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Thursday, July 10, 2014

उम्मीदें और असलियत { चर्चा - 1670 }

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है 
भाजपा सरकार का पहला आम बजट आज प्रस्तुत हो रहा है | बजट के बाद की प्रतिक्रिया अभी बताए देता हूँ | भाजपा के नेता कहेंगे कि यह एक बेहद संतुलित बजट है और विपक्षी पार्टियां इसे पूरी तरह से नकारा सिद्ध करेंगी | वैसे सच यही है कि उम्मीदें बहुत हैं लेकिन असलियत का घूँट कडवा होता है | देखना बस यही है कि आज कितनी कड़वी घूँट कितने सुंदर तरीके से पिलाई जाएगी , पूरा विवरण हासिल करने के लिए फेंकू समाचार चैनलों के सामने बैठना होगा । समाचार देखिएगा लेकिन ब्लॉग जगत को भूलें नहीं |
चलते हैं चर्चा की ओर 
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Amrita Tanmay
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उलूक टाइम्स
आभार 
"कुछ अद्यतन लिंक"
(प्रस्तोता-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
--
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ज़िंदगी 

Kailash Sharma
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रविकर मत कर होड़, मचेगी अफरा-तफरी 

फ़री फ़री मारा किये, किया किये तफ़रीह । 
-परजीवी पीते रहे, दारु-रक्त पय-पीह।...
रविकर की कुण्डलियाँ
--
कभी आपने विचार किया है कि 
हम हिन्दुस्तानियों की हिन्दी खराब क्यों है
इसका मुख्य कारण है कि हमें अपनी हिन्दी के 
व्याकरण का सम्यक ज्ञान नहीं है। 
तो आइए बाते करें हिंदी व्याकरण की- 
--
प्रस्तुतकर्ता 
--
राज-दुलारोनन्हे-मुन्नों,
कल मुझको तुम भूल न जाना!
जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा,
इसी तरह तुम मुझे खिलाना!!
--

तो क्या है! 

मुझको तुम नहीं समझ पाये, तो क्या है!
मेरे इरादों को न समझ पाये, तो क्या है!..
Prabhat Kumar 
--

मैं आज भी वही पुराने ज़माने की माँ हूँ 

-- साधना वैद 

तुम्हारे लिए
मैं आज भी वही
पुराने ज़माने की माँ हूँ
मेरी बेटी
तुम चाहे मुझसे कितना भी
नाराज़ हो लो
तुम्हारे लिए
मेरी हिदायतें और
पाबंदियाँ आज भी वही रहेंगी...
कविता मंच पर संजय भास्‍कर

14 comments:

  1. सुप्रभात
    माँ तो माँ ही है क्या नई क्या पुरानी |कोई भी बजट आए मंहगाई ने तो सारे घरों के बजट फेल कर दिए हैं |समझ से बाहर है ऐसे में कैसे जिया जाए |
    समसामयिक लिंक्स आज |

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  2. बहुत सुंदर गुरुवारीय चर्चा । 'उलूक' के सूत्र 'बात अगर समझ में ही आ जाये तो बात में दम नहीं रह जाता है' को शामिल करने के लिये आभार दिलबाग ।

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  3. बहुत ही बेहतरीन लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा, आभार आपका।

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  4. उपयोगी लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा।
    आपका हृदय से आभार आदरणीय दिलबाग विर्क जी।

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  5. बढ़िया लिंक्स व प्रस्तुति , आ. विर्क साहब , शास्त्री जी व मंच को धन्यवाद !
    I.A.S.I.H - ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  6. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ... आभार!

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  7. बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार दिलबाग जी तथा शास्त्री जी मेरे अंतर की चिंतित माँ के द्वंद्व एवं आशंकाओं को अपने मंच के माध्यम से सबसे साझा करने का अवसर देने के लिये ! अपनी बेटी की सुरक्षा के लिये माँ कभी पुरातन और आधुनिक उपायों में तोल-मोल नहीं करती ! हर हाल में वह अपनी बच्ची को बेरहम दुनिया की बदनीयत निगाहों से बचाना चाहती है !

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  8. बहुत सुन्दर सूत्र...रोचक चर्चा...आभार

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  9. आज के चर्चा-मंच पर सारगर्भित रचनाएँ है ! मेरी रचना को इस मंच पर सम्मिलित करने के लिए धन्यवाद !

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  10. सुन्दर चर्चा-
    आभार आदरणीय-

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  11. बहुत सुन्दर चर्चा...लगभग एक महीने बाद ब्लॉग जगत में सक्रिय हुआ..आनंद आ गया....मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार!!!!

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  12. इस मंच पर तो केवल शहद ही शहद है तो कड़वी घूंट याद कहाँ रहती है .. आभार ..

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"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...