुम्हारी नज़र क्यूँ खफा हो गयी 
खता बख्श दो गर खता हो गयी 



अच्छा जी मैं हारी  अब तो मान जाओ ना 
छोड़ी सब की यारी मेरा दिल जलाओ ना 



ये कौन आया है रोशन हो गयी महफ़िल किसके नाम से 
मेरे घर में जैसे सूरज निकला है शाम से 



पंछी बनूँ उडती फिरूँ मस्त गगन में 
आज मैं आज़ाद हूँ दुनिया के चमन में 


होठों में ऐसी बात मैं छुपा के चली आई 
खुल जाये वो ही बात तो दुहाई है दुहाई 


तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई 
यूं ही नहीं दिल लुभाता कोई 
जाने तू या जाने ना माने तू या माने ना


हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के 
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के 


तुमको देखा तो ये ख्याल आया 
ज़िन्दगी धूप तुम घना साया 





कहो सच है न ...:)

ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं हम क्या करें 
तसव्वुर में कोई जँचता नहीं हम क्या करें 


हुण हुण दबंग दबंग़ दबंग 
मन परवान लागे चट्टान रहे मैदान मे आगे
हुण हुण दबंग दबंग़ दबंग 






तो दोस्तों वन्दना की गीतमाला को आज यहीं विश्राम देती हूँ …………कहो कैसी लगी ? :) 

अगले हफ़्ते फिर मिलते हैं फिर किसी अन्दाज़ में 
आगे देखिए "मयंक का कोना"
(1)
होली की हुडदंग ( भाग -२ )

18 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति |चर्चा मंच की सूरत ही बदल गयी लगता है |बढ़िया गानों का उपयोग किया है सूत्रों के लिए वन्दना जी |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  2. वन्दना जी आज के चर्चा मंच पर आपकी गीतमाला बहुत बढ़िया रही!
    --
    लिंकों का चयन भी बहुत उत्तम किया है आपने!
    आभार!

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  3. बढ़िया लिंक्स और लिंक्स लगाने का अंदाज़ भी अच्छा .मेरी पोस्ट को स्थान दिया,आभार वंदना जी

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  4. सार्थक लिंक्स के साथ मनपसंद गीतों का संयोजन ! वन्दना जी चर्चामंच का यह अंदाज़ भी बहुत भाया ! आभार आपका !

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  5. आदरणीया वंदना जी बहुत सुन्दर लिंक्स! कल के अवकाश का पूरा सदुपयोग हो जाएगा।
    सादर!

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  6. बढ़िया लिंकों से सजी बेहतरीन चर्चा,आभार.

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  7. बहुत बहुत आभार शास्त्री जी,की मेरी पोस्ट को मंच में इतने सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया...


    RECENT POST: होली की हुडदंग ( भाग -२ )

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  8. वन्दना जी, मानना पडेगा कि हिंदी फ़िल्मी गीतों का आपका ज्ञान अथाह है..हर लिंक के लिए सटीक पंक्तियों का चुनाव..बधाई ! आभार !

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  9. आदरेया वंदना जी गीत माला से शुरू हुआ चर्चा का सफ़र मयंक के कोना तक जाते जाते ह्रदय प्रफुल्लित हो उठा बहुत ही सुन्दर लिंक्स लाये हैं आज की चर्चा हेतु, हार्दिक बधाई आदरेया वंदना जी एवं आदरणीय गुरुदेव श्री रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक' सर.

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  10. sundar links ka sanyojan niraale andaaz me ..abhar

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  11. very nice presentation and many more nice links .thanks a lot vandna ji .happy holi

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  12. गीतों के साथ सजा सुन्दर चर्चा मंच!

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  13. बेहतरीन लिंक्स के साथ साथ चर्चा करने का भी लाजवाब अंदाज, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  14. बहुत ही सुन्दर सूत्र..

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  15. वाह वाह वाह क्या अंदाजे बयां है बहुत सुंदर लगी ये गीत माला हार्दिक बधाई आपको|

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  16. बेहतरीन !!!

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  17. चर्चा में शामिल करने के लिए आभार।

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